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Braj Ki Holi 2024: कान्हा संग गोपियों ने खेली छड़ीमार होली, रंगों से सरोबार हुए भक्त; ये है इसकी पौराणिक कथा

Thu, 21 Mar 2024 04:37 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा
संवाद न्यूज एजेंसी, मथुरा Published by: धीरेन्द्र सिंह Updated Thu, 21 Mar 2024 04:37 PM IST
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Braj Ki Holi 2024 Recognition And Date Of Chhadimar Holi In Mathura Gokul
chhadimar holi - फोटो : अमर उजाला
मथुरा होली के रंगों में सराबोर है। चारों ओर सतरंगी छटा बिखर रही है। बरसाना, नंदगांव से होते हुए लठमार होली गुरुवार को गोकुल में छड़ीमार होली में परिवर्तित हो गई। यहां सबसे पहले कान्हा के बाल स्वरूप को पालकी में बैठाकर शोभायात्रा निकाली गई। इसके बाद सजी-धजी गोपियों ने बाल गोपाल के साथ छड़ी मार होली खेली।


रसिया होली के गीतों के बोल बाबा नंद के द्वार मची है होली...गाकर वातावरण को भक्तिमय मना दिया। महिलाएं और युवतियां नृत्य करने पर मजबूर हो रहे थे। सेवायतों के द्वारा श्रद्धालुओं पर ठाकुरजी का प्रसादी रंग और गुलाल डाला। रंग के इस आनंद में देश और विदेश से आये श्रद्धालु सराबोर हो होली के गीतों पर झूम रहे थे। 



 
Braj Ki Holi 2024 Recognition And Date Of Chhadimar Holi In Mathura Gokul
chhadimar holi - फोटो : अमर उजाला
क्यों मनाई जाती है छड़ीमार होली?
ब्रज में लट्ठमार होली के अलावा कई तरह की होली का आयोजन किया जाता है। वहीं गोकुल में छड़ीमार होली का आयोजन होता है। दरअसल, भगवान कृष्ण का बचपन गोकुल में ही बीता था। मान्यता है छड़ीमार होली के दिन बाल कृष्ण के साथ गोपियां छड़ी हाथ में लेकर होली खेलती हैं, क्योंकि भगवान बालस्वरूप थे। इस भावमयी परंपरा के अनुरूप कहीं उनको चोट न लग जाए, इसलिए गोकुल में छड़ीमार होली खेली जाती है।

 
Braj Ki Holi 2024 Recognition And Date Of Chhadimar Holi In Mathura Gokul
chhadimar holi - फोटो : अमर उजाला
जैसा कि सब लोग जानते होंगे कि बचपन में कान्हा बड़े चंचल हुआ करते थे। गोपियों को परेशान करने में उन्हें बड़ा आनंद मिलता था। इसलिए गोकुल में उनके बालस्वरूप को अधिक महत्व दिया जाता है। इसलिए नटखट कान्हा की याद में हर साल छड़ीमार होली का आयोजन किया जाता है। इस दिन कान्हा की पालकी और पीछे सजी-धजी गोपियां हाथों में छड़ी लेकर चलती हैं।

 
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Braj Ki Holi 2024 Recognition And Date Of Chhadimar Holi In Mathura Gokul
chhadimar holi - फोटो : अमर उजाला
गोकुल में छड़ीमार होली का उत्सव सदियों से चला आ रहा है। गोकुल की छड़ी मार होली खुद में एक अनोखी विरासत समेटे हुए हैं। प्राचीन परंपराओं का निर्वहन करते हुए आज भी हर साल छड़ी मार होली का आयोजन होता है, जिसमें गोकुल की छड़ी मार होली की शुरुआत यमुना किनारे स्थित नंदकिले के नंदभवन में ठाकुरजी के समक्ष राजभोग का भोग लगाकर होती है।

 
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Braj Ki Holi 2024 Recognition And Date Of Chhadimar Holi In Mathura Gokul
chhadimar holi - फोटो : अमर उजाला
कहा जाता है कि होली खेलने वाली गोपियां 10 दिन पहले से छड़ीमार होली की तैयारियां शुरू कर देती हैं। गोपियों को दूध, दही, मक्खन, लस्सी, काजू बादाम खिलाकर होली खेलने के लिए तैयार किया जाता है। छड़ीमार होली देखने के लिए दूर-दराज से श्रद्धालु आते हैं। इस बार 16 मार्च को छड़ीमार होली मनाई जाएगी।
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