प्रयागराज हादसा : चीखने तक का भी नहीं मिला मौका, घायलों ने बयां किया दर्द
हटिया हादसे में घायल नीरज केशरवानी एसआरएन अस्पताल में जब यह बातें बता रहा था, तो वह दर्द से कराहे जा रहा था। उसने जो आपबीती बयां की, उसे सुनकर आसपास मौजूद लोग भी स्तब्ध रह गए।
बताया कि सिर पर भारी चीज गिरी तो लगा कि घर गिर गया। इसके बाद क्या हुआ, कुछ पता नहीं। शरीर में कई जगह चोट लगी थी और बेतहाशा दर्द हो रहा था। जिससे चीख भी नहीं निकल पा रही थी।
इतना बताते-बताते उसकी आंखें भर आईं। नीरज के हाथ-पैर के साथ ही सिर और पीठ में गंभीर चोट आई है। जिस भवन का छज्जा गिरा, नीरज उसी में नीचे पान की दुकान चलाता है।
भगवान ने बचा लिया, बस
हटिया हादसे में जख्मी होकर एसआरएन पहुंचने वालोें में नैनी का सूरज पाल भी शामिल था। उसके सिर में चोट आई है। उसने बताया कि वह अपने साथियों संग बकरा मंडी के पास बन रहे एक मकान में मजदूरी कर रहा था। लंच के बाद सब वापस काम पर जाने की तैयारी कर रहे थे। तभी पानी बरसने लगा, जिस पर वह भी साथियों संग भागकर सामने स्थित पान की दुकान पर पहुंच गया। अचानक भरभराकर छज्जा सिर पर गिर पड़ा। जोरदार चोट लगने से वह बेसुध हो गया। कुछ देर बाद होश आया तो खुद को मलबे में दबा पाया। बाद में पुलिसवालों ने बाहर निकालकर अस्पताल भेजा। उसका कहना था कि मौत सामने थी, बस भगवान ने बचा लिया।
नगर निगम की रिपोर्ट के आधार पर होगी कार्रवाई: एसएसपी
हटिया मामले में पुलिस नगर निगम की रिपोर्ट के आधार पर आगे कार्रवाई करेगी। एसएसपी शैलेश कुमार पांडेय ने बताया कि नगर निगम प्रकरण की जांच करेगा। इसमें तमाम बिंदु होंगे। किराया कौन वसूल रहा था और मरम्मत की जिम्मेदारी किसकी थी, इसकी भी जांच होगी। निगम की ओर से तैयार की गई जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उधर मौके पर जुटे लोगों ने बताया कि संबंधित भवन ठाकुरद्वारा ट्रस्ट का है। इसके अध्यक्ष सालिगराम केशरवानी थे जिनका निधन हो चुका है। अब उनके बेटे सुभाष केशरवानी ही ट्रस्ट का काम देखते हैं।
किसी ने पिता तो किसी ने खोया भाई
हटिया हादसे में किसी ने अपना पिता तो किसी ने अपना भाई खोया। अपनों की मौत की खबर मिली तो परिजन रोते-बिलखते मौके पर पहुंचे। शवों को देखते ही वह फूट-फूटकर रोने लगे। हादसे के बाद घटनास्थल से लेकर एसआरएन अस्पताल तक कोहराम मचा रहा।
हादसे में जान गंवाने वाला राजेंद्र पटेल के मौत की खबर पर उसका 14 साल का बेटा समर पटेल रिश्तेदारों संग मर्चरी पहुंचा था। उसने बताया कि पिता रोज की तरह सुबह काम पर निकले थे। घर में उसके अलावा दो बहनें, दो भाई व मां हैं। बहनों की अभी शादी भी नहीं हुई है। पिता ही एकमात्र कमाऊ सदस्य थे। अब क्या होगा, कुछ समझ नहीं आ रहा।
इसी तरह एक अन्य मृतक श्यामबाबू का भाई नानबाबू मर्चरी पहुंचा था। उसने बताया कि उसके भाई का पांच साल का एक बेटा है। पिता का निधन हो चुका है और घर में बूढ़ी मां हैं। मां और भाई की पत्नी को खबर नहीं है। उन्हें कैसे बताऊंगा, समझ नहीं पा रहा हूं।
छह महीने में ही उजड़ गया सुहाग
उधर हादसे में मृत पंचायती अखाड़ा निवासी नीरज केशरवानी के घर भी कोहराम मचा रहा। मर्चरी पहुंचे रिश्तेदार हिमांशु ने बताया कि नीरज उनके जीजा थे। छह महीने पहले उनकी शादी हुई थी। जिस भवन में यह हादसा हुआ वहां नीरज कोल्डड्रिंक की दुकान चलाते थे। 16 अप्रैल को उनकी शादी उसकी चचेरी बहन शानू से हुई थी। बेटे की मौत की खबर पर मां भी बदहवास हो गई थीं।