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Agra Car Fire: मदद के लिए पहुंचे थे लोग, आग के कारण नहीं बचा सके पांच जिंदगियां
Wed, 23 Dec 2020 12:08 AM IST
Abhishek Saxena
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
Published by: Abhishek Saxena
Updated Wed, 23 Dec 2020 12:08 AM IST
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कार हादसे में मारे गए लोगों के फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
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कार से चीखों की तेज आवाज आ रही थी, महिलाएं चिल्ला रही थीं, कोई बचाओ, कोई बचाओ, एक पुरुष कह रहा था, शीशा तोड़ दो, हमें निकाल लो लेकिन हम इतने बेबस थे कि मदद नहीं कर पाए, आग विकराल थी, लपटें इतनी फैली हुई थीं कि जो नजदीक जाता, झुलस जाता, मजबूरी में दूर से देखते रहे, चीखें धीमी होती गई, अंदर पांच जिंदगियां एक एक कर दम तोड़ती गई... बेबसी का यह दर्द उन लोगों ने बयां किया जो मौके पर सबसे पहले पहुंचे...
यमुना एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना
- फोटो : अमर उजाला
धमाके से आंख खुली और दौड़ लगा दी
सबसे पहले पहुंचे धौरऊ निवासी सतीश वाल्मीकि ने बताया कि उसका घर पास 200 मीटर दूरी पर ही है। खेत में घर बना रखा है। सुबह चार बजे के आसपास पत्नी सरोज की आंख खुली। उसने उसे जगाया और बोली कि पास ही कोई धमाका हुआ है। एक्सप्रेसवे की तरफ से आवाज आई है। वह दौड़ा हुआ पहुंचा तो देखा कि कार आग का गोला बनी हुई है, टैंकर से भी धुआं निकल रहा था। कार से चीखें आ रही थीं, पानी था नहीं, मिट्टी डाली लेकिन आग न बुझी। आस पास से और लोगों को बुलाया।
संबंधित खबर- Agra Car Fire: एक्सप्रेसवे पर जलती कार में फंसे लोग मदद को चीखते रहे, लपटों के आगे बेबस थे ग्रामीण
सबसे पहले पहुंचे धौरऊ निवासी सतीश वाल्मीकि ने बताया कि उसका घर पास 200 मीटर दूरी पर ही है। खेत में घर बना रखा है। सुबह चार बजे के आसपास पत्नी सरोज की आंख खुली। उसने उसे जगाया और बोली कि पास ही कोई धमाका हुआ है। एक्सप्रेसवे की तरफ से आवाज आई है। वह दौड़ा हुआ पहुंचा तो देखा कि कार आग का गोला बनी हुई है, टैंकर से भी धुआं निकल रहा था। कार से चीखें आ रही थीं, पानी था नहीं, मिट्टी डाली लेकिन आग न बुझी। आस पास से और लोगों को बुलाया।
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यमुना एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना: इसी कंटेनर से टकराई थी कार
- फोटो : अमर उजाला
शीशा तोड़ने की कोशिश की, झुलसने से बचे
संदीप के शोर मचाने पर बेहद नजदीक के गांव पुरा लोधी से पहुंचे भोजराज और बनी सिंह ने बताया कि चीखों को सुनकर उनका दिल दहल गया। लग रहा था कि अगर इन लोगों को बाहर न निकाला गया तो थोड़ी ही देर में दम तोड़ देंगे। कोई उपाय न सूझा तो ईंट लेकर कार के नजदीक गए शीशा तोड़ने के लिए। लेकिन आग फैल रही थी, वे झुलसने से बचे। इसके बाद पीछे हट गए।
संदीप के शोर मचाने पर बेहद नजदीक के गांव पुरा लोधी से पहुंचे भोजराज और बनी सिंह ने बताया कि चीखों को सुनकर उनका दिल दहल गया। लग रहा था कि अगर इन लोगों को बाहर न निकाला गया तो थोड़ी ही देर में दम तोड़ देंगे। कोई उपाय न सूझा तो ईंट लेकर कार के नजदीक गए शीशा तोड़ने के लिए। लेकिन आग फैल रही थी, वे झुलसने से बचे। इसके बाद पीछे हट गए।
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कार सवार मृतकों में शामिल मुरली व पत्नी की फाइल फोटो
- फोटो : अमर उजाला
फायर एस्टिंगुइशर से कोशिश की पर आग न बुझी
धौरऊ के नेत्रपाल और सुभाष कांच की फैक्टरी में काम करते हैं। घर में फायर एस्टिंगविशर (आग बुझाने का सिलिंडर) था। इसे लेकर ही दौड़ लिए। पूरा सिलिंडर खाली कर दिया लेकिन आग न बुझी। आखिर में थककर बैठ गए। इस बीच कई लोग टोल प्लाजा पर भागकर गए ताकि दमकल आ जाए और आग बुझा दे। थोड़ी ही देर में दमकल आ गई लेकिन आग इतनी विकराल थी कि इससे भी न बुझी। कर्मचारियों ने कह दिया कि आगरा से और दमकल बुलाई जाएं, तब आग पर काबू पाया जा सकता है।
धौरऊ के नेत्रपाल और सुभाष कांच की फैक्टरी में काम करते हैं। घर में फायर एस्टिंगविशर (आग बुझाने का सिलिंडर) था। इसे लेकर ही दौड़ लिए। पूरा सिलिंडर खाली कर दिया लेकिन आग न बुझी। आखिर में थककर बैठ गए। इस बीच कई लोग टोल प्लाजा पर भागकर गए ताकि दमकल आ जाए और आग बुझा दे। थोड़ी ही देर में दमकल आ गई लेकिन आग इतनी विकराल थी कि इससे भी न बुझी। कर्मचारियों ने कह दिया कि आगरा से और दमकल बुलाई जाएं, तब आग पर काबू पाया जा सकता है।
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यमुना एक्सप्रेसवे पर दुर्घटना
- फोटो : अमर उजाला
लखनऊ एक्सप्रेसवे की जगह यमुना एक्सप्रेसवे पर चढ़ गया था कंटेनर
यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसा कंटेनर चालक की एक भूल के कारण हुआ। जांच में सामने आया कि कंटेनर लखनऊ एक्सप्रेसवे की जगह यमुना एक्सप्रेसवे पर चढ़ गया था। हादसे के बाद कंटेनर चालक गाड़ी के कागज लेकर मौके से फरार भी हो गया। टोल इंचार्ज मेजर (रिटायर्ड) मनीष कुमार ने बताया की कंटेनर को चेक करने पर एक सामान का ई-वे बिल मिला। एसटी के असिस्टेंट कमिश्नर से फोन कर डिटेल निकलवाई, जिससे पता चला कि ई-वे बिल 21 दिसंबर का था, जो जयपुर से पश्चिम बंगाल के लिए था।
यमुना एक्सप्रेसवे पर हादसा कंटेनर चालक की एक भूल के कारण हुआ। जांच में सामने आया कि कंटेनर लखनऊ एक्सप्रेसवे की जगह यमुना एक्सप्रेसवे पर चढ़ गया था। हादसे के बाद कंटेनर चालक गाड़ी के कागज लेकर मौके से फरार भी हो गया। टोल इंचार्ज मेजर (रिटायर्ड) मनीष कुमार ने बताया की कंटेनर को चेक करने पर एक सामान का ई-वे बिल मिला। एसटी के असिस्टेंट कमिश्नर से फोन कर डिटेल निकलवाई, जिससे पता चला कि ई-वे बिल 21 दिसंबर का था, जो जयपुर से पश्चिम बंगाल के लिए था।