मथुरा में 1.05 करोड़ रुपये की लूट का ताना-बाना साले कोमल और जीजा नरेश ने मास्टरमाइंड अरविंद उर्फ माया के साथ बुना था। लूट से एक दिन पहले 15 अगस्त को कोमल ने अपने घर गोवर्धन रोड शिव कॉलोनी पर लुटेरों को ठहराया। यहां पर रातभर ठहरे लुटेरों ने सुबह लूट की वारदात को बेखौफ होकर अंजाम देकर पुलिस को खुली चुनौती दी। पुलिस ने पूरी कड़ियां जोड़कर इस बड़ी वारदात का खुलासा कर दिया। कोमल मथुरा में सराफ प्रशांत सिल्वर के यहां नौकरी करता था। उसे बुलियन कारोबारी के बैंक से हर लेन-देन की जानकारी थी। इस जानकारी को उसने अपने बहनोई नरेश को बताया। नरेश आगरा में राघव ज्वेलर्स के यहां नौकरी करता है। नरेश ने दोस्त सादाबाद के अरविंद को पूरा गणित समझाया। इसके बाद अरविंद ने साथियों के साथ मिलकर लूट को अंजाम देने से 15 दिन पहले एक सप्ताह में दो बार रेकी की। रेकी के बाद 16 अगस्त को इस बड़ी वारदात को अंजाम देकर फरार रहो गए।
मथुरा 1.05 करोड़ रुपये लूटकांड: सरगना संग साले-जीजा ने बुना था लूट का ताना-बाना, सराफ के यहां की नौकरी
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लुटेरों ने दो बाइकों से निकलने के बाद वारदात की। एक बाइक चोरी की बताई जा रही है, जबकि दूसरी बाइक मास्टरमाइंड की है। एसपी सिटी मार्तंड प्रकाश सिंह ने बताया कि रेकी के संग नरेश और कोमल ने मिलकर यह पूरा ताना-बाना अरविंद के साथ बुना। अरविंद ने टीम को शामिल करके यह वारदात की थी। जल्द ही मास्टमाइंड और कोमल का बहनोई पुलिस की गिरफ्त में होगा।
व्यापारी नेता सुनील साहनी और रमेश चंद चतुर्वेदी लूट के खुलासे से संतुष्ट नहीं दिखे, जबकि पीड़ित बुलियन कारोबारी राजकुमार अग्रवाल और उसके बेटे मुकुल, राहुल पुलिस अफसरों के सामने खुलासे से संतुष्ट दिखे। व्यापारियों का कहना है कि लूटी गई रकम की शत-प्रतिशत बरामदगी होनी चाहिए। इस पर एडीजी राजीव कृष्ण ने आश्वस्त किया कि जल्द ही फरार मास्टरमाइंड की गिरफ्तारी के साथ लूटी धनराशि बरामद कर ली जाएगी। एडीजी ने संतुष्ट न दिखने वाले व्यापारी नेताओं को सीख देते हुए कहा कि हमें कोई सम्मान की जरूरत नहीं। हमारा काम वारदातों को रोकने के साथ उन्हें खोलने का काम है। खुलासा करना ही उसका पुलिस का सम्मान है। इसके बाद व्यापारी नेता अपना सा मुंह लेकर बाहर चले गए। एडीजी ने पुलिस अफसरों और पुलिस टीम को सम्मान से दूर रहते हुए अपराध और अपराधियों पर पूरी तरह से लगाम लगने के लिए ताकीद किया। व्यापारी नेताओं में अजय गोयल, शशिभानु गर्ग, मुकेश अग्रवाल, हेमेंद्र गर्ग शामिल रहे।
लूटी रकम से लुटेरों ने की खूब मौज-मस्ती
लूट की वारदात को अंजाम देने के बाद लुटेरे सीधे बाजना पहुंचे थे। यहां पर करीब डेढ़ घंटे तक रुके। उसके बाद बाजना से चार बैग खरीदने के बाद ही अलग-अलग हो गए। पकड़े गए तीन लुटेरों के हिस्से में 54 लाख रुपये आए, जबकि तीन हिस्सों के करीब 51 लाख रुपये मास्टरमाइंड अरविंद ले गया। इस हिसाब से पकड़े गए लुटेरों ने करीब नौ लाख रुपये खर्च कर दिए। इन लुटेरों ने खूब मौज मस्ती की और रिश्तेदारों में इस रकम में से धनराशि देना बताया गया है। एसएसपी डॉक्टर गौरव ग्रोवर ने बताया कि फरार मास्टरमाइंड अरविंद और कोमल का बहनोई हत्थे चढ़ने के बाद ही बाकी की रकम बरामद की जाएगी।
1.05 करोड़ रुपये की लूट में शामिल लुटेरों ने मोबाइल का इस्तेमाल नहीं किया। लूट से पहले और बाद में यह मोबाइल इस्तेमाल न होने की बात एडीजी राजीव कृष्ण ने पत्रकार वार्ता में कही। अमर उजाला ने भी खबर में मोबाइल इस्तेमाल न होने का संकेत भी प्रमुखता से प्रकाशित किया था। सीसीटीवी के माध्यम से लुटेरों के गिरेबां तक पुलिस के हाथ पहुंचे, यह समाचार भी प्रमुखता से अमर उजाला ने प्रकाशित किया था। एसपी ग्रामीण श्रीशचंद ने बताया कि चार बैग खरीदने वाले सीसीटीवी फुटेज में लुटेरों के साफ फुटेज आने के बाद ही कामयाबी मिलनी शुरू हो गई। उसके बाद तो लगातार पुलिस लुटेरों के पीछे हो ली।