इलाहाबाद हाईकोर्ट में अर्जेंट मुकदमों की फाइलिंग और सुनवाई इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से ही किए जाने को लेकर हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने कई प्रकार की आशंकाएं जाहिर करते हुए सवाल उठाए हैं। बार एसोसिएशन के निवर्तमान अध्यक्ष राकेश पांडे व महामंत्री जेबी सिंह तथा नवनिर्वाचित अध्यक्ष अमरेंद्र सिंह व महासचिव प्रभा शंकर मिश्र ने संयुक्त रूप से मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर जानना चाहा है कि अदालत किन मुकदमों को अर्जेंट मानते हुए सुनवाई करेगी।
एसोसिएशन ने सवाल उठाया है कि क्या सभी जमानत और अग्रिम जमानत के मामलों तथा आपराधिक मुकदमों को ही अति आवश्यक श्रेणी का माना जाएगा अथवा सिविल मुकदमों में भी अति आवश्यक मुकदमों के लिए कोई वर्गीकरण किया गया है। बार एसोसिएशन ने हाईकोर्ट द्वारा जारी ई फाइलिंग के नोटिस में वकालतनामा और शपथपत्र पत्र दाखिल किए जाने को लेकर भी संदेह जताया है। एसोसिएशन का कहना है कि वकालतनामा और शपथ पत्र इलाहाबाद में ही बनाए जाने की अपेक्षा की गई है। मौजूदा परिस्थितियों में वादकारी बाहर से इलाहाबाद आ नहीं सकते हैं और यदि वह आते भी हैं तो वकीलों और मुंशियों के संपर्क में आएंगे, जिससे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना संभव नहीं होगा और लॉक डाउन का उद्देश्य विफल हो जाएगा।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट
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बार एसो. का कहना है कि आधार कार्ड आधारित प्लेटफार्म और पोर्टल उपलब्ध है, इसका उपयोग करके सोशल डिस्टेंसिंग का पालन किया जा सकता है। बार ने ई सिग्नेचर और आधार की व्यवस्था लागू किए जाने की मांग की है। इसके अलावा बार एसोसिएशन ने मौजूदा स्थितियों में जब तक कि ई फाइलिंग और वीडियो कांफ्रेंसिंग का सिस्टम ठीक तरीके से काम न करने लगे और अधिवक्ता उसे अच्छे से समझ ना लें, नो एडवर्स आर्डर की व्यवस्था लागू रखने का भी अनुरोध किया है।
एसोसिएशन का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से मुकदमों की सुनवाई में कई प्रकार की समस्याएं आ सकती हैं जैसे कि कमजोर नेटवर्क या बिजली ना होना। सिस्टम ठीक तरीके से काम ना करना जैसी समस्याएं आ सकती हैं। बार ने यह भी मांग की है कि सिर्फ एडवोकेटरोल में शामिल वकीलों और सीनियर एडवोकेट को ही डिजिटल लिंक की सुविधा मिलनी चाहिए।
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वकीलों की मदद के लिए 4 सदस्यीय कमेटी गठित
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने लॉक डाउन के दौरान अधिवक्ताओं को किसी प्रकार की कठिनाई न हो, इसके लिए 4 सदस्यीय कमेटी बनाई है। कमेटी में निवर्तमान अध्यक्ष और मंत्री तथा नवनिर्वाचित अध्यक्ष और मंत्री शामिल होंगे। अधिवक्ताओं से कमेटी ने अपील की है कि किसी भी प्रकार की कठिनाई अथवा समस्या होने पर वह कमेटी के सदस्यों से टेलीफोन पर संपर्क कर अपनी परेशानी बता सकते हैं। जैसे भी संभव होगा अधिवक्ताओं को मदद पहुंचाई जाएगी।