तीर्थनगरी वृंदावन में यमुना तट पर चल रही 40 दिवसीय कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक में अध्यात्म के मोती बरस रहे हैं। रासलीला, श्रीमद्भागवत कथा, संतों के प्रवचन और भजन संध्याओं से वातावरण भक्तिमय है। कुंभ मेला स्थल में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं के पग इन आयोजनों की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। नौ मार्च को दूसरा शाही स्नान है। उससे पहले उत्साह और उल्लास के साथ साधु-संतों और श्रद्धालुओं की भीड़ बढ़ती जा रही है।
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वृंदावन कुंभ बैठक मेला में साधु-संत
- फोटो : अमर उजाला
कुंभ मेला क्षेत्र में प्रवेश करने के साथ ही ब्राह्मण सेवा संघ के खालसे में सुबह से लेकर शाम तक संतों के प्रवचनों के साथ भागवत कथाएं हो रहीं हैं। यहां बनाईं गईं देवी-देवताओं की मूर्तियां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। इसके कुछ दूरी पर संत रसिया बाबा के खालसे में संतों के प्रवचनों का श्रवण कर भक्त आनंदित हो रहे हैं।
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वृंदावन: संतों को किया गया सम्मानित
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कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक के गिर्राजधाम खालसा में सोमवार को महंत योगीराज रामआसरे दास त्यागी के सानिध्य में श्रद्धालुओं ने तीनों अनी और अठारह अखाड़ों समेत मेलाक्षेत्र के सभी महंतों का स्वागत किया गया। महंतों का माल्यार्पण कर उन्हें पटुका ओढ़ाया और फिर शुरू हुए भंडारे में संतों ने प्रसाद पाया। सुबह करीब 11 बजे शुरू हुआ स्वागत और भंडारा देर शाम तक चलता रहा।
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सप्त देवालयों पर हेलीकॉप्टर से होगी पुष्पवर्षा
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कुंभ क्षेत्र में वृंदावन के सप्त देवालयों का शिविर श्यामाश्याम नगर के नाम से बस गया है। यहां भागवत कथा आदि धार्मिक आयोजन हो रहे हैं। सात मार्च को वृंदावन के अभी प्राचीन सप्त देवालयों की शोभायात्रा निकलेगी। इस दौरान आसमान से शोभायात्रा पर पुष्पवर्षा की जाएगी। इसकी व्यवस्था श्रीराधा श्यामसुंदर मंदिर द्वारा की जा रही है।
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धूनी रमाए बैठे साधु
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ब्रज की रज में जगह-जगह धूनी रमाकर साधना कर रहे हठयोगी श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। कोई कितना भी पुकारे, साधना में लीन इन साधुओं को कोई फर्क नहीं पड़ता। साधना समाप्त होने के बाद ही वह अपने आसन से उठते हैं। साधना भी इतनी कठिन कि देखने वाला भी चकित हो जाता है।