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संक्रांति की पहली किरण से हर्षित हुआ मन, श्रद्धालुओं ने कहा- अलौकिक है कुंभ

Tue, 15 Jan 2019 06:12 PM IST
vivek shukla ब्यूरो, अमर उजाला, प्रयागराज
ब्यूरो, अमर उजाला, प्रयागराज Published by: vivek shukla Updated Tue, 15 Jan 2019 06:12 PM IST
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Devotee shahi snan in kumbh mela 2019 prayagraj
shahi snan

पहला शाही स्नान जितना संत, महात्माओं के लिए दिव्य रहा, उससे कहीं ज्यादा श्रद्धालुओं के लिए भी अंतरात्मा को झकझोरने वाला रहा। संक्रांति के सूर्य की पहली किरण से कुंभ नगरी में बसे श्रद्धालुओं का मन पुलिकित हो गया।  संगम की रेती पर नागा संन्यासियों को गंगा में डुबकी लगाते फिर रेत में लोटते-पोटते देख, श्रद्धालुओं को धरती पर भगवान शिव और उनके गणों की याद आ गई है। गुजरात के गांधीनगर से आई ताराबेन और हीरा भाई पटेल के पास इस दृश्य का बखान करने के लिए शब्द नहीं मिल रहे थे। काफी देर तक दोनों सिर्फ हाथ जोड़े खड़े रहे। वे दोनों सिर्फ इतना कह पाए कि उनका जीवन धन्य हो गया।

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मंगलवार की सुबह श्रद्धालुओं का जितना रेला सड़कों पर था, उससे कहीं ज्यादा गंगा में तड़के ही डुबकी लगा चुका था। भरतपुर राजस्थान के मांगेराम अपनी पूरी टोली के साथ यहां पहुंचे थे। सुबह जब वह स्नान के लिए निकले तो वह कई रास्तों से घूमकर गंगा तट तक पहुंचे। बताया कि जैसे ही उन्होंने गंगाजल में प्रवेश किया, उन्हें उनकी दिवंगत मां की याद आ गई। बताते-बताते उनकी आंखें भर आई।

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इधर कल्पवासियों ने गंगा स्नान के साथ ही अपने पूर्र्वजों को भी अध्र्य दिया। आसमान की तरफ दोनों हाथ उठाकर कल्पवासियों ने अपने परिजनों की सुख, संपदा का आर्शीवाद मांगा। शिविरों में लौटने के बाद कल्पवासियों ने खिचड़ी दान का कार्यक्रम पूरा किया।  इटावा के ग्रामीण क्षेत्र से आए रविकांत दीक्षित और ममता दीक्षित ने बताया कि उन्होंने तड़के ही स्नान किया, फिर नागा संयासियों का दर्शन करने पहुंच गए। गुरू का पूजन करने के उपरांत अन्न ग्रहण किया।

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इस बीच संतों के शिविर में सुबह से हवन पूजन कार्यक्रम शुरू हो गया। स्वामी हंसदेवाचार्य के साथ उनके श्रद्धालुओं ने भी करीब डेढ़ घंटे तक हवन पूजन के उपरांत संयासियों को दक्षिणा भी दिया। यही क्रम प्रखर महाराज, स्वामी अवधेशानंद गिरी, स्वामी शांतानंद, जैसे अनेक संतो कें पंडालों में कथा, पूजन चलता रहा। शंकराचार्यों के शिविरों में भी पहले स्नान से कई धार्मिक गतिविधियां शुरू हो गई। स्वामी वासुदेवानंद, स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती ने बताया कि पूरे कुंभ तक अब धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियांं चलती रहेंगी।

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इस बीच स्नान से लौटने के बाद नागा संन्यासियों के डेरों में आर्शीवाद देने का क्रम चला। बिहारी के समस्तीपुर से शिवपूजन अपने पत्नी बच्चे को लेकर जब एक  नागा संन्यासी के पास पहुंचे तो नागा संन्यासी ने मोर पंखी से उनके बच्चे को आशीर्वाद दिया और कुछ जड़ी बूटी देकर कहा कि इसे बच्चे के गले में बांधना, खूब फलेगा। इस दौरान इस्कान के भक्तों की निराली छंटा को स्नान करने आए लोगों ने बड़ी उत्सुकता के साथ देखा। वृंदावन से आए बैलों के रथ पर इस्कान के संस्थापक प्रभुपाद की मूर्ति रखकर रथ के आगे भजन गाकर नाचते हुए कृष्ण उपासकों को देखने के लिए जगह-जगह भीड़ लगती रही। युवाओं और पहली बार कुं भ का शाही स्नान देख रहे लोगों को लिए यह सब कुछ किसी अचंभे जैसा था।  

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