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Mainpuri Bypolls: मुलायम के गढ़ में कमल खिलाने को सपा के बागी रहे भाजपा की पहली पंसद, फिर भी नहीं मिली जीत
Tue, 22 Nov 2022 08:00 AM IST
धीरेन्द्र सिंह
ज्योत्यवेंद्र दुबे, मैनपुरी
ज्योत्यवेंद्र दुबे, मैनपुरी
Published by: धीरेन्द्र सिंह
Updated Tue, 22 Nov 2022 08:00 AM IST
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सपा प्रत्याशी डिंपल यादव, मुलायम सिंह यादव, भाजपा प्रत्याशी रघुराज सिंह शाक्य
- फोटो : अमर उजाला
सपाई दुर्ग को ध्वस्त कर भगवा लहराने के लिए भाजपा ने क्या कुछ नहीं किया। हर बार चुनाव में नया पैंतरा अजमाया पर कोई भी काम न आया। इन्हीं पैतरों में से एक पैंतरा भाजपा इस बार के लोकसभा उप चुनाव में भी आजमा रही है। ये पैंतरा और कुछ नहीं बल्कि सपा के बागियों पर दांव लगाने का है। जब-जब भाजपा ने मैनपुरी में कमल खिलाने के लिए जोर आजमाइश की तो प्रत्याशी सपा के बागी नेता ही रहे। इस बार भी सपा के बागी रघुराज सिंह पर भाजपा ने दांव खेला है।
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव, साथ में अखिलेश यादव
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद 1998 में हुए लोकसभा चुनाव में भी भाजपा ने फिर यही दांव चला। मुलायम द्वारा खड़े किए गए प्रत्याशी बलराम सिंह यादव के सामने भाजपा ने सपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में शामिल रहे अशोक यादव को प्रत्याशी बनाया। अशोक यादव भी निजी कारणों से सपा से बाकी हो गए थे। जीत का सेहरा इस बार भी सपा प्रत्याशी के सिर पर ही बंधा।
पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव
- फोटो : अमर उजाला
इसके बाद भाजपा ने फिर ये पैंतरा 2004 के लोकसभा चुनाव में आजमाया। 2004 में मुलायम सिंह यादव के सामने सपा के बागी पूर्व सांसद रहे बलराम सिंह यादव को भाजपा ने चुनाव लड़ाया। लेकिन वही बलराम सिंह यादव जो सपा के टिकट पर मैनपुरी से सांसद चुने जाते रहे थे, उन्हें जनता ने नकार दिया और मुलायम सिंह की जीत हुई।
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डिंपल यादव और रघुराज शाक्य
- फोटो : अमर उजाला
मुलायम सिंह के निधन के बाद हो रहे उप चुनाव में भी भाजपा ने इसी पुराने पैंतरे को आजमाने का निर्णय लिया है। इस बार मुलायम की पुत्रवधू डिंपल यादव के आगे सपा के बागी राघुराज सिंह शाक्य को उतारा है। रघुराज दो बार सपा के टिकट पर सांसद और एक बार विधायक भी रह चुके हैं। भाजपा के जिला संगठन से लेकर राष्ट्रीय संगठन में शामिल नेताओं का दावा है कि इस बार मैनपुरी में कमल खिलेगा। अब देखना ये है कि भाजपा का जो पैंतरा हर बार फेल साबित हुआ, इस बार कितना काम आता है।
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भाजपा और सपा के चिन्ह
- फोटो : अमर उजाला