न बोल बम के शोर न घाटों पर कांवड़ों की कतारें, लेकिन आस्था में कोई कमी नहीं रही। भोले भक्त उसी भाव से देवाधिदेव के दर्शन के लिए निकले। मनकामेश्वर महादेव मंदिर जाने वाले मार्ग पर आस्थावानों का उत्साह देखते बना। संगम समेत अन्य घाटों पर सावन सोमवार की डुबकी भी लगी और मंदिरों में महादेव की झांकियों का दर्शन भी। आस्था पथ पर भक्ति भावना की लहरें सावन के दूसरे सोमवार भी इसी तरह हर मन में उमड़ती रहीं।
2 of 7
prayagraj news
- फोटो : prayagraj
रेवती नक्षत्र और सुकर्मा योग में सावन के दूसरे सोमवार पर भगवान शिव को प्रशन्न करने के लिए भक्तों ने संगम तट से लेकर घरों तक प्रतिमाएं बनाकर जलाभिषेक किया। संगम की रेती पर महिलाएं और पुरुष सुबह से ही शिवलिंग की आकृतियां बनाकर फूलमाला चढ़ाते और दीपदान करते रहे। घाटों पर स्नान के बाद शिवालयों में हाजिरी लगती रही।
3 of 7
prayagraj news
- फोटो : prayagraj
हाथों में न फूलमाला न जल। कोविड-19 के प्रतिबंधों की वजह से खाली हाथ ही श्रद्धालु महादेव के दरबार में पहुंच रहे थे। सरस्वती घाट स्थित मनकामेश्वर महादेव की शृंगार आरती तो सुबह छह बजे ही सविधि मंत्रोच्चार के साथ हुई, लेकिन सेना की ओर से सात बजे फाटक खोलने जाने की वजह से श्रद्धालु एक घंटा देरी से मंदिर में प्रवेश कर सके। मंदिर मार्ग केगेट पर ही थर्मल स्क्रीनिंग की जा रही थी।
4 of 7
prayagraj news
- फोटो : prayagraj
भीड़ होने की वजह से पुलिस केजवान गातार सामाजिक दूरी के पालन की अपील करते रहे। दिन के 11 बजे तक दर्शन-पूजन के बाद सेना ने गेट बंद करवा दिया। फिर दूसरी पाली में शाम तीन से रात आठ बजे तक भक्तों ने मनकामेश्वर महादेव के दरबार में हाजिरी लगाई। उधर, अरैल स्थित सोमेश्वर महादेव मंदिर में भी भोले भक्तों की आस्था हिलोरें मारती रही।
5 of 7
prayagraj news
- फोटो : prayagraj
भोर से ही भोले भक्त बाबा के दरबार में पहुंचने लगे। जलाभिषेक पर प्रतिबंध होने की वजह से श्रद्धालुओं ने दूर से बाबा का दर्शन किया। यहां मंदिर परिसर में दिन भर लोक कल्याण और विश्व शांति की कामना से हवन-पूजन और अनुष्ठान हुए। इसी तरह दशाश्वमेध घाट पर हजारों श्रद्धालुओं ने डुबकी लगाई और नागवासुकि महादेव का दर्शन पूजन किया। यहां भी मंदिर परिसर में दूरी बनाकर बारी-बारी से श्रद्धालुओं को प्रवेश दिया जाता रहा।