संगम पर बुधवार को मकर संक्रांति पर अखाड़ों के संतों,महामंडेश्वरों संग विदेशी संतों ने भी पुण्य की डुबकी लगाई। संगम तट पर आध्यात्मिक संस्कृति के विविध रूप-रंग देखते बने। संन्यासी, बैरागी हों या गृहस्थ। सभी एक साथ एक राह पर चले। संगम तीरे डुबकी की बहोड़ में छोटे-बड़े, अमीर-गरीब के फर्क मिट गए। देश-दुनिया से आए संतों-भक्तों ने एक साथ गोता लगाकर त्रिवेणी को नमन किया।
जर्मनी के लाला बाबा दो अन्य विदेशी संतों के साथ मकर स्नान के लिए संगम पहुंचे। हाथ पर टैटू और लंबी जटा वाले इन विदेशी साधुओं ने गंगा, यमुना, विलुप्त सरस्वती के तट पर डुबकी लगाने के बाद सूर्य को अर्घ्य भी दिया और तिलक लगाकर निहाल हुए।
लंबी जटा और बाहों पर टैटू वाले बाबाओं ने संक्रांति पर्व पर भक्ति के रंग को गाढ़ा बनाया
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माघ मेला 2020
- फोटो : Prayagraj
जगदगुरु स्वामी वासुदेवानंद महाराज के अलावा बाघंबरी गद्दी मठ व संगम स्थि बड़े हनुमान मंदिर के प्रबंधक योग गुरु आनंद गिरि महाराज, विष्णु संप्रदाय के महामंडलेश्वर संतोष दास सतुआ बाबा, स्वामी अधोक्षजानंद महाराज, शारदानंद सरस्वती महाराज, महामंडलेश्वर प्रेम दास महाराज, महामंडलेश्वर त्यागी जी महाराज के अलावा बड़ी तादाद में संतों ने संगम पर आस्था की डुबकी लगाई और उत्तरायण हुए भगवान सूर्य की विश्व कल्याण की कामना से आराधना की।
विदेशी भजनानंदियों ने संगीतमय भजनों से रेती पर खींचा संतों-भक्तों का ध्यान
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इसी तरह संगम की रेती पर स्नान के साथ ही ध्यान और सत्संग करने वालों की भी टोलियां जगह-जगह ढोल, मजीरे के साथ संगीतमय हरिनाम का पाठ करती रहीं। इस्कॉन के विदेशी साधकों व भजनानंदियों की भी टोली जंबे, झांझ, मजीरे के साथ हरे राम नाम संकीर्तन कर संतों-भक्तों का ध्यान खींचती रही।
वाहनों से बेरोकटोक संगम तक गए अफसरों के रिश्तेदार
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संगम स्नान के लिए व्हील चेयर से पहुंची वृद्धा
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मकर संक्रांति स्नान पर्व पर मेला क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध को लेकर आम श्रद्धालुओं को फजीहत झेलनी पड़ी। एक ओर जहां सामान्य श्रद्धालुओं के दो पहिया वाहन भी परेड में प्रवेश करते ही रोक दिए गए, जिसे लेकर लोगें में नाराजगी रही। स्नानार्थियों की सुरक्षाकर्मियों से झड़पें होती रहीं। वहीं तमाम वीआईपी चार पहिया वाले वाहनों से संगम तक गए। इसमें बड़ी संख्या में पुलिस और प्रशासन के अफसरों के रिश्तेदार और करीबी शामिल थे। प्रतिबंध के बावजूद वीआईपी वाहनों का संगम तक जाने का सिलसिला बेरोकटोक जारी रहा।
शहरियों ने लगाया ‘पुण्य’ का भंडारा, आयुर्वेदिक चाय की रही धूम
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मकर संक्रांति पर्व पर शहरियों ने स्नानार्थियों का जगह-जगह स्वागत किया। संगम चौराहे से लेकर बालसन चौराहा, सिविल लाइंस बस अड्डा सहित दर्जन भर से ज्यादा स्थानों पर भंडारे आयोजित किए गए। इसमें चाय-नाश्ता के अलावा श्रद्धालुआें को खिचड़ी खिलाई गई। बालसन चौराहे और सिविल लाइंस बस अड्डे के करीब लगे भंडारे सहित तकरीबन सभी जगहों पर आयोजकों की ओर से प्रसाद पाने के लिए श्रद्धालुओं से प्रेमपूर्वक अनुरोध किया जाता रहा।
आयुर्वेदिक चाय की रही धूम
भंडारे में आयुर्वेदिक चाय की भी धूम रही। संगम चौराहे पर एक संस्था की ओर से आयुर्वेदिक चाय की व्यवस्था की गई थी, यहां चाय पीने वालों का तांता लगा रहा।