How to Check Tire Expiry Date?: वाहन चलाते समय हमारी सुरक्षा का पूरा दारोमदार उन चार टायरों पर होता है, जो सड़क के साथ सीधा संपर्क बनाए रखते हैं। अक्सर लोग टायर घिसने पर उसे बदल देते हैं। मगर क्या आप जानते हैं कि टायर की भी एक 'एक्सपायरी डेट' होती है? अगर आपने ध्यान दिया होगा तो टायर के किनारे पर ढेर सारे नंबर और कोड लिखे होते हैं, ये कोड आपके टायर की चौड़ाई, ऊंचाई, रिम का साइज और उसके बनने की तारीख बताते हैं।
Tire Sidewall: क्यों लिखा होता है टायर पर ये 4 अंक का नंबर? ये है इसके पीछे की दिलचस्प बातें
Tire Sidewall Numbers Meaning: क्या आपने कभी अपनी गाड़ी के टायरों पर लिखे कोड्स को पढ़ने की कोशिश की है? टायर पर दी गई यह जानकारी केवल नंबर नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षा से जुड़ी गाइडलाइन है। टायर की मजबूती से लेकर उसकी एक्सपायरी डेट तक, हर बात टायर पर ही लिखी होती है।
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कैसे पहचानें टायर की मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपायरी डेट?
- टायर की उम्र जानने के लिए साइडवॉल पर 'DOT' कोड के अंत में लिखे 4 अंकों को देखें।
- पहले दो अंक उस साल के 'हफ्ते' को दर्शाते हैं और आखिरी दो अंक 'साल' को। उदाहरण के लिए, अगर कोड '1026' है, तो इसका मतलब है कि टायर 2026 के 10वें हफ्ते में बना है।
- आमतौर पर टायर की उम्र मैन्युफैक्चरिंग डेट से 5 से 6 साल तक होती है। भले ही टायर का ग्रिप बचा हो, लेकिन 6 साल बाद रबर की पकड़ कमजोर होने लगती है।
टायर साइज (205/55 R16) का क्या है मतलब?
- साइडवॉल पर लिखे बड़े नंबर जैसे '205/55 R16' आपकी गाड़ी की परफॉर्मेंस तय करते हैं।
- यहां '205' टायर की चौड़ाई (mm) है, '55' उसकी ऊंचाई का प्रतिशत है, और 'R16' का मतलब है कि यह 16 इंच के रिम के लिए बना 'रेडियल' टायर है।
- गलत साइज का टायर लगाने से गाड़ी के माइलेज, सस्पेंशन और स्टीयरिंग बैलेंस पर बुरा असर पड़ता है। हमेशा अच्छी कंपनियों के सुझाए गए साइज के टायर ही लगवाएं।
लोड इंडेक्स और स्पीड रेटिंग को समझना
- टायर के साइज के ठीक बाद एक नंबर और अक्षर होता है, जैसे '91V'। यह टायर की भार ढोने की क्षमता और अधिकतम सुरक्षित रफ्तार बताता है।
- जैसे लोड इंडेक्स 91 का अर्थ है की वो टायर 615 किलोग्राम तक का भार उठा सकता है। 'V' का मतलब है कि टायर 240 किमी/घंटा की रफ्तार तक सुरक्षित है।
- अगर आप अपनी गाड़ी की क्षमता से अधिक रफ्तार या लोड पर चलते हैं, तो टायर के भीतर गर्मी बढ़ जाती है, जिससे अचानक ब्लास्ट होने की संभावना रहती है।
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- सिर्फ नंबर पढ़ना काफी नहीं है, टायरों की उम्र बढ़ाने के लिए हर 5000 किमी पर 'टायर रोटेशन' और अलाइनमेंट जरूर करवाएं।
- समय-समय पर टायरों में कट, दरारें या उभार की जांच करें। आज के समय में आधुनिक कारों में टायर प्रेशर मॉनिटरिंग सिस्टम आता है, जो हवा कम होने पर तुरंत अलर्ट देता है।
- ध्यान रखें टायर ही आपकी गाड़ी का वह हिस्सा है जो आपको सड़क से जोड़े रखता है। इसलिए अच्छी क्वालिटी के और सही उम्र वाले टायरों में निवेश करें।