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श्रीकृष्ण जन्मभूमि केस: अब तक इतने दावेदारों ने मांगी अमीन रिपोर्ट, जानें पूरा मामला, कब क्या हुआ
Sat, 24 Dec 2022 02:49 PM IST
धीरेन्द्र सिंह
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Sat, 24 Dec 2022 02:49 PM IST
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान प्रकरण
- फोटो : अमर उजाला
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मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मस्थान ईदगाह प्रकरण में हिंदू सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष विष्णु गुप्ता के दावे पर अदालत द्वारा ईदगाह की अमीन सर्वे की रिपोर्ट से मुस्लिम पक्ष सन्न रह गया है। आखिर अमीन रिपोर्ट की मांग के बाद इतनी हलचल क्यों बढ़ गई है। जानतें हैं ये पूरा मामला..., वैसे बता दें करीब आधा दर्जन से अधिक वादकारी दावा दायर करने के बाद अदालत से अमीन रिपोर्ट की मांग कर चुके हैं। यह अधिकतर वाद सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में चल रहे हैं। उन्होंने इसकी जानकारी होने से इंकार कर दिया है। उधर, अन्य दावाकर्ताओं ने सिविल जज सीनियर डिवीजन तृतीय की अदालत द्वारा अमीन रिपोर्ट मंगाए जाने के आदेश का स्वागत किया है।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान
- फोटो : अमर उजाला
पहले समझें कैसे मिली 13.37 एकड़ जमीन ट्रस्ट को
दावे में भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का इतिहास बताते हुए कहा गया है कि भगवान श्री कृष्ण के बाद उनके प्रपौत्र ब्रजनाभ ने उक्त स्थल पर भगवान श्री कृष्ण का मंदिर बनवाया। हूण, कुशांक के हमलों में ध्वस्त मंदिर को सम्राट चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य ने बनवाया, जिसे आक्रांता महमूद गजनबी ने वर्ष 1017 ईसवी में क्षतिग्रस्त कर दिया। महाराज विजयपाल तौमर के शासनकाल में हिंदू जाट शासक जाजन उर्फ जज्ज सिंह जोकि मथुरा के मगोर्रा के सामंत शासक थे, तीसरी बार मंदिर का निर्माण 1150 ईसवीं में कराया। इस मंदिर को आक्रांता सिंकदर लोदी ने 16वीं सदी में क्षतिग्रस्त कर दिया। 1618 ईसवीं में ओरछा के राजा बुंदेला राजावीर सिंह जूदेव ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान पर मंदिर का निर्माण कराया। 1669 में मुगल शासक औरंगजेब ने मंदिर को ध्वस्त करा दिया और जहां श्रीकृष्ण का जन्म हुआ उस चबूतरे पर ईदगाह का निर्माण करा दिया।
श्रीकृष्ण जन्मस्थान परिसर का मुख्य द्वार बंद
- फोटो : अमर उजाला
नीलाम हुई थी जमीन
1803 ईसवीं में मराठों को परास्त कर अंग्रेज मथुरा आए और ईस्ट इंडिया कंपनी ने 1815 ईसवीं में कटरा केशवदेव की भूमि रकवा 13 एकड़ 37 डेसीमल को खुली नीलामी में बेचा और यह जमीन बनारस के राजा पटनीमल ने खरीद ली। राजा पटनीमल अपने जीते जी मंदिर न बनवा सके। पंडित मदन मोहन मालवीय जब मथुरा आए तो उन्होंने जन्मस्थान की दुर्दशा देखी। तत्काल उद्योगपति जुगल किशोर बिरला के माध्यम से राजा पटनीमल के उत्तराधिकारियों से जमीन ली और 1951 में जुगल किशोर बिरला ने ट्रस्ट की स्थापना कर वर्तमान मंदिर का निर्माण कराया।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान
- फोटो : Amar Ujala
करीब एक दर्जन दावे चल रहे हैं अदालत में
न्यायालय में करीब एक दर्जन वाद श्री कृष्ण जन्मस्थान ईदगाह प्रकरण को लेकर चल रहे हैं। इनमें से जिन मुकदमों की सुनवाई प्रारम्भ हो चकी हैं। उनमें से अधिकतर ने ईदगाह की अमीन कमीशन सर्वे की रिपोर्ट की मांग की है परंतु सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत ने बजाए अमीन रिपोर्ट मंगाने के केस के स्थायित्व संबंधी बिंदु पर बहस के आदेश दिए हैं। जिसे लेकर मनीष यादव के वाद में इस प्रकार की बहस चल रही है। इस वाद में 7/11 पर बहस जारी है। जबकि अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह एवं वरिष्ठ अधिवक्ता राजेंद्र माहेश्वरी के वाद में इस प्रकार के आदेश के खिलाफ अधिवक्तागण ने जिला जज की अदालत में अपील की है। इस अपील की सुनवाई एडीजे षष्टम की अदालत में चल रही है।
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श्रीकृष्ण जन्मस्थान
- फोटो : अमर उजाला