World Environment Day 2025: हर साल पर्यावरण के प्रति जागरुकता फैलाने के उद्देश्य से 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। आज के समय ग्लोबल वार्मिंग, बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण, ओद्योगिक कचरे आदि से पर्यावरण को काफी क्षति पहुंच रही है। इस साल 2025 में पर्यावरण दिवस की मेजबानी कोरिया कर रहा है। साल 2025 के विश्व पर्यावरण दिवस की थीम Beat Plastic Pollution है। यह थीम बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने पर आधारित है।
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World Environment Day 2025: हर हफ्ते 5 ग्राम माइक्रोप्लास्टिक निगल रहे हैं आप, दिमाग सन्न कर देगी यह खबर
Thu, 05 Jun 2025 12:27 PM IST
संकल्प सिंह
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
यूटिलिटी डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: संकल्प सिंह
Updated Thu, 05 Jun 2025 12:27 PM IST
सार
World Environment Day 2025: इस साल 2025 में पर्यावरण दिवस की मेजबानी कोरिया कर रहा है। साल 2025 के विश्व पर्यावरण दिवस की थीम Beat Plastic Pollution है। यह थीम बढ़ते प्लास्टिक प्रदूषण को रोकने पर आधारित है।
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World Environment Day 2025
- फोटो : AdobeStock
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क्या है प्लास्टिक प्रदूषण?
- प्लास्टिक पदार्थ जैसे बोतल, पॉलीथीन, खिलौने आदि जब सही ढंग से नष्ट या रिसाइकल नहीं होते हैं और मिट्टी, नदियों, समुद्र में मिल जाते हैं इसे ही प्लास्टिक प्रदूषण कहा जाता है।
- प्लास्टिक सैकड़ों सालों तक पर्यावरण में बने रहते हैं।
- समय के साथ-साथ प्लास्टिक के ये टुकड़े टूटकर माइक्रोप्लास्टिक का रूप ले लेते हैं।
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माइक्रोप्लास्टिक का बढ़ रहा खतरा
- माइक्रोप्लास्टिक हवा, पानी और भोजन तक में मिल चुके हैं।
- माइक्रोप्लास्टिक जानवर, इंसानों के शरीर में पहुंच रहे हैं, जिसकी वजह से कैंसर जैसी कई तरह की खतरनाक बीमारियां जन्म लेती हैं।
- रिसर्च में पता चला है कि औसतन एक इंसान हर हफ्ते 5 ग्राम माइक्रोप्लास्टिक निगल रहा है।
- यह हमारे हार्मोन सिस्टम, लिवर, ब्रेन फंक्शन एवं शरीर की कई प्रणालियों को प्रभावित कर सकता है।
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समुद्री जीवों को कर रहा प्रभावित
- यही नहीं मछली, कछुए, व्हेल और कई समुद्री पक्षी इन माइक्रोप्लास्टिक को भोजन समझकर खा रहे हैं।
- ये माइक्रोप्लास्टिक उनके शरीर के भीतर टॉक्सिक कैमिकल फैला रहे हैं, जिसकी वजह से उनकी प्रजनन क्षमता घट रही है।
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कृषि उपज को भी कर रहा प्रभावित
- माइक्रोप्लास्टिक बड़े पैमाने पर मिट्टी में मिल रहे हैं।
- इस कारण मिट्टी की गुणवत्ता में गिरावट देखने को मिल रही है, जिसकी वजह से फसल की गुणवत्ता और उपज सीधे तौर पर प्रभावित हो रही है।
- ऐसे में इस तरह के खतरों के प्रति जागरुक होना जरूरी है, ताकि जल्द से जल्द इनका समाधान निकाला जा सके।
- विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर प्लास्टिक के संभावित खतरों पर बात करना जरूरी नहीं है बल्कि प्लास्टिक के उपयोग को अपनी जिंदगी से धीरे-धीरे हटाने का ठोस कदम उठाना समय की मांग बन चुका है।