फिरोजाबाद जिले में सर्दी लगातार बढ़ रही है। न्यूनतम तापमान 12 डिग्री तक पहुंच चुका है। ऐसी स्थिति में रात के समय में खुले आसमान के नीचे रहना लोगों के लिए मुश्किल खड़ी कर रहा है। नगर निगम प्रतिवर्ष गरीब-बेसहारा लोगों के लिए आश्रय स्थल व ठंड से बचाव के लिए चौराहों पर गैस हीटर की व्यवस्था करता है। हालांकि इस बार गरीब और बेसहारा लोगों को सर्दी से बचाने के लिए अभी तक नगर निगम ने सुध नहीं ली है। अस्थायी आश्रय स्थल न होने के कारण लोग दुकानों के फड़ अथवा दवा मार्केट के बरामदे में सोकर रात गुजारने को विवश है।
जिले में शीत लहर का असर शनिवार रात रहा। शीतलहर के कारण सबसे अधिक दिक्कत जिला अस्पताल के सामने दवा मार्केट, दाऊदयाल डिग्री कॉलेज के सामने ओवरब्रिज के नीचे, डीएवी इंटर कॉलेज के सामने, कोटला चुंगी चौराहा के समीप मार्केट के बरामदे व नसिया जी मंदिर के बाहर दुकानों के फड़ पर लेटने वाले बेसहारा लोगों को हुई। इन लोगों के पास न तो कंबल था और न ही रजाई। चादर के सहारे ठिठुरते करवट बदलकर ये लोग रात काटने को विवश नजर आए।
2 of 5
रिक्शे को ही बना लिया बिस्तर
- फोटो : अमर उजाला
फुटपाथ पर सोने वालों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। हालांकि नगर निगम द्वारा शहर में दो स्थाई आश्रय स्थलों का संचालन किया जाता है। इनमें से एक सुभाष तिराहे और दूसरा आसफाबाद रेलवे लाइन के पास है। सुभाष तिराहे के समीप बने आश्रय स्थल में करीब 20 से अधिक लोगों के सोने की व्यवस्था है और आसफाबाद रेलवे लाइन सहारे बने आश्रयस्थल में सौ लोगों के सोने की व्यवस्था है।
3 of 5
ओवरब्रिज के नीचे सोते लोग
- फोटो : अमर उजाला
डीएवी इंटर कॉलेज के सामने रात करीब 12 बजे दो युवक ओवरब्रिज के नीचे सोते नजर आए। इनमें से एक जमीन पर लेटा था तो दूसरा उसके समीप बैठा था। इन लोगों के पास न तो बिछाने को दरी थी और न ही ओढ़ने को चादर। जमीन पर लेटा युवक अपने साथी युवक से बात कर रहा था। सर्दी के कारण दोनों को नींद नहीं आ रही थी।
4 of 5
मंदिर के पास सोते लोग
- फोटो : अमर उजाला
मां राजराजेश्वरी कैला देवी मंदिर के सामने साधु-संत खुले आसमान के नीचे लेटे नजर आए। इनके पास न तो कंबल था और न ही रजाई। ये लोग केवल चादर के सहारे ही रात काटने को विवश थे। एक साधु के पास तो इतनी लंबी चादर भी नहीं थी कि उसके पैर तक ढक जाए। वह बार-बार करवट बदलता नजर आया।
5 of 5
सर्द रात में ठिठुरने को मजबूर लोग
- फोटो : अमर उजाला
जीएम जलकल व आश्रय स्थल प्रभारी रामबाबू राजपूत ने बताया कि फुटपाथ पर सोने वाले लोगों को आश्रय स्थलों में भेजने की व्यवस्था की जाएगी। अस्थायी आश्रय स्थलों के बनवाने का काम भी जल्द शुरू करा दिया जाएगा।