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अटलजी के आंगन में झांक रहे उपेक्षा के 'बबूल', जयंती पर दिखीं उदासीनता की तस्वीरें
Wed, 25 Dec 2019 11:51 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 25 Dec 2019 11:51 AM IST
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बटेश्वर
- फोटो : अमर उजाला
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शिव मंदिर श्रृंखला का आचमन कर बहती यमुना नदी के जिस घाट पर कभी अटलजी ने आस्था की डुबकी लगाई थी। आज वह बदहाल पड़ा है। जिस आंगन में खेलकूद कर बडे़ हुए। वहां बबूल के पेड़ झांक रहे हैं। जिस बीहड़ में झरबेरी के बेर तोड़ कर खाए। उसका वन चेतना केंद्र उजड़ा पड़ा है। जिस यज्ञ शाला में आहुतियां दी थी। वह संरक्षण की बाट जोह रही है।
अटल बिहारी वाजपेयी
- फोटो : अमर उजाला
बाइसवें तीर्थंकर भगवान नेमिनाथ की जन्म कल्याण भूमि शौरीपुर-बटेश्वर में ब्रज की विरासत उपेक्षित पड़ी है। यहां लगने वाला उत्तर भारत का प्रमुख मेले का अस्तित्व संकट में है। करीब 45 साल पहले बटेश्वर की बदहाली को पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने उजागर कर केंद्र और प्रदेश सरकार का ध्यान खींचा था। तब से लेकर अब तक हालात जस के तस हैं। उनके दुनिया से जाने के बाद बदहाली दूर करने की बातें खूब हुई। पर, जमीन पर हालात नहीं बदले हैं।
अटल के आंगन को बबूल के पेड़ों ने फिर से घेर लिया
- फोटो : अमर उजाला
अस्थि कलश विसर्जन के दौरान अटल जी के घर के आंगन से बबूल के पेड़ साफ हुए तो लगा कि यादों के स्मारक के रूप में यहां पर उनसे जुड़ा इतिहास जीवंत होगा। साल भर से ज्यादा वक्त बीत गया। अटल के आंगन को बबूल के पेड़ों ने फिर से घेर लिया है। विकास के नाम पर यहां पर एक ईंट नहीं लगी है।
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खंडहर हुआ अटलजी के गांव बटेश्वर का सांस्कृतिक प्रेक्षाग्रह
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अटल जी की बचपन की पाठशाला भी उपेक्षित पड़ी है। उनके गांव की बेटियां उच्च शिक्षा से पहले ही पढ़ाई छोड़ने को मजबूर हैं। जिन गलियों और टीलों पर अटल जी का बचपन बीता, वीरान पड़ी हैं। हद तो ये है कि जिस यज्ञ शाला में अटल जी अहुतियां देते थे, ज्योतिष का अनुसंधान केंद्र थी, उसकी सफाई तक नहीं हुई है। अटलजी की पाठशाला में प्रधानाध्यापक रहे पुत्तूलाल, उनके पारिवारिक भतीजे राकेश वाजपेयी, रमेश वाजपेयी हों या फिर उनका सानिध्य पाने वाले राम सिंह आजाद, जयेंद्र वर्मा। अटल जी की विरासत की उपेक्षा से आहत है। अटल जी की भांजी बहू गंगा देवी ने बताया कि सरकार ने घोषणाएं बहुत की। लेकिन जमीन पर कुछ दिखा नहीं।
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बटेश्वर पर्यटन कांप्लेक्स की हालत
- फोटो : अमर उजाला
छह अप्रैल 1999 को जिस पर्यटन काम्पलेक्स का उद्घाटन अटलजी ने किया था। वह बदहाल पड़ा है। अंधेरगर्दी देखिए कि बटेश्वर मेले के दौरान भी पर्यटन काम्पलेक्स का संचालन शुरू नहीं हो सका। इमारत जर्जर है। दरवाजे, खिड़कियां, शौचालय, पानी की टंकी तक टूटे पडे़ हैं। दीवारें दरक गई हैं। उपकरणों में जंग लग गई है। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए बने काम्पलेक्स की किसी ने सुध नहीं ली है।