Meta के खिलाफ कोर्ट पहुंचे कर्मचारी: आरोप- नौकरी से निकालने के लिए AI से की मॉनिटरिंग, नहीं ली सहमति

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Sun, 19 Jul 2026 03:21 PM IST
सार

क्या अब नौकरी जाने का फैसला इंसान नहीं बल्कि AI करेगा? Meta के 26 कर्मचारियों ने कंपनी के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। आरोप है कि AI सिस्टम ने मेडिकल, मैटरनिटी और फैमिली लीव पर रहे कर्मचारियों को कम रेटिंग देकर छंटनी की सूची में शामिल कर दिया। हालांकि Meta ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है।

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मेटा के खिलाफ कोर्ट गए कर्मचारी - फोटो : अमर उजाला (एआई जनरेटेड)

    फेसबुक, इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप की पैरेंट कंपनी मेटा (Meta) एक बार फिर विवादों में घिर गई है। इस बार मामला बड़े पैमाने पर हुई कर्मचारियों की छंटनी से जुड़ा है। कंपनी के 26 कर्मचारियों ने मेटा के खिलाफ कैलिफोर्निया की फेडरल कोर्ट में मुकदमा दायर करते हुए आरोप लगाया है कि कंपनी ने लोगों को नौकरी से निकालने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम का इस्तेमाल किया।

    कर्मचारियों का दावा है कि जिन लोगों ने मेडिकल लीव, मैटरनिटी लीव या अन्य वैधानिक छुट्टियां ली थीं, AI ने उन्हें कम परफॉर्मेंस स्कोर देकर छंटनी की सूची में डाल दिया।

    AI ने तय किया किसे निकालना है
    AI ने तय किया किसे निकालना है - फोटो : एआई जनरेटेड

    'मैनेजर नहीं, AI ने तय किया किसे निकालना है'

    सोमवार को कैलिफोर्निया के उत्तरी जिले की फेडरल कोर्ट में दाखिल 71 पन्नों की शिकायत में कहा गया है कि Meta ने इस साल की शुरुआत में करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी के दौरान पारंपरिक मैनेजरों की राय पर भरोसा करने के बजाय कई इंटरनल AI सिस्टम का सहारा लिया।याचिका के मुताबिक, AI ने कर्मचारियों की परफॉर्मेंस रेटिंग, कीस्ट्रोक, कंप्यूटर एक्टिविटी और अन्य प्रोडक्टिविटी डेटा के आधार पर स्कोर तैयार किए। इसी स्कोर के आधार पर यह तय किया गया कि किन कर्मचारियों को नौकरी से निकाला जाएगा।

    छुट्टी पर रहने वालों को हुआ नुकसान
    छुट्टी पर रहने वालों को हुआ नुकसान - फोटो : एआई जनरेटेड

    छुट्टी पर रहने वालों को हुआ नुकसान

    मुकदमे में आरोप लगाया गया है कि जब कोई कर्मचारी मेडिकल, मैटरनिटी या फैमिली लीव पर होता है, तब उसके काम से जुड़े डेटा और एक्टिविटी स्वाभाविक रूप से कम हो जाते हैं। ऐसे में AI सिस्टम ने उन्हें कम स्कोर दिया और यही उनके खिलाफ चला गया।शिकायतकर्ताओं का कहना है कि इससे उन कर्मचारियों को नुकसान हुआ जिन्होंने कानूनी रूप से मिलने वाली छुट्टियों का इस्तेमाल किया था।याचिका में कई मामलों का जिक्र किया गया है। एक महिला वैज्ञानिक को बच्चे के जन्म से सिर्फ दो दिन पहले, जब वह अप्रूव्ड प्रेग्नेंसी लीव पर थीं, उन्हें छंटनी का नोटिस मिला।एक इंजीनियर ने आरोप लगाया कि चोट के कारण छुट्टी लेने से उनकी परफॉर्मेंस रेटिंग गिरा दी गई। वहीं, एक मैनेजर ने दावा किया कि मेडिकल लीव शुरू होने के सिर्फ 16 दिन बाद उन्हें नौकरी से निकाल दिया गया।

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