'AI गॉडफादर' का मेटा से इस्तीफा: कहा- LLM की अंधी दौड़ में फंस चुकी है सिलिकन वैली, रोक रही है इनोवेशन
AI Talent War:
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में 'गॉडफादर' माने जाने वाले यान लेकन ने फेसबुक की पैरेंट कंपनी 'मेटा' को अलविदा कह दिया है। उनके इस फैसले ने पूरी टेक इंडस्ट्री को चौंका दिया है। लेकन ने सिलिकॉन वैली की दिग्गज कंपनियों पर 'एलएलएम' के पीछे अंधाधुंध भागने और इनोवेशन का गला घोंटने का गंभीर आरोप लगाया है।

कल्पना कीजिए कि दुनिया के सबसे बुद्धिमान लोग एक ही रास्ते पर दौड़ रहे हों, यह जानते हुए भी कि वह रास्ता शायद मंजिल तक न जाए। तकनीक की दुनिया में एक ऐसा ही तूफान खड़ा हो गया है जिसने सिलिकॉन वैली की नींव हिला दी है। एआई के क्षेत्र में क्रांति लाने वाले और 'गॉडफादर' कहे जाने वाले यान लेकन ने एक ऐसी सच्चाई से पर्दा उठाया है, जिसे अब तक बड़ी टेक कंपनियां छिपाती आई थीं। मेटा जैसी दिग्गज कंपनी से उनके इस्तीफे ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या हम जिस सुपर-इंटेलिजेंस का सपना देख रहे हैं, वह कभी हकीकत बन भी पाएगा या नहीं?

सिलिकॉन वैली में चल रहा एआई टैलेंट वॉर
यान लेकन ने हाल ही में सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे अपने एक संबोधन में पूरी टेक इंडस्ट्री की कार्यप्रणाली पर कड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने वर्तमान दौर को "एलएलएम-पिल्ड" (LLM-pilled) करार दिया है। लेकन का मानना है कि सिलिकॉन वैली की तमाम कंपनियां एक ही तरह के 'लार्ज लैंग्वेज मॉडल' (LLM) बनाने के पीछे पागल हैं। उनके अनुसार, यह स्थिति वैसी ही है जैसे हर कोई एक ही गड्ढे को और गहरा खोदने में लगा हो, जबकि जरूरत कहीं और खुदाई करने की है। उन्होंने चेतावनी दी कि कंपनियां एक-दूसरे के इंजीनियरों को सिर्फ इसलिए तोड़ रही हैं ताकि प्रतिद्वंद्वी कुछ नया या अलग न कर सकें। यह 'टैलेंट वॉर' इनोवेशन को बढ़ावा देने के बजाय उसे खत्म करने का एक रणनीतिक हथियार बन गया है।

सुपर-इंटेलिजेंस की राह में क्या है अड़चन?
लेकन ने इस बात पर जोर दिया कि केवल भाषा पर आधारित मॉडल (LLMs) कभी भी वास्तविक सुपर-इंटेलिजेंस नहीं बन सकते। उन्होंने समझाया कि भविष्य की एआई को 'एजेंटिक सिस्टम' होना चाहिए, यानी एक ऐसा तंत्र जो आपके लिए स्वतंत्र रूप से निर्णय ले सके। किसी भी एआई के लिए सही निर्णय लेना तब तक संभव नहीं है, जब तक उसमें भविष्य के परिणामों का अनुमान लगाने की क्षमता न हो। जैसे इंसान कोई भी कदम उठाने से पहले उसके नतीजे के बारे में सोचता है, वैसे ही एआई को भी 'प्रेडिक्टिव वर्ल्ड मॉडल्स' की जरूरत है। मौजूदा तकनीक शब्दों को जोड़कर वाक्य बनाना तो जानती है, लेकिन वह दुनिया की भौतिक कार्यप्रणाली और कार्यों के परिणामों को समझने में पूरी तरह विफल है।
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