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रामकथा में बोले मोरारी बापू- अपने धर्म में अखंड अनंत विश्वास ही अक्षयवट

Sun, 01 Mar 2020 01:57 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Sun, 01 Mar 2020 01:57 AM IST
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Morari Bapu said in Ram Katha - Akshaywat is the only eternal belief in his religion
prayagraj news - फोटो : prayagraj

अक्षयवट की छांव में यमुना तट पर अरैल में शनिवार से संत मोरारी बापू की ‘मानस-अक्षयवट’ कथा आरंभ हुई। तुलसी कृत मानस की चौपाइयों से उन्होंने सियराम के गान के बाद गुरु की महत्ता बताई तो सद्गुणों की सीख भी दी। कथा के केंद्र में ‘अक्षयवट’ रहा सो उन्होंने बालकांड और अयोध्या कांड की एक-एक पंक्ति लेकर बीज मंत्र दिया, ‘पूजहिं माधव पद जलजाता, परसि अखय बटु हरषहिं गाता/संगमु सिंहासनु सुठि सोहा, छत्रु अखयबटु मुनिमन मोहा।’ कहा, अक्षयवट तीर्थराज प्रयागराज का छत्र है। प्रत्येक सनानती को इस पर गर्व करना चाहिए।

Morari Bapu said in Ram Katha - Akshaywat is the only eternal belief in his religion
prayagraj news - फोटो : prayagraj
जीवन-अध्यात्म के सूत्रों, सरोकारों से जोड़ते हुए बापू ने अक्षयवट का अर्थ बताया। कहा, अपने धर्म में अखंड, अनंत विश्वास ही अक्षयवट है। अक्षय का अर्थ अखंड, अनंत या शाश्वत होता है जबकि वट विश्वास का प्रतीक है। मानस के सभी सातों सोपानों में किसी न किसी रूप में अक्षयवट का उल्लेख है।

अरण्यकांड के पंचवट का अर्थ विवेक, विचार, विनोद, विराग और विस्मय से है। किष्किंधा कांड में बालि-सुग्रीव की लड़ाई में ‘विटप विश्वास’ का उल्लेख है। सुंदरकांड में हंसते-खेलते, कूदते हनुमंत के रूप में वट प्रकट होता है। हनुमान शिव के रूप और शिव का वृक्ष वट है। लंकाकांड में वट, अंगद का अटल विश्वास है, वहीं उत्तरकांड में कागभुसुंडि वट के नीचे रामकथा सुनाते हैं।
Morari Bapu said in Ram Katha - Akshaywat is the only eternal belief in his religion
prayagraj news - फोटो : prayagraj

रामधुन के बाद हनुमान चालीसा के पाठ से ही आरंभ और इसी से मानस कथा के पहले दिन की पूर्णाहुति हुई। सूबे के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य भी कथा के श्रोता के तौर पर मौजूद रहे।

उन्होंने जयश्री राम के जयघोष के साथ प्रयागराजवासियों की ओर से बापू का स्वागत किया। कहा, राम मंदिर का कार्य प्रगति पर है, राम अब टाट की जगह ठाठ से रहेंगे। ऐसे में आज राम की कथा सुनने का उत्साह कई गुना बढ़ गया। उन्होंने बापू को शाल भेंटकर सम्मानित किया जबकि बापू ने उन्हें रामनाम का प्रसाद दिया। कथा में खाक चौक व्यवस्था समिति के महामंत्री महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, सपत्नीक काशी नरेश सहित अनेक विशिष्टजन और बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग प्रांत से आए मानसप्रेमी महिला-पुरुष मौजूद थे।

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Morari Bapu said in Ram Katha - Akshaywat is the only eternal belief in his religion
prayagraj news - फोटो : prayagraj

अक्षयवट मेरे प्रधान श्रोता


संत मोरारी बापू ने कहा, कभी अक्षयवट की छांव में पहली बार याज्ञवल्क्य ऋषि ने महर्षि भरद्वाज को रामकथा सुनाई थी, आज पुन: वही सुअवसर मिला है। मेरे प्रधान श्रोता अक्षयवट ही हैं। मेरा नया वर्ष शिवरात्रि से आरंभ होता है, ऐसे में ‘मानस-अक्षयवट’ नए वर्ष की पहली कथा है। अक्षयवट की छांव में कथा की कामना थी, सो आज पूरी हुई। इससे पहले अक्षयवट का दर्शन भी दुर्लभ था लेकिन प्रधानमंत्री के प्रयासों से यह संभव हो सका।

खास-खास
0 नौ दिनी कथा रविवार से रोजाना सुबह साढ़े नौ बजे से दिन में डेढ़ बजे तक होगी।
0 कथा पंडाल में लगे बोर्ड पर लिखा है, मुस्कुराते रहिये, आप रामकथा में हैं।
0 कथा के बाद सभी के लिए नि:शुल्क भोजन ‘प्रभु प्रसाद’ की भी व्यवस्था है।
0 कथा समापन पर पंडाल में अनेक महिलाओं और पुरुषों ने झांझ बजाते हुए नृत्य किया।
0 पहले किले के करीब यमुना में ही पीपे के पुल पर कथा पंडाल बनाने की योजना थी लेकिन श्रद्धालुओं की सुरक्षा के मद्देनजर यह योजना टाल दी गई। 
0 बापू की व्यास पीठ को ‘अक्षयवट की छांव’ में सजाया गया था। व्यास पीठ के पीछे हनुमान जी की ध्यानमुद्रा की प्रतिमा और बैकड्राप में अक्षयवट के साथ किले की दीवार का मनोरम दृश्य रहा।
 

जीवन में कभी नीरस न हों युवा

संत मोरारी बापू शनिवार को ‘मानस-अक्षयवट’ में युवाओं के लिए किसी शिक्षक की भूमिका में नजर आए। युवाओं से संवाद में उन्होंने उन्हें चार बातों का ध्यान रखने की सीख दी। कहा, जीवन में कभी नीरस नहीं होना चाहिए। जीवन सरस हो क्योंकि हमारा परमात्मा रसमय है। दूसरा, सबकी स्वतंत्रता का सम्मान करते हुए स्वाधीन रहें। तीसरा अपने को निंदा, अकारण क्रोध, ईर्ष्या आदि से मूर्छित न होने दें। चौथा, मोबाइल की बैटरी की तरह ही स्वयं को भी रिचार्ज करने के लिए उतना ही समय परमात्मा को दें। 

बापू बोले, मोबाइल अच्छी चीज है लेकिन इसने हमारे जीवन से विस्मय को खत्म कर दिया है। जीवन के लिए विस्मय, जिज्ञासा जरूरी है। युवाओं में भोग रस होना चाहिए लेकिन सभ्यता और संस्कृति के दायरे में ही रखकर त्याग के साथ। युवाओं में शांत रस और प्रेमरस भी होना चाहिए।

 


बापू की कथा में मिलता है समस्याओं का समाधान


संत मोरारी बापू की कथा में देश-विदेश से जुटे श्रोताओं के लिए परिवार के अतिरिक्त राह और रुकने की दिक्कतें बेमानी रहीं। मुंबई से हरिद्वार होकर आईं लता तेजानी ने कहा, तीन तीन दशकों से जहां भी बापू की कथा होती है, हम निश्चित रूप से पहुंचते हैं। अपने नेत्रहीन पति विजय पांड्या को लेकर उदयपुर से आईं मीता पांड्या बोलीं, कैसी परेशानी, बापू कहते हैं, सहज रहो, यह कथा हमें सहजता सिखाती है।
अहमदाबाद से आईं कांता बेन और स्वरूप भाई बोले, अपनी अनुकूलता के मुताबिक हम कथाओं में जरूर आते हैं। कोई न कोई ऐसा संयोग बनता है कि राह के रोड़े दूर हो जाते हैं। बीकानेर से आईं ज्योति भावसार बोलीं, बीते 33 वर्ष से आ रही हूं, बापू भटके हुए इंसान को राह दिखाते हैं। कथा से हमें नई दिशा मिलती है। साथ आईं सुजाता रमानी ने कहा, बिना पूछे ही हमें हमारी समस्याओं का हल मिल जाता है।

कथा के दौरान सुनाए शेर

बापू ने कथा के दौरान शेर भी सुनाए। पहला, तेरी चौखट पे मर गया जो,उसको जन्नत की हवा रास नहीं आती। दूसरा, ये जिक्र है कि इत्र है, जब तेरी चर्चा होती है तो ये महक जाता है और अंत में उन्होंने सुनाया, जो हल्की बातें करता है, उसकी कितनी भारी मजबूरी है।
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