WhatsApp: क्या आपकी बातें पढ़ता है व्हाट्सएप? प्राइवेसी को लेकर फिर घिरी कंपनी, कोर्ट पहुंचा मामला

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Sun, 25 Jan 2026 07:50 PM IST
सार

Meta Privacy Lawsuit:

दुनिया की सबसे लोकप्रिय मैसेजिंग ऐप WhatsApp को लेकर एक बार फिर यूजर्स की निजता पर सवाल उठे हैं। अमेरिका की एक अदालत में दायर मुकदमे ने यह बहस छेड़ दी है कि क्या वाकई WhatsApp की निजी चैट उतनी सुरक्षित है, जितना कंपनी दावा करती है।

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WhatsApp - फोटो : AI

    विस्तार

    WhatsApp लंबे समय से दावा करता आया है कि उसकी चैट पूरी तरह सुरक्षित है और यूजर्स की बातचीत सिर्फ भेजने वाले और पाने वाले तक सीमित रहती है। लेकिन हाल ही में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को स्थित एक फेडरल कोर्ट में दायर मुकदमे ने इस दावे पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस मुकदमे में Meta और WhatsApp पर यूजर्स की निजी बातचीत को लेकर गुमराह करने के आरोप लगाए गए हैं।

    मुकदमे में Meta और WhatsApp पर क्या आरोप लगे?

    अदालत में दायर शिकायत के मुताबिक, Meta और WhatsApp अपने यूजर्स की निजी चैट को सिर्फ सुरक्षित नहीं रखते, बल्कि उन्हें स्टोर भी करते हैं और जरूरत पड़ने पर उनका विश्लेषण किया जा सकता है। आरोप है कि कंपनी के कर्मचारी इन चैट्स तक पहुंच बना सकते हैं, जो WhatsApp के एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन के दावों के बिल्कुल उलट है। मेटा पर आरोप है कि कंपनी ने अरबों यूजर्स को यह विश्वास दिलाया कि उनकी बातचीत पूरी तरह निजी है, जबकि हकीकत कुछ और हो सकती है।

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    WhatsApp की सबसे बड़ी खासियत उसका एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन बताया जाता है। इसका मतलब होता है कि मैसेज को सिर्फ भेजने वाला और पाने वाला ही पढ़ सकता है, बीच में कोई भी तीसरा व्यक्ति उन्हें नहीं देख सकता। लेकिन मुकदमे में कहा गया है कि यह दावा पूरी तरह सच नहीं है और चैट को डेटा कंपनी के सिस्टम में सुरक्षित किया जाता है।

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    कई देशों के लोग मुकदमे में शामिल

    इस मामले में शिकायत करने वालों का समूह सिर्फ अमेरिका तक सीमित नहीं है। इसमें ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, भारत, मैक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों के यूजर्स भी शामिल हैं। वादियों का कहना है कि Meta ने वैश्विक स्तर पर WhatsApp यूजर्स को उनकी प्राइवेसी को लेकर भ्रम में रखा।

    ‘व्हिसलब्लोअर्स’ के दावे से मजबूत हुए आरोप

    मुकदमे में यह भी कहा गया है कि कुछ व्हिसलब्लोअर्स ने अंदरूनी जानकारी साझा की है, जिससे यह संकेत मिलता है कि कंपनी यूजर्स की बातचीत तक पहुंच रखती है। हालांकि, इन व्हिसलब्लोअर्स की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे इस दावे पर अभी कई सवाल बने हुए हैं।

    Meta ने आरोपों पर क्या कहा?

    Meta ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि यह मुकदमा पूरी तरह बेबुनियाद और तथ्यहीन है। कंपनी का कहना है कि WhatsApp की चैट एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन से सुरक्षित है और यूजर्स की निजी बातचीत को न तो पढ़ा जाता है और न ही उसका दुरुपयोग किया जाता है।

    यह मामला अभी अदालत में है और आने वाले समय में यह साफ होगा कि WhatsApp के प्राइवेसी दावे कितने मजबूत हैं। लेकिन फिलहाल इस मुकदमे ने एक बार फिर यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर हमारी निजी बातचीत वाकई कितनी निजी है।

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