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Magh Mela : तंबुओं की नगरी बसाने के लिए चार जनवरी अंतिम तारीख, सेक्टरवार तैयारियों की समीक्षा

Mon, 02 Jan 2023 12:44 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज
अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज Published by: विनोद सिंह Updated Mon, 02 Jan 2023 12:44 AM IST
सार

दोपहर एक बजे मेलाधिकारी सेक्टर चार के शिविर कार्यालय पहुंचे। वहीं पर मेला से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और वे़ंडरों को तलब किया गया। इस दौरान मेलाधिकारी ने सेक्टरवाइज बसावट की समीक्षा की।

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Magh Mela: January 4 is the last date for setting up a city of tents
Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : अमर उजाला।
माघ मेले के प्रथम स्नान पर्व से पहले रविवार को मेलाधिकारी अरविंद चौहान ने सेक्टरवाइज शिविरों की वसावट की स्थिति की समीक्षा की। सेक्टर मजिस्ट्रेटों की मौजूदगी में वेंडरों से शिविरों को लगाए जाने के बावत जानकारी ली गई। बताया गया कि अभी 50 फीसदी संस्थाएं बस चुकी हैं। मेलाधिकारी ने चार जनवरी तक भूमि आवंटन के सापेक्ष सभी संस्थाओं के शिविर बसाने की हिदायत दी।


दोपहर एक बजे मेलाधिकारी सेक्टर चार के शिविर कार्यालय पहुंचे। वहीं पर मेला से जुड़े सभी अधिकारियों, कर्मचारियों और वे़ंडरों को तलब किया गया। इस दौरान मेलाधिकारी ने सेक्टरवाइज बसावट की समीक्षा की।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक संस्था को अनुमन्य सुविधाएं हर हाल में उपलब्ध कराई जाएं। माघ मेले में आने वाले सभी संतों को सुविधाएं उपलब्ध कराने और प्रथम स्नान पर्व से पहले शिविरों को स्थापित करने के निर्देश दिए। मेलाधिकारी ने बताया कि जिन संस्थाओं ने उनसे सीधे संपर्क किया है, उनके शिविर लगवा दिए गए हैं। कोशिश की जा रही है कि समय रहते आवंटित भूमि पर आने वाली संस्थाओं को बसा दिया जाए।
Magh Mela: January 4 is the last date for setting up a city of tents
Prayagraj News : नए साल के पहले दिन संगम पर उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।

कल्पवासियों का माघ मेला में प्रवेश आरंभ, गाटा मार्गों पर तंबू नदारद

संगम की रेती पर पांच दिन बाद छह जनवरी को होने जा रहे माघ मेले के प्रथम स्नान पर्व पौष पूर्णिमा के लिए कल्पवासियों का आगमन रविवार को आरंभ हो गया। मेला प्रशासन की ओर से ताकत झोंके जाने के बाद भी टिन टेंटेज के टेंडरों में देरी का असर बसावट में दिखने लगा है।  वजह है कि अभी तक कल्पवासी गाटा मार्गों पर मूलभूत सुविधाएं पूरी तरह बहाल नहीं हो सकी हैं। भूमि आवंटन के बाद भी ही टिन और टेंटेज की सुविधाओं के लिए तीर्थपुरोहितों को भटकना पड़ रहा है। सुस्ती का यही हाल रहा तो मेला बसाने में दिक्कतें बढ़ने से इन्कार नहीं किया जा सकता।

Magh Mela: January 4 is the last date for setting up a city of tents
Prayagraj News : नए साल के पहले दिन संगम पर उमड़ी भीड़। - फोटो : अमर उजाला।

समूहों में कल्पवासियों को बसाने वाली तीर्थपुरोहितों की सबसे बड़ी संस्था प्रयागवाल सभा को भूमि आवंटन की प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। बावजूद इसके वेंडरों की ढिलाई की वजह से अभी सेक्टर तीन, चार, पांच में संस्थाओं के अलावा कल्पवासियों के टेंट नहीं लग सके हैं। कुछ बड़े संतों को छोड़ दिया जाए तो सभी पांच सेक्टरों में गाटा मार्गों का बड़ा हिस्सा अभी खाली पड़ा है। पता चला है कि मेला स्टोर में सुविधाओं की कमी बताकर संस्थाओं और तीर्थपुरोहितों को वापस किया जा रहा है।

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Magh Mela: January 4 is the last date for setting up a city of tents
Prayagraj News : माघ मेला। - फोटो : अमर उजाला।

प्रथम स्नान पर्व से पहले ही टेंटेज का ठेका लेने वाली कंपनी की ओर से टिन घेरा के लिए लोगों को वापस किया जाने लगा है। सेक्टर-एक अरैल में 40 फीट चौड़ा और 80 फीट लंबा टिन घेरा लेने के लिए टेंट प्रदाता कंपनी के पास पहुंचे तीर्थ पुरोहित को यह कहते हुए वापस कर दिया गया कि अभी टिन घेरा स्टोर में है ही नहीं। उन्हें पौष पूर्णिमा के बाद आठ जनवरी को वेंडर ने बुलाया है। इस तरह के दर्जन भर से अधिक तीर्थपुरोहितों और संस्थाओं को प्रथम स्नान पर्व के बाद टिन घेरा देने के लिए कहा गया है। जबकि, माघ मेले में इस बार पांच लाख से अधिक कल्पवासियों के आने का अनुमान है।

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Prayagraj News : माघ मेले में पहुंचे संत। - फोटो : अमर उजाला।

नहीं सुलझा शंकराचार्य विवाद, आज विकल्प तलाशने की उम्मीद

पंचक उतरने के बाद भी ज्योतिष्पीठ की भूमि सुविधाओं का पेच नहीं सुलझ सका है। सुप्रीमकोर्ट के आदेश के अनुपालन में मेला प्रशासन ने इस बार ज्योतिष्पीठ की भूमि आरक्षित कर ली है। हालांकि विकल्प के तौर में वद्रिकाश्रम, हिमालय के नाम से ज्योतिष्पीठ की भूमि आवंटित करने की सहमति बनी है, लेकिन पता प्रयागराज का दिए जाने से संत भूमि पूजन के लिए राजी नहीं हैं। सोमवार को इस मसले का हल निकाले जाने की उम्मीद है।

 माघ मेले में ज्योतिष्पीठ के भूमि आवंटन पर 31 दिसंबर के बाद फैसला होना था। पंचक शनिवार को ही उतर गया , लेकिन रविवार की शाम तक मेला प्रशासन और संतों के बीच इस मसले पर वार्ता नहीं हो सकी थी। ज्योतिष्पीठ के प्रतिनिधि ब्रह्मचारी श्रीधरानंद का कहना था कि जबतक ज्योतिष्पीठ की भूमि आवंटित नहीं होगी, तब तक वह मेला में प्रवेश नहीं करेंगे। उधर, मेलाधिकारी अरविंद चौहान ने दोहराया कि ज्योतिष्पीठ के मामले में कोर्ट के आदेश का अनुपालन किया जा रहा है। इसका रास्ता भी सुझाया गया है। संतों से सोमवार को वार्ता की जाएगी, ताकि समाधान निकल सके।

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