मथुरा की मांट विधानसभा से आठ बार विधायक रहे श्याम सुंदर शर्मा का किला इस बार भाजपा के युवा नेता राजेश चौधरी ने ढहा दिया। एबीवीपी से छात्र राजनीति में कदम रखने वाले राजेश भाजपा के युवा मोर्चा में लंबे समय तक रहे। केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की टीम में काम करते हुए अपनी पहचान बनाई। कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराने वालों में राजेश चौधरी भी शामिल थे। विधानसभा चुनाव 2022 में उन्होंने मांट सीट पर जीत का परचम फहराया।
राजेश चौधरी ने कड़े मुकाबले में लगभग साढ़े नौ हजार वोटों से निकटतम प्रतिद्विंदी बसपा के श्याम सुंदर शर्मा को मात दी। राजेश ने साल 2015 में अपनी पत्नी को नौहझील ब्लॉक प्रमुख बनवाकर सेंध लगाना शुरू कर दी थी। इसके बाद उनका हौसला बढ़ता गया। इसी का नतीजा रहा कि राजेश चौधरी ने इस बार श्याम सुंदर से विधायकी की कुर्सी छीन ली।
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समर्थकों के साथ राजेश चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
एबीवीपी से छात्र राजनीति में कदम रखने वाले राजेश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बजरंग दल से लेकर भाजयुमो में राष्ट्रीय मंत्री और प्रदेश में महामंत्री बनने के बाद सुबे में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। इसके बाद प्रदेश में भाजपा प्रवक्ता बनकर संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के मंत्रियों से नजदीकियां होने के बाद भी संगठन में लगातार सक्रिय रहे।
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भाजपा विधायक राजेश चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
एबीवीपी से छात्र राजनीति में कदम रखने वाले राजेश ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। बजरंग दल से लेकर भाजयुमो में राष्ट्रीय मंत्री और प्रदेश में महामंत्री बनने के बाद सुबे में अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। इसके बाद प्रदेश में भाजपा प्रवक्ता बनकर संगठन पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली। केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार के मंत्रियों से नजदीकियां होने के बाद भी संगठन में लगातार सक्रिय रहे।
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मांट से नवनिर्वाचित विधायक राजेश चौधरी
- फोटो : अमर उजाला
लाल चौक पर झंडा फहराने वाली टीम में थे
छात्र राजनीति से शुरुआत करने वाले राजेश चौधरी ने छात्र आंदोलन किए। बजरंग दल में रहते हुए गोतस्करों से गोवंशों को आजाद करवाया। भाजयुमो में रहते हुए 1992 में मुरली मनोहर जोशी के नेतृत्व में कश्मीर के लाल चौक पर तिरंगा फहराया गया था। तब राजेश चौधरी भी इस टीम का हिस्सा रहे थे। नवनिर्वाचित विधायक का कहना है कि मांट की जनता के विश्वास पर वह खरे उतरेंगे।
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श्याम सुंदर शर्मा
- फोटो : AMAR UJALA
हर दल में पैठ रखते हैं श्याम
दिल्ली से लेकर लखनऊ तक पिछले करीब 35 साल से राजनीतिक चर्चा होती रही कि श्याम सुंदर शर्मा के सामने किसी को भी प्रत्याशी बनाओ, हार ही मिलेगी। क्योंकि राजनीतिक दांव-पेंच में माहिर श्याम की काट किसी के पास नहीं थी। जानकार कहते हैं कि श्याम खुद तो चुनाव लड़ते ही हैं, विधानसभा चुनाव में मांट से किसको टिकट मिलनी चाहिए, उसमें भी दखल होता था, क्योंकि श्याम की पैठ हर पार्टी में रही है। लेकिन इस बार जनता धोखा दे गई और मथुरा की राजनीति के चाणक्य चारों खाने चित हो गए।