आगरा में छह महीने की ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 193 रंगरूट सिपाही बन गए। उन्होंने गुरुवार को पासिंग आउट परेड में देश सेवा की शपथ ली। इस दौरान एडीजी अजय आनंद ने परेड की सलामी ली।
पासिंग आउट परेड: 193 रंगरूट बने सिपाही, देश सेवा की ली शपथ
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गांव की पगडंडी से निकले युवाओं को मिला मुकाम
उन्होंने कहा कि कई बार पुलिसकर्मियों को 24-24 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है। इससे अपने व्यवहार में परिवर्तन न करें। अच्छे से काम करना चाहिए। इसके बाद एडीजी ने सभी को कर्तव्य पालन की शपथ दिलाई। आंतरिक और बाहृय परीक्षा में अव्वल रहने वालों को पुरस्कृत भी किया गया। सिपाहियों को आजमगढ़ में नई तैनाती दी जाएगी।
स्कूलिंग से ही मन में वर्दी पहनकर देश सेवा करने की चाहत थी। इसलिए जीतोड़ मेहनत की। उसका ही नतीजा रहा कि आखिर मुकाम पा लिया। वर्दी पहनकर जहां गर्व महसूस हो रहा है तो मां के पैर छूकर पूरी निष्ठा के साथ ड्यूटी करने का आशीर्वाद भी लिया। यह कहना था, गांव शोयेपुर, छोटा लालपुर, वाराणसी निवासी संजय कुमार गौड़ का। सिपाही बनने के बाद उनकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।
संजय ने बताया कि वह छोटे से गांव से है। पिता अशोक गौड़ एक कंपनी में नौकरी करते हैं। उनका सपना था कि वो देश की सेवा करे। इसलिए शुरू से ही तैयारी में लगा हुआ था। सिपाही भर्ती परीक्षा में संजय का चयन हो गया। पासिंग आउट परेड में उनकी मां निर्मला देवी आईं थी। बेटे को वर्दी पहनता देखकर उनकी आंखों में खुशी के आंसू छलक आए। उन्होंने बेटे को अच्छे से काम करने के लिए आशीर्वाद भी दिया।
'जनता की सेवा करूंगा'
मोहल्ला मदनपुर, भदोही निवासी राहुल कुमार बिंद के पिता मुंशीलाल मुंबई में आटो चलाते हैं। राहुल दो भाई और तीन बहन में सबसे बड़ा है। उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही पुलिस की वर्दी पहनना चाहता था। अब वह जनता की सेवा में सदैव तत्पर रहेगा। अपने काम को पूरी ईमानदारी के साथ करेंगे।
पांच गांव में पहला है सनी
गांव जलालपुर, वाराणसी निवासी सनी कुमार ने बताया कि पिता सुरेंद्र प्रसाद शिक्षक है। वह दो भाइयों में बड़ा है। क्षेत्र के पांच गांव में कोई भी पुलिस विभाग में भर्ती नहीं हुआ है। उसने न सिर्फ अपने मां-बाप का नाम रोशन किया, बल्कि गांव का भी। उन्होंने यही कहा कि वह अपनी ड्यूटी पूरी निष्ठा के साथ करेगा।
सही तैयारी से मिलती है सफलता
बचपन से ही वर्दी पहनना चाहता था
गांव चकमान सिंह, भदोही निवासी प्रदीप कुमार पुत्र स्व. शिव सागर पाल बचपन से ही वर्दी पहनकर देश की सेवा करना चाहते थे। इसके लिए तैयारियों में लगे हुए थे। उन्होंने बताया कि वह जनता की सेवा करना चाहते हैं। उनके गांव में कोई पुलिस वाला नहीं है। अपने वरिष्ठ अधिकारियों का सम्मान करेंगे। जनता की समस्या के समाधान को सर्वोपरी रखेंगे।