शादी के बाद जब कोई महिला ससुराल में रहती है तो अक्सर उसके मन में यह सवाल आता है कि अगर घर सास-ससुर के नाम है तो क्या उसे वहां रहने का अधिकार है? क्या सास-ससुर अपनी मर्जी से उसे घर से निकाल सकते हैं? वहीं शादी में मिले गहने, पैसे और दूसरे सामान को लेकर भी कई बार विवाद हो जाता है। ऐसे में महिलाओं के लिए यह समझना जरूरी है कि ससुराल के घर में रहने का अधिकार और संपत्ति में मालिकाना हक दो अलग-अलग बातें हैं।
सास-ससुर बहू को घर से निकाल सकते हैं? जानिए ससुराल की संपत्ति पर क्या कहता है कानून
Property and Shared Household: शादी के बाद ससुराल में रहने वाली महिला के अधिकार सिर्फ इसलिए खत्म नहीं हो जाते क्योंकि घर उसके नाम पर नहीं है। साझा घर में रहने का अधिकार कानून में दिया गया है। वहीं पति या ससुराल वालों को महिला के स्त्रीधन पर अपना अधिकार नहीं मिल जाता। हालांकि संपत्ति में मालिकाना हक अलग विषय है और यह इस बात पर निर्भर करता है कि संपत्ति किसके नाम है और वह किस तरह की संपत्ति है।
घरेलू हिंसा से महिलाओं का संरक्षण अधिनियम के तहत महिला को साझा घर में रहने का अधिकार दिया गया है। सुप्रीम कोर्ट भी साफ कर चुका है कि केवल इस वजह से महिला का रहने का अधिकार खत्म नहीं हो जाता कि घर उसके नाम पर नहीं है। यानी किसी महिला का उस घर में मालिक होना जरूरी नहीं है, अगर वह कानून के मुताबिक साझा घर की श्रेणी में आता है।
इसका मतलब यह भी नहीं है कि महिला ससुराल की हर संपत्ति की मालिक बन जाती है। घर किसके नाम है, संपत्ति कैसे खरीदी गई है और परिवार का उसमें क्या अधिकार है, ये अलग कानूनी सवाल हैं। इसलिए ससुराल के घर में रहने का अधिकार और घर में हिस्सा मिलने का अधिकार एक ही बात नहीं है।
क्या सास-ससुर बहू को घर से निकाल सकते हैं?
सिर्फ अपनी मर्जी से महिला को साझा घर से निकाल देना कानून की नजर में इतना सीधा मामला नहीं है। कानून में महिला को साझा घर से बेदखल करने या बाहर करने पर सुरक्षा दी गई है। सुप्रीम कोर्ट के अनुसार महिला को साझा घर से केवल कानून में तय प्रक्रिया के मुताबिक ही बाहर किया जा सकता है। अगर महिला के साथ घरेलू हिंसा या जबरदस्ती जैसी स्थिति है तो वह कानूनी मदद ले सकती है। ऐसे मामलों में अदालत से सुरक्षा और रहने से जुड़े आदेश भी मांगे जा सकते हैं।
स्त्रीधन पर किसका अधिकार?
शादी के समय या शादी के पहले और बाद में महिला को मिले गहने, पैसे और दूसरे उपहार कई परिस्थितियों में उसके स्त्रीधन का हिस्सा हो सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भी माना है कि स्त्रीधन महिला की अपनी संपत्ति है और पति का उस पर अपने आप मालिकाना हक नहीं हो जाता। इसलिए शादी में मिले गहने या महिला को दिए गए दूसरे सामान को सिर्फ इस वजह से पति या ससुराल वालों की संपत्ति नहीं माना जा सकता कि वे ससुराल में रखे हुए हैं।
पति की संपत्ति में क्या अधिकार है?
यहां एक बात समझना जरूरी है। शादी हो जाने भर से पत्नी पति की हर संपत्ति की अपने आप मालिक नहीं बन जाती। पति की संपत्ति में पत्नी का अधिकार कई बातों पर निर्भर कर सकता है, जैसे संपत्ति किसके नाम है, वह पैतृक है या खुद खरीदी गई है और उस पर लागू उत्तराधिकार के नियम क्या हैं।
इसलिए ससुराल की संपत्ति, साझा घर में रहने का अधिकार और स्त्रीधन तीनों को अलग-अलग समझना चाहिए। किसी खास विवाद में संपत्ति के कागजात और मामले की स्थिति देखकर ही सही कानूनी स्थिति तय होती है।
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