फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Agra News ›   UP News agra Bulls not sold at Bateshwar Mela

मुंशी प्रेमचंद की कहानी में सिमटा बटेश्वर का बैल मेला, इस बार भी निराश होकर लौट रहे किसान

Thu, 31 Oct 2019 03:43 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Thu, 31 Oct 2019 03:43 PM IST
विज्ञापन
UP News agra Bulls not sold at Bateshwar Mela
बटेश्वर पशु मेले से पशु लेकर लौट रहे किसान - फोटो : अमर उजाला
आगरा के बटेश्वर का बैल मेला मुंशी प्रेमचंद की कहानी में सिमट कर रह गया है। पिछली साल की तरह इस साल भी बटेश्वर में बैलों का मेला नहीं लगा। बैल लेकर पहुंचे किसान बोले कि उत्तर भारत के प्रमुख मेलों में शुमार बैलों का यह मेला अब इतिहास के पन्नों में सिमट गया है। 
विज्ञापन


मुंशी प्रेमचंद की कहानी पंचपरमेश्वर में उन्होंने लिखा है कि अलगू चौधरी ने बटेसर मेले से दो बैल खरीदे थे। वही ख्यातिलब्ध बैलों का मेला अब समय के साथ खात्मे की कगार पर है। उत्तर भारत के प्रमुख मेलों में शामिल बटेश्वर मेले में पिछले साल भी बैलों की खरीद फरोख्त नहीं हुई थी। 
विज्ञापन


इस साल भी बैलों का मेला नहीं लगा। एटा के पिपरिया गांव के रामनाथ, राम प्रसाद, ओमवीर, ब्रजेश, बहादुरपुर के मुकेश, भूरे, रविंद्र सिंह आदि कुछ लोग 25 अक्तूबर को बैल खरीदने को पहुंचे थे। पर, मेले में बैल नहीं मिले तो वापस लौट गए। उन्होंने जिला पंचायत की बेरूखी और बदइंतजामी को मेला उजड़ने के लिए जिम्मेदार ठहराया। 
विज्ञापन
विज्ञापन

खरीददार न मिलने पर लौटे किसान

बाद में बैल लेकर पहुंचे फिरोजाबाद के उरावर गांव के अनीश, सचिन, अरविंद, रामपाल, बाकलपुर के रूप सिंह, लहररू के विजेंद्र, श्याम सिंह, सोरों के रामकिशोर, विमलेश को मेले में कोई खरीददार नहीं मिला। मजबूरी में वे भी बैल लेकर वापस लौटे। उन्होंने बताया कि बैलों का मेला 7-8 दिन लगता था। 

जिला पंचायत की अनदेखी से मेला इतिहास में सिमट गया है। मेले से जुड़ी यादों को साझा करते हुए उन्होंने दुख जताया। वहीं मेला प्रभारी अमित प्रताप सिंह बैलों का मेला न लगने का कारण कृषि का यंत्रीकरण होना मानते हैं।   

जिला पंचायत की अनदेखी से मेला इतिहास में सिमट गया है। मेले से जुड़ी यादों को साझा करते हुए उन्होंने दुख जताया। वहीं मेला प्रभारी अमित प्रताप सिंह बैलों का मेला न लगने का कारण कृषि का यंत्रीकरण होना मानते हैं।  
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed