विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में सर्वाधिक 13 पदक पाने वाली शिवानी सिंह का कहना है कि वह सर्जन बनकर लोगों की जान बचाना चाहती हैं। वह बचपन से ही डॉक्टर बनना चाहती थीं। इसमें परिवार को पूरा सहयोग मिला। कॉलेज से लेकर किताब चुनने तक में सहयोग दिया। शिवानी इस समय पीजी की तैयारी कर रही हैं। ऑनलाइन ट्यूशन भी ले रही हैं। शिवानी ने बताया कि उन्होंने खूब मेहनत की थी, उसके आधार एक पदक मिलने की उम्मीद तो थी, 13 पदक मिलेंगे यह सोचा नहीं था। शिवानी अलीगढ़ में रामघाट रोड की रहने वाली हैं। पिता नरेंद्र चौधरी सरकारी ठेकेदार हैं। मां शशी चौधरी गृहिणी हैं। दो छोटे भाई हैं। शिवानी का कहना है कि उन्होंने न्यूरो या पीडियाट्रिक में से किसी एक को चुनने का सोचा है।
दीक्षांत समारोह में सोने की चमक: सर्जन बनकर लोगों की जान बचाना चाहती हैं शिवानी, पदक पाने वाले छात्र-छात्राओं ने बताई मेहनत की कहानी
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आत्मनिर्भर बनकर पहचान बनानी है
पांच स्वर्ण पदक पाने वाली राजकीय कन्या महाविद्यालय, सिरसागंज, फिरोजाबाद की एमए हिंदी अंतिम वर्ष की छात्रा उपासना प्रोफेसर बनना चाहती हैं। वह अपने शिक्षक से प्रेरित हैं। उनका कहना है कि वह आत्मनिर्भर बनकर समाज में अपनी पहचान बनाना चाहती हैं। उपासना के पिता हरीराम सिंह किसान और मां चरन देवी गृहिणी हैं। दो भाई हैं, बड़ा पढ़ाई कर रहा है और छोटा नौकरी में हैं।
संदेश : पहले एक लक्ष्य बनाएं। संकल्प रखकर मेहनत करें। खुद पर भरोसा रखें। सफलता जरूर मिलेगी।
चार स्वर्ण पदक पाने वाले डीएस कॉलेज, अलीगढ़ के एलएलबी अंतिम वर्ष के छात्र दीपक शर्मा को वर्ष 2018 में एलएलबी प्रथम वर्ष में भी रजत पदक मिला था। दीपक वर्तमान में आगरा कॉलेज से एलएलएम की पढ़ाई कर रहे हैं। वह पीएचडी में प्रवेश लेकर वह विधि में शोध कार्य करना चाहते हैं। वह शिक्षक बनना चाहते हैं। इनके पिता छोटेलाल और मां अर्चना गृहिणी हैं।
संदेश : नियमित रूप से पढ़ाई करें। शिक्षकों की बात मानें और उनके मार्गदर्शन के अनुसार आगे बढ़ें।
प्रोफेसर बनना चाहते हैं उदित
दीक्षांत समारोह में चार स्वर्ण पदक पाने वाले केए पीजी कॉलेज, कासगंज के एमए अर्थशास्त्र अंतिम वर्ष के छात्र उदित माहेश्वरी प्रोफेसर बनना चाहते हैं। इसी के अनुरूप वह तैयारी में जुटे हुए हैं। उदित के पिता दीपक माहेश्वरी नौकरी करते हैं और मां रचना माहेश्वरी गृहिणी हैं। उदित का कहना है कि वह प्रोफेसर बनकर ज्यादा से ज्यादा लोगों में अपना अर्जित ज्ञान बांटना चाहते हैं।
संदेश : लक्ष्य बनाइए, मेहनत करिए, तब तक लगे रहिए, मंजिल न मिल जाए। खुद पर विश्वास रखिए।
चार पदक मिलना सपना पूरे होने जैसा
तीन स्वर्ण और एक रजत पदक पाने वाली महात्मा गांधी बालिका पीजी कॉलेज, फिरोजाबाद की बीए तृतीय वर्ष की छात्रा नम्रता का कहना है कि चार पदक मिलना उनके सपने के पूरा होने जैसा है। उन्होंने पढ़ाई पूरी मेहनत और लगन से की थी, यह नहीं सोचा था कि चार पदक मिलेंगे। नम्रता शिक्षक बनना चाहती हैं। इनके पिता संतोष कुमार व्यापारी, मां मिथलेश देवी गृहिणी हैं।
संदेश : सेल्फ स्टडी, बेस्ट स्टडी है। लक्ष्य बनाएं और उसको पाने में जुट जाएं।