मौसम के बदलते ही साइबेरियन पक्षियों को गिरिराज जी की तलहटी भाने लगी है। सर्दियों में तलहटी के आसपास अनेक देशों के पक्षी अपना डेरा जमा रहे हैं। इसमें उजबेकिस्तान, कजाकिस्तान, मंगोलिया व तिब्बत समेत अन्य देशों से आने वाले पक्षियों की अनेक प्रजातियां शामिल हैं। यहां पिछले तीन सालों के दौरान इस बार सबसे अधिक प्रवासी पक्षी इन दिनों नजर आ रहे हैं। धार्मिक क्षेत्र मथुरा जनपद के जोधपुर झाल, गोवर्धन नाला, सोनोठ, वृंदावन, खायरा, कोकिला वन, गोकुल बैराज, कोयला-अलीपुर व यमुना नदी में तो प्रवासी पक्षी शरण पा ही रहे हैं, साथ ही गोवर्धन पर्वत के परिक्रमा मार्ग में पूछरी व राधाकुंड के पास हजारों की संख्या में प्रवासी पक्षियों की उपस्थिति देखी जा रही है। गोवर्धन पर्वत की बड़ी परिक्रमा में पूछरी के लोटा से तीन किलोमीटर कुम्हेर रोड स्थित मथुरा-भरतपुर की सीमा पर प्रवासी पक्षियों ने अपना बसेरा बना लिया है। यह पक्षी पिछले तीन साल से यहां नियमित सर्दियों के मौसम में नजर आते हैं।
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अठखेलियां: गिरिराज जी की तलहटी में साइबेरियन पक्षियों का बसेरा, अगर आप पक्षी प्रेमी हैं तो पूछरी और राधाकुंड जरूर आइए
Thu, 16 Dec 2021 11:29 AM IST
Abhishek Saxena
रामकुमार रौतेला, अमर उजाला, मथुरा
रामकुमार रौतेला, अमर उजाला, मथुरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Thu, 16 Dec 2021 11:29 AM IST
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प्रवासी पक्षियों का बसेरा
- फोटो : अमर उजाला
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प्रवासी पक्षी फ्लेमिंगो
- फोटो : अमर उजाला
इन पक्षियो में पेलिकन सहित ग्रेटर फ्लेमिंगो का 9 सदस्यीय समूह मौजूद है। इसके साथ ही नोर्दन पिनटेल, कॉमन टील, कॉमन पोचार्ड, रेड-क्रेस्टेड पोचार्ड, वेगौन, गेडवाल, नोर्दन शोवलर, कॉमन कूट, बार-हेडेड गूज, ग्रेटर कोर्मोरेंट , स्पूनबिल, पेंटेड स्टार्क, ब्लैक नेक्ड स्टार्क आदि पक्षियों के झुंड यहां देखे जा रहे हैं। इसमें पेलिकन की मौजूदगी यहां 50 से 60 पक्षियों के रूप में है।
खेतों में प्रवासी पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
गोवर्धन की छोटी परिक्रमा मार्ग के निकट राधाकुंड बाईपास पर सैकड़ों बीघा जमीन जलमग्न है। यहां भी विदेशी पक्षी अपना डेरा बना रहे हैं। कौरेर गांव निवासी नरेंद्र सिनसिनवार ने बताया कि पिछले तीन साल से खेतों में पानी भर जाने के कारण प्रवासी पक्षी आते हैं लेकिन इस साल ज्यादा पानी भर गया है तो इन प्रवासी पक्षियों की संख्या हजारों में हो गई है। सभी गांववासी इनकी सुरक्षा करते हैं।
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डॉ. केपी सिंह, पक्षी विशेषज्ञ
- फोटो : अमर उजाला
सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे से आते हैं पक्षी
भारतीय क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों का माइग्रेशन मुख्यत: सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे से होता है। सेंट्रल एशियाई फ्लाई-वे भौगोलिक रूप से उत्तर, मध्य और दक्षिण एशिया और ट्रांस-काकेशस के 30 देशों को कवर करता है, जिनमें मध्य एशियाई व यूरोपीय देश शामिल हैं। इस फ्लाई-वे से 182 प्रजातियों के प्रवासी जलीय पक्षी सर्दियों में प्रवास पर आते हैं, जिसमें 29 विश्व स्तर पर संकटग्रस्त और खतरे के निकट वाली प्रजातियां शामिल हैं। जिनका प्रवास वर्तमान में मथुरा जनपद में देखने को मिल रहा है। - डॉ. केपी सिंह, पक्षी विशेषज्ञ एवं अध्यक्ष बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी
भारतीय क्षेत्र में प्रवासी पक्षियों का माइग्रेशन मुख्यत: सेंट्रल एशियन फ्लाई-वे से होता है। सेंट्रल एशियाई फ्लाई-वे भौगोलिक रूप से उत्तर, मध्य और दक्षिण एशिया और ट्रांस-काकेशस के 30 देशों को कवर करता है, जिनमें मध्य एशियाई व यूरोपीय देश शामिल हैं। इस फ्लाई-वे से 182 प्रजातियों के प्रवासी जलीय पक्षी सर्दियों में प्रवास पर आते हैं, जिसमें 29 विश्व स्तर पर संकटग्रस्त और खतरे के निकट वाली प्रजातियां शामिल हैं। जिनका प्रवास वर्तमान में मथुरा जनपद में देखने को मिल रहा है। - डॉ. केपी सिंह, पक्षी विशेषज्ञ एवं अध्यक्ष बायोडायवर्सिटी रिसर्च एंड डवलपमेंट सोसाइटी
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खेत में भरे पानी में प्रवासी पक्षी
- फोटो : अमर उजाला
मथुरा-भरतपुर सीमा पर पक्षियों का डेरा
बड़ी परिक्रमा मार्ग के निकट भरतपुर जनपद के खेरा ब्राह्मण, सामई व कौरेर और मथुरा जनपद के गोवर्धन तहसील के कौथरा गांव की सैकड़ों बीघा किसानों की जमीन पर बारिश का पानी भर जाता है। यहां बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी आ रहे हैं। इस बार यह संख्या करीब चार हजार से ऊपर है। - रजनीकांत मित्तल, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी वन प्रभाग मथुरा
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बड़ी परिक्रमा मार्ग के निकट भरतपुर जनपद के खेरा ब्राह्मण, सामई व कौरेर और मथुरा जनपद के गोवर्धन तहसील के कौथरा गांव की सैकड़ों बीघा किसानों की जमीन पर बारिश का पानी भर जाता है। यहां बड़ी संख्या में विदेशी पक्षी आ रहे हैं। इस बार यह संख्या करीब चार हजार से ऊपर है। - रजनीकांत मित्तल, प्रभागीय निदेशक सामाजिक वानिकी वन प्रभाग मथुरा
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