Magh Mela : तंबुओं की नगरी बसाने के लिए चार जनवरी अंतिम तारीख, सेक्टरवार तैयारियों की समीक्षा
दोपहर एक बजे मेलाधिकारी सेक्टर चार के शिविर कार्यालय पहुंचे। वहीं पर मेला से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और वे़ंडरों को तलब किया गया। इस दौरान मेलाधिकारी ने सेक्टरवाइज बसावट की समीक्षा की।
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कल्पवासियों का माघ मेला में प्रवेश आरंभ, गाटा मार्गों पर तंबू नदारद
संगम की रेती पर पांच दिन बाद छह जनवरी को होने जा रहे माघ मेले के प्रथम स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के लिए कल्पवासियों का आगमन रविवार को आरंभ हो गया। मेला प्रशासन की ओर से ताकत झोंके जाने के बाद भी टिन टेंटेज के टेंडरों में देरी का असर बसावट में दिखने लगा है। वजह है कि अभी तक कल्पवासी गाटा मार्गों पर मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी हैं। भूमि आवंटन के बाद भी ही टिन और टेंटेज की सुविधाओं के लिए तीर्थपुरोहितों को भटकना पड़ रहा है। सुस्ती का यही हाल रहा तो मेला बसाने में दिक्कतें बढ़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता।
समूहों में कल्पवासियों को बसाने वाली तीर्थपुरोहितों की सबसे बड़ी संस्था प्रयागवाल सभा को भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बावजूद इसके वेंडरों की ढिलाई की वजह से अभी सेक्टर तीन, चार, पांच में संस्थाओं के अलावा कल्पवासियों के टेंट नहीं लग सके हैं। कुछ बड़े संतों को छोड़ दिया जाए तो सभी पांच सेक्टरों में गाटा मार्गों का बड़ा हिस्सा अभी खाली पड़ा है। पता चला है कि मेला स्टोर में सुविधाओं की कमी बताकर संस्थाओं और तीर्थपुरोहितों को वापस किया जा रहा है।
प्रथम स्नान पर्व से पहले ही टेंटेज का ठेका लेने वाली कंपनी की ओर से टिन घेरा के लिए लोगों को वापस किया जाने लगा है। सेक्टर-एक अरैल में 40 फीट चौड़ा और 80 फीट लंबा टिन घेरा लेने के लिए टेंट प्रदाता कंपनी के पास पहुंचे तीर्थ पुरोहित को यह कहते हुए वापस कर दिया गया कि अभी टिन घेरा स्टोर में है ही नहीं। उन्हें पौष पूर्णिमा के बाद आठ जनवरी को वेंडर ने बुलाया है। इस तरह के दर्जन भर से अधिक तीर्थपुरोहितों और संस्थाओं को प्रथम स्नान पर्व के बाद टिन घेरा देने के लिए कहा गया है। जबकि, माघ मेले में इस बार पांच लाख से अधिक कल्पवासियों के आने का अनुमान है।
नहीं सुलझा शंकराचार्य विवाद, आज विकल्प तलाशने की उम्मीद
पंचक उतरने के बाद भी ज्योतिष्पीठ की भूमि सुविधाओं का पेच नहीं सुलझ सका है। सुप्रीमकोर्ट के आदेश के अनुपालन में मेला प्रशासन ने इस बार ज्योतिष्पीठ की भूमि आरक्षित कर ली है। हालांकि विकल्प के तौर में वद्रिकाश्रम, हिमालय के नाम से ज्योतिष्पीठ की भूमि आवंटित करने की सहमति बनी है, लेकिन पता प्रयागराज का दिए जाने से संत भूमि पूजन के लिए राजी नहीं हैं। सोमवार को इस मसले का हल निकाले जाने की उम्मीद है।
माघ मेले में ज्योतिष्पीठ के भूमि आवंटन पर 31 दिसंबर के बाद फैसला होना था। पंचक शनिवार को ही उतर गया , लेकिन रविवार की शाम तक मेला प्रशासन और संतों के बीच इस मसले पर वार्ता नहीं हो सकी थी। ज्योतिष्पीठ के प्रतिनिधि ब्रह्मचारी श्रीधरानंद का कहना था कि जबतक ज्योतिष्पीठ की भूमि आवंटित नहीं होगी, तब तक वह मेला में प्रवेश नहीं करेंगे। उधर, मेलाधिकारी अरविंद चौहान ने दोहराया कि ज्योतिष्पीठ के मामले में कोर्ट के आदेश का अनुपालन किया जा रहा है। इसका रास्ता भी सुझाया गया है। संतों से सोमवार को वार्ता की जाएगी, ताकि समाधान निकल सके।