सुरों की खनक और कथक नृत्य में ठुमरी -होरी की पारंपरिक बंदिशों पर पांवों की भावपूर्ण लोच बृहस्पतिवार की शाम अस्ताचलगामी सूर्य की बाहों में परस कर निहाल हो उठी। कभी शिव तांडव पर भाव-भंगिमाओं से नटराज ने आकार लिया तो कभी गोकुल-वृंदावन की गलियों में गोपियों के विरह और कान्हा के रास ने दिल जीता। सुर-लय-ताल से नहाई अमर उजाला शुभ लाभ कार्निवाल की पांचवीं निशा ऐसे ही मनोहारी भावों के साथ संगम के शहर में हर किसी के जेहनोदिल में उतर गई।
अमर उजाला कार्निवाल : पांचवीं संगीत निशा में नवांकुर प्रतिभाओं ने लूटा दिल
सांझ ढलने के साथ बतौर मुख्य अतिथि नगर आयुक्त चंद्रमोहन गर्ग और भारत तिब्बत सीमा पुलिस के कमांडेंट डब्ल्यू. इनोबी सिंह ने दीप ज्योति प्रज्ज्वलित कर कार्निवाल की संगीत निशा का शुभारंभ किया।
बंदिश के बोल थे- सासू पनियां कैसे जाऊं रसीले दोऊ नैना...। इस ठुमरी पर नृत्य के भावों ने संगीत निशा को ऊंचाई पर खड़ा कर दिया। इनके बाद पुणे से पधारीं नृत्यांगना पूर्णिमा जायसवाल ने कथक नृत्य में शिव स्तुति से वातावरण को शिवमय बना दिया। शिव- शिव- शिव आदि महादेव...पर उन्होंने घुंघरू-तबले के बीच पांवों की लोच के समन्वय स्थापित किया। इसके बाद शुद्ध शास्त्रीय पक्ष में तोडे़, टुकड़े के साथ कई तिहाइयां भी लगाई। फिर मोहक भाव में सुंदर छवि श्याम सुंदर... के बोल पर कान्हा के महारास के महारास की उनकी प्रस्तुति खूब सराही गई।
अंत में दर्शकों के आग्रह पर भजन के बोल- कान्हा रे नंद नंदन... पर नृत्य से उन्होंने विदा ली। इनके बाद अंशुला सिंह ने दमादम मस्त कलंदर... से जहां माहौल बनाया, वहीं शहर के चिकित्सक डॉ. जीके शांगलू ने मुकेश कुमार के स्वरों में - ये मेरा दीवानापन है... की प्रस्तुति से खूब तालियां बटोरीं। इनके बाद कोरस ग्रुप के संस्थापक आर्किटेक्ट पीयूष टंडन ने किशोर कुमार के स्वरों में कई नगमों से दिल जीता।
इनकेबाद दिव्य संगीत केंद्र की निदेशक डॉ मीनाक्षी तिवारी मिश्रा की कोरियोग्राफी में कथक नृत्य की बेजोड़ प्रस्तुति हुई। कशिश वर्मा, रीत और अनिका ने गणेश वंदना की। इनके बादएकल दुर्गा स्तुति की सानवी भोला ने। फिर प्रिंसी कुमारी ने मोहें रंग दे लाल... होरी की बंदिश पर भावपूर्ण नृत्य किया। ठुमरीपर भावपूर्ण नृत्य किया कशिश और भार्गवी बागची ने। इसी क्रम में राधा-कृष्ण की फूलों की होली के भाव भी समूह नृत्य की थिरकन में सजे। ढाई साल की आकर्षिका कृष्ण के रूप में मंच पर सधे अंदाज में पहुंची तो लोग एकटक निहारते रह गए। इनके बाद आर्किटेक्ट विशाल खरे और डॉ. जया खरे ने युगल स्वरों में गीत पेश किया, जिसके बोल थे- लेकर हम दीवाना दिल...।
रात चढ़ने के साथ ही सुर-ताल की सुगंध भी वातावरण में फैलती गई। अदिति जायसवाल के बाद नन्हीं नृत्यांगना फिजा ने अपने भावों से मुग्ध किया तो वैष्णवी मिश्रा, हर्षित कुमार से सुर भी लगे। चेतना ने अपने नृत्य से सबका ध्यान खींचा। सिद्धि साहू, सिद्धार्थ साहू और साक्षी साहू ने भी नृत्य किया। अभिषेक कुमार के जादू के भी लोग कायल हो उठे। संचालन संजय पुरुषार्थी और सौरभ ने किया।
शान बनीं ऊंट-घोड़े की सवारी, आज आनंद लेने का आखिरी मौका
ऊंट-घोड़े, बग्घी और डेकोरेटेड रिक्शा की सवारी के साथ गीत-संगीत का आनंद लेने के लिए शुक्रवार को शहर के लोगों को आखिरी मौका मिलेगा। अमर उजाला कार्निवाली की छह दिवसीय प्रस्तुतियों की आखिरी निशा में एक से बढ़कर एक कलाकारों की प्रस्तुतियां यादगार होंगी। जाने माने कलाकार मंच पर गायन, नृत्य प्रस्तुत करेंगे। इससे पहले बृहस्पतिवार को लोगों का उत्साह देखते बना। अखबार में प्रकाशित कूपन दिखाकर मुफ्त में बच्चे शान की सवारी करने के लिए आतुर दिखे। कूपन दिखाकर लोगों ने परिवार के साथ कार्निवाल में खूब सैर की। ध्यान रखें, अगर आप अमर उजाला के पाठक हैं तो आखिरी शान यहां घर से आते समय कूपन साथ लाना न भूलें।
हंसगुल्ले भी खूब फूटे,रवि इलाहाबादी और रसिया ने किया दर्शकों को लोटपोट
कार्निवाल के इस मंच पर शहर के हास्य कलाकारों का भी खूब जादू चला। रवि इलाहाबादी की मिमिक्री लोगों को पसंद आई। उन्होंने नाना पाटेकर, अमिताभ बच्चन, अक्षय कुमार, अमरीश पुरी की आवाज में डायलॉग सुनाकर चकित किया। तो छूटती रेल, सीमा पर गोलियों की तड़तड़ाहट और फाइटर प्लेन की उड़ान को भी आवाज में बांधने की कोशिश कर तालियां बटोरीं। इसी क्रम में हास्य कवि बृजभूषण रसिया ने भी अपनी हास्य कविताओं से लोगों को खूब हंसाया।