जिले की 18 लाख आबादी के बीच सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में कुल पांच वेंटिलेटर हैं। कोरोना संक्रमण को लेकर क्वारंटाइन किए जा रहे लोगों की हालत गंभीर हुई तो सिर्फ पांच को ही वेंटिलेटर में रखा जा सकेगा। छठवें के लिए जिले के सरकारी व गैर सरकारी अस्पतालों में कोई इंतजाम नहीं है। ऐसे में कोरोना वायरस का संक्रमण जिले में फैलने पर हालात बेकाबू हो सकते हैं।
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आइसोलेशन वार्ड
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कोरोना वायरस संक्रमण को रोकने के लिए जिला प्रशासन पूरी तरह से संजीदा है। देश के अलग-अलग प्रांतों व विदेशों से लौटे लोगों की थर्मल स्क्रीनिंग किए जाने के बाद उनके घरों में होम क्वारंटाइन किया जा रहा है। दूसरी ओर शनिवार रात से वायरस फैलने का तीसरा चक्र शुरू हो रहा है। इस चक्र के दौरान कोरोना संक्रमित मरीजों की संख्या एकाएक बढ़ सकती है। संभावित स्थिति से निपटने के लिए महकमे के पास समुचित इंतजाम नहीं दिख रहा है।
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छावला स्थित आईटीबीपी कैंप जहां संक्रमित लोग आइसोलेशन में रखे जा रहे हैं
- फोटो : पीटीआई
18 लाख की आबादी वाले जिले में महज पांच वेंटिलेटर है। इनमें दो संयुक्त जिला चिकित्सालय, एक तेजमती अस्पताल मंझनपुर व दो नवजीवन अस्पताल कशिया में हैं। उधर घरों में क्वारंटाइन किए जा रहे लोगों का आंकड़ा शुक्रवार की शाम तक 2411 पहुंच चुका है। होम क्वारंटाइन किए जा रहे कामगारों के हालात अचानक बिगड़ सकते हैं। संक्रमण बढने पर मरीज को सांस लेने में तकलीफ होती है।
इन स्थितियों में वेंटिलेटर के अलावा कोई दूसरा रास्ता उनके इलाज का नहीं बचता। ऐसा हुआ तो जिले में पांच के बाद छठवें मरीज को समुचित इलाज दे पाना संभव नहीं दिख रहा है। सीएमओ डॉ. पीएन चतुर्वेदी का कहना है कि अभी एक भी पॉजिटिव मरीज नहीं मिला। क्वारंटाइन पर चल रहे लोगों की हालत भी ठीक है। अस्पतालों में बेडों की संख्या बढ़ा दी गई है। किसी भी स्थिति से निपटने के लिए महकमा पूरी तरह से तैयार है।