श्रीराधाकृष्ण की लीला भूमि वृंदावन में यमुना तट पर आयोजित कुंभ पूर्व वैष्णव बैठक में अध्यात्म के साथ ब्रज की संस्कृति के रंग भी बिखर रहे हैं। कुंभ मेला स्थल में प्रवेश करते ही श्रद्धालुओं के पग आयोजनों की ओर खिंचे चले आ रहे हैं। रविवार को कुंभ बैठक के सांस्कृतिक पंडाल में कलाकारों ने ब्रज के चरकुला नृत्य से समां बांध दिया। वहीं अखिल भारतीय श्रीपंच राधाबल्लभीय निर्मोही अखाड़ा के पंडाल परिसर में चल रहे नित्यलीला महोत्सव में महारास की अभिनव प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं का मन मोह लिया।
वृंदावन कुंभ बैठक: यमुना तट पर अध्यात्म के साथ बिखर रहे ब्रज की संस्कृति के रंग, देखें तस्वीरें
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सांस्कृतिक पंडाल में रविवार को राजेश प्रसाद शर्मा ग्रुप द्वारा चरकुला नृत्य का प्रस्तुतीकरण किया गया। इसमें कलाकारों ने अपने सिर पर विशाल चक्र में कई दीपक जलाकर नृत्य किया। श्री गोवर्धन महाराज तेरे माथे मुकुट विराज रहे हो के बोल पर यह नृत्य देखते ही बन रहा था। वृंदावन शोध संस्थान के निदेशक सतीश चंद्र दीक्षित ने बताया कि सोनभद्र के कलाकार गजाधर द्वारा कर्मा आदिवासी नृत्य की प्रस्तुति दी। साथ में मथुरा के स्वामी अशोक कुमार शर्मा द्वारा सुंदर भगवान कृष्ण के लीलाओं पर आधारित नृत्य की प्रस्तुति दी।
कुंभ मेला क्षेत्र में प्रवेश करने के साथ ही ब्राह्मण सेवा संघ के खालसे में सुबह से लेकर शाम तक संतों के प्रवचनों के साथ भागवत कथाएं हो रहीं हैं। यहां बनाईं गईं देवी देवताओं की मूर्तियां लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बनी हैं। इसके कुछ दूरी पर संत रसिया बाबा के खालसे में संतों के प्रवचनों का श्रवण कर भक्त आनंदित हो रहे हैं। पिछले दो दिन में मलूक पीठाधीश्वर महंत राजेंद्रदास, रसिया बाबा, संजीव कृष्ण ठाकुरजी की कथाओं का श्रवण करने का भक्तों को मौका मिला।