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अपराजिता: ट्यूशन पढ़ाकर अपनी पढ़ाई की और अफसर बनीं, पढ़ें इन महिलाओं के संघर्ष की कहानी

Tue, 18 Aug 2020 01:10 AM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा Published by: मुकेश कुमार Updated Tue, 18 Aug 2020 01:10 AM IST
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Aparajita 100 Million Smiles struggle story of lady officers
अपराजिता 100 मिलियन स्माइल्स: आयकर अफसर - फोटो : अमर उजाला
आगरा में आयकर और जीएसटी में उच्च पदों पर तैनात महिला अधिकारियों को इस मुकाम तक पहुंचने के लिए बड़ा संघर्ष करना पड़ा है। कोई गांव से निकलकर इस मुकाम तक पहुंची तो किसी को ऐसे आर्थिक संकट का सामना करना पड़ा कि अपनी पढ़ाई भी ट्यूशन पढ़ाकर की। तमाम चुनौतियों के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और हौसले के दम पर कदम-कदम बढ़ाती रहीं। पढ़िए इनके संघर्ष की कहानी...
Aparajita 100 Million Smiles struggle story of lady officers
रेनू जौहरी, प्रधान आयकर आयुक्त प्रथम - फोटो : अमर उजाला
परिवार और नौकरी में तालमेल की चुनौती -रेनू जौहरी, प्रधान आयकर आयुक्त प्रथम 

आईआरएस रेनू जौहरी ने बताया कि मेरा सपना अधिकारी बनने का था। परिवार का साथ मिला। 1987 में आईआरएस में चयन हो गया। 1993 में शादी हो गई। ससुराल में भी माहौल अनुकूल मिला। इसके बाद बेटा हुआ तो जिम्मेदारी बढ़ गई। बच्चे को संभालना और नौकरी की जिम्मेदारी भी, आसान नहीं था लेकिन दोनों दायित्वों को संभाला। घर से बाहर सर्च और छापे के दौरान सुरक्षा की चिंता रहती   थी। यही कहूंगी कि लड़कियों को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए। कदम दर कदम बढ़ाते हुए प्रधान आयकर आयुक्त प्रथम के पद तक पहुंची हूं। 
Aparajita 100 Million Smiles struggle story of lady officers
पूनम गुप्ता, डिप्टी कमिश्नर, वाणिज्य कर विभाग - फोटो : अमर उजाला
तीन बहन व एक भाई की जिम्मेदारी निभाई- पूनम गुप्ता, डिप्टी कमिश्नर, वाणिज्य कर विभाग

पूनम गुप्ता वाणिज्य कर विभाग में डिप्टी कमिश्नर हैं। वो बताती हैं कि हम पांच भाई-बहनों की जिम्मेदारी पिता पर थी। आमदनी कम थी, उनके लिए घर चलाना आसान नहीं था। मैंने संकल्प लिया उनकी सहायता करने का। ट्यूशन पढ़ाना शुरू किया। इसी से पढ़ाई की और फिर तीन बहन और एक भाई की शादी की। लंबे संघर्ष के बाद वर्ष 2011 में वाणिज्य कर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर बनी। अब डिप्टी कमिश्नर हूं। यहां आकर भी चुनौतियां खत्म नहीं हुईं। महिला कर्मचारियों और अधिकारियों को सचल  दल में कम ही शामिल किया जाता है।
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डॉ. कविता मीना, डिप्टी कमिश्नर, आयकर विभाग - फोटो : अमर उजाला

शादी का दवाब था, पर पढ़ाई जारी रखी- डॉ. कविता मीना, डिप्टी कमिश्नर, आयकर विभाग 

डॉ. कविता मीना भी आयकर विभाग में डिप्टी कमिश्नर हैं। उन्होंने बताया कि लड़की है तो पहले शादी की सोचो, लड़का है तो पहले नौकरी, फिर शादी...। यह सोच बड़ी बाधा है। मुझे भी इसे पार करना पड़ा। माता-पिता ने मेरा साथ दिया। वर्ष 2012 में एमबीबीएस पूरा किया, जबकि सपना सिविल सेवा में जाने का था। डॉक्टर बनते ही शादी के लिए रिश्ते आने लगे लेकिन मैंने सपने को पूरा करने के लिए तैयारी जारी रखी। 2014 में आईआरएस में चयन हुआ। दो वर्ष बाद आयकर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर बनी। अब डिप्टी कमिश्नर हूं। नौकरी के साथ परिवार के बीच सामंजस्य बनाना चुनौती है।

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ज्योत्सनी देवी, ज्वाइंट कमिश्नर, आयकर विभाग - फोटो : अमर उजाला

शादी के बाद हुआ आईआरएस में चयन- ज्योत्सनी देवी, ज्वाइंट कमिश्नर, आयकर विभाग

ज्योत्सनी देवी आयकर विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर हैं। उन्होंने बताया कि बचपन से ही अधिकारी बनने सपना था। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बाहर जाना था लेकिन परिवार इसके लिए राजी नहीं था। लेकिन समझाया तो मान गए। लखनऊ, दिल्ली में रहकर तैयारी की। वर्ष 2004 में परीक्षा पास कर वाणिज्य कर विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर बनी। 2006 में शादी हो गई। जिम्मेदारी बढ़ी लेकिन लक्ष्य से हटी नहीं। 2009 में आईआरएस के लिए चयन हो गया। आयकर विभाग में ज्वाइंट कमिश्नर हूं। चुनौती यहां भी है। खुद को औरों से बेहतर साबित किया है। मां बनने के बाद जिम्मेदारी और बढ़ गई।

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