सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर हुए थार हादसे में आगरा के तीन युवकों की मौत हो गई। तीन युवकों की मौत से परिवारों में मातम है। राहुल, सक्षम और साहिल के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
आगरा की रेणुका बाग कॉलोनी (कमला नगर) के 22 वर्षीय सक्षम गौतम जिंदादिली के लिए जाने जाते थे। किसी की भी मदद करनी हो तो पीछे नहीं हटते थे। मां के सपने पूरे करने के लिए कम उम्र में ही नौकरी शुरू कर दी। वह पिता का मजबूत सहारा बनना चाहते थे मगर पल भर में सब बिखर गया। सपनों के साथ बुढ़ापे की लाठी टूट गई।
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सहारनपुर में थार हादसा
- फोटो : अमर उजाला
रविवार सुबह 5:30 बजे सहारनपुर हादसे की जानकारी देने के लिए फोन आया तो सुनते ही पिता के पैरों तले जमीन खिसक गई। मां फूट-फूटकर रोने लगीं। घर के बाहर जुटे काॅलोनी के लोग और रिश्तेदार सभी की आंख नम हो गई। पिता राजेंद्र गौतम घर के बाहर ही किराना स्टोर चलाते हैं। उनके दो बेटे सक्षम और पार्थ थे। सक्षम ने डी.फार्मा किया था। पार्थ बीबीए की पढ़ाई कर रहा है।
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सहारनपुर में थार हादसा
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सक्षम ने 6 महीने पहले ही फार्मा कंपनी में मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव की नौकरी शुरू की थी। वह एरिया मैनेजर था। मामा सूर्यकांत गाैतम ने बताया कि सक्षम पढ़ाई में काफी होशियार था। नौकरी कर उन्होंने पिता के साथ भाई की भी जिम्मेदारी निभाने लगे थे।
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फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तीन दिन की मिली थी छुट्टी
सक्षम मां मधु का दुलारा था। उनके साथ ही रोजाना खाना खाता था। 30 सितंबर को उसका जन्मदिन था। मगर वह हर साल अपना जन्मदिन हिंदू कैलेंडर के मुताबिक नवरात्र में पंचमी को मनाता था। इसके लिए मां के साथ पिता भी तैयारी करते थे। इस बार भी दो दिन पहले ही पंचमी को जन्मदिन मनाया गया। सक्षम को जाॅब लगने के छह महीने बाद 3 दिन की छुट्टी मिली थी। उन्होंने दोस्तों साहिल, राहुल, हेमंत और सचिन के साथ बाहर जाने का कार्यक्रम मनाया। शनिवार रात 9 बजे काॅलोनी में ही दुर्गा पंडाल में चल रहे भंडारे में प्रसाद लिया। इसके बाद सभी थार गाड़ी से हरिद्वार के लिए निकल गए थे। बाद में देहरादून होते हुए मसूरी भी जाते।
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फाइल फोटो
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
मां करती रहीं दुआ, परिजन संभालते रहे
सुबह तकरीबन 5:30 बजे साहिल के पिता ने राजेंद्र गाैतम को फोन किया। उन्हें हादसे की जानकारी दी। सुनते ही पिता बेसुध हो गए। मां भी रोने लगी। बाद में भाई पार्थ ने उन्हें संभाला। कुछ देर बाद पिता और ताऊ घटनास्थल के लिए रवाना हो गए। मां को नहीं बताया कि सक्षम अब वापस नहीं आएगा। मां बेटे के सकुशल लाैटने की दुआ करती रहीं। उन्हें लग रहा था कि बेटा ठीक होकर आएगा।