AI के खेल से एक्सपर्ट हुए हैरान: YouTube को डॉक्टर मान रहा गूगल, बीमारी के लिए सजेस्ट कर रहा वीडियो
गूगल पर किसी बीमारी के बारे में पता करते समय AI का जवाब कितनी हद तक भरोसेमंद है? एक नई स्टडी ने इस सवाल को और गहरा कर दिया है। रिपोर्ट बताती है कि हेल्थ से जुड़े सवालों में Google AI Overviews सबसे ज्यादा YouTube का सहारा ले रहा है।

आज के डिजिटल युग में जब भी हमें अपनी सेहत को लेकर कोई छोटी सी उलझन होती है, तो हमारी उंगलियां सबसे पहले फोन के सर्च इंजन की ओर दौड़ती हैं। तकनीक की दुनिया में इस भरोसे को और पुख्ता करने के लिए गूगल ने अपना नया ‘AI ओवरव्यू’ फीचर पेश किया है, जो हर महीने अरबों लोगों के सवालों के जवाब चुटकियों में दे रहा है। लेकिन इस तकनीकी चमक के पीछे एक ऐसी सच्चाई छिपी है, जो आपकी सेहत के साथ-साथ आपके भरोसे को भी हिला सकती है।
गूगल दे रहा यूट्यूब कंटेंट का हवाला
हाल ही में बर्लिन में हुए एक रिसर्च ने तकनीक की दुनिया में खलबली मचा दी है। एसई रैंकिंग (SE Ranking) के शोधकर्ताओं ने गूगल पर स्वास्थ्य से जुड़े 50,000 से अधिक सवालों का विश्लेषण किया। इस रिसर्च का उद्देश्य यह जानना था कि गूगल का AI आधारित फीचर बीमारियों के जवाब देने के लिए किन स्रोतों का उपयोग करता है। परिणाम उम्मीद के बिल्कुल उलट थे। शोध में पाया गया कि गूगल का यह टूल चिकित्सा संबंधी सटीक जानकारी देने के लिए किसी प्रतिष्ठित अस्पताल या सरकारी स्वास्थ्य पोर्टल के बजाय सबसे ज्यादा यूट्यूब (YouTube) पर निर्भर है।

क्या कहते हैं आंकड़े?
स्टडी के मुताबिक, कुल AI Overviews सजेशन में से 4.43% यूट्यूब से थे। यह संख्या किसी भी अस्पताल नेटवर्क, सरकारी हेल्थ पोर्टल, मेडिकल एसोसिएशन या अकादमिक संस्थान से कहीं ज्यादा थी। कुल 4.65 लाख से ज्यादा सजेशन में से 20,621 बार यूट्यूब को रेफर किया गया। इसके बाद जर्मनी का पब्लिक ब्रॉडकास्टर NDR.de और मेडिकल रेफरेंस साइट एमएसडी मैनुअल्स जैसे प्लेटफॉर्म रहे।

YouTube को लेकर चिंता क्यों?
रिसर्चर्स का कहना है कि यूट्यूब कोई मेडिकल पब्लिशर नहीं है। यह एक ओपन वीडियो प्लेटफॉर्म है, जहां कोई भी कंटेंट अपलोड कर सकता है। इसमें डॉक्टर और अस्पताल चैनल भी होते हैं, लेकिन साथ ही बिना मेडिकल ट्रेनिंग वाले इंफ्लुएंसर्स और क्रिएटर्स भी मौजूद हैं। यही वजह है कि हेल्थ से जुड़ी जानकारी के लिए यूट्यूब पर ज्यादा निर्भरता को जोखिम भरा माना जा रहा है। ऐसे में केवल लोकप्रियता के आधार पर दी गई सलाह किसी मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।
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