Odyssey: दुनिया के सिर्फ 41 सिनेमाघरों में है IMAX की ये खास तकनीक, जानिए क्यों स्पेशल है नोलन की 'ओडिसी'

नीतीश कुमार
टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्लीनीतीश कुमार
Sun, 19 Jul 2026 02:20 PM IST
सार

क्रिस्टोफर नोलन की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'द ओडिसी' भारत में IMAX स्क्रीन पर रिलीज हो चुकी है। लेकिन भारतीय दर्शक इसे उसी दुर्लभ IMAX 15/70 फॉर्मेट में नहीं देख पाएंगे, जिसमें फिल्म की शूटिंग हुई है। आखिर इसकी वजह क्या है और यह फॉर्मेट इतना खास क्यों है, जानिए पूरी कहानी।

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जानिए क्या है IMAX टेक्नोलॉजी - फोटो : अमर उजाला (एआई जनरेटेड)

    विस्तार

    हॉलीवुड के फिल्म मेकर क्रिस्टोफर नोलन (Christopher Nolan) की बहुप्रतीक्षित फिल्म 'द ओडिसी' (The Odyssey) 18 जुलाई से सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है। मैट डेमन, टॉम हॉलैंड, ज़ेंडाया और ऐनी हैथवे जैसे सितारों से सजी इस फिल्म का दर्शक बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सिनेमा के इतिहास में यह पहली ऐसी फीचर फिल्म है, जिसे शुरू से अंत तक पूरी तरह से IMAX फिल्म कैमरों पर शूट किया गया है।

    लेकिन, यदि आप क्रिस्टोफर नोलन की फिल्मों के एक सच्चे प्रेमी हैं तो ये खबर थोड़ी निराश करने वाली है। भले ही यह फिल्म भारत के तमाम IMAX सिनेमाघरों में दिखाई जा रही है, लेकिन आप इसे उस असली फॉर्मेट में नहीं देख पाएंगे, जिसमें नोलन ने इसे बड़ी शिद्दत से बनाया है। भारत में एक भी ऐसा कमर्शियल थिएटर नहीं है, जो इस फिल्म के हाई-एंड वर्जन यानी 'IMAX 15/70mm' फॉर्मेट को प्रोजेक्ट करने की क्षमता रखता हो। सिर्फ भारत ही नहीं दुनिया के कई विकसित देशों के पास भी फिल्म दिखाने की ये तकनीक उपलब्ध नहीं है।

    क्या है IMAX और क्यों है यह इतना खास?

    IMAX एक विशेष सिनेमाई तकनीक है, जिसमें बड़े आकार की स्क्रीन, हाई-एंड कैमरे और अत्याधुनिक प्रोजेक्टर का इस्तेमाल किया जाता है। इसकी मदद से सामान्य सिनेमाघरों की तुलना में ज्यादा चमकदार तस्वीर, बेहतर रिजॉल्यूशन और अधिक चौड़ा व्यू मिलता है।यह तकनीक दर्शकों को ऐसा अनुभव देती है, जैसे वे फिल्म के भीतर मौजूद हों। वक्त के साथ IMAX ने खुद को डिजिटल और लेजर तकनीक में ढाल लिया है, ताकि दुनिया भर में इसकी पहुंच बन सके।

    क्या है IMAX 15/70 फॉर्मेट?

    IMAX 15/70, IMAX का सबसे प्रीमियम और मूल फिल्म-आधारित फॉर्मेट है। इसमें 70 मिमी फिल्म का इस्तेमाल किया जाता है, जो फिल्म कैमरे और प्रोजेक्टर के अंदर हॉरिजॉन्टल (क्षैतिज) रूप से दौड़ती है। हर फ्रेम में 15 परफोरेशन (छिद्र) होते हैं, जिससे सामान्य फिल्म की तुलना में कहीं ज्यादा विजुअल जानकारी रिकॉर्ड होती है।यही वजह है कि विशाल स्क्रीन पर भी तस्वीर बेहद साफ और बारीक नजर आती है। IMAX के अनुसार, ओडिसी फिल्म पूरी तरह इसी कैमरा सिस्टम से शूट की गई पहली फीचर फिल्म है और IMAX 15/70 सिनेमाघरों में इसे 1.43:1 आस्पेक्ट रेशियो में दिखाया जा रहा है।

    नोलन को इस तकनीक से इतना प्यार क्यों है?

    फिल्म निर्माता क्रिस्टोफर नोलन लंबे समय से फिल्म कैमरों और IMAX तकनीक के समर्थक रहे हैं। उन्होंने द डार्क नाइट, डनकर्क, टेनेट और ओपनहाइमर जैसी फिल्मों में भी IMAX कैमरों का इस्तेमाल किया था।हालांकि पहले IMAX कैमरे काफी भारी और शोर करने वाले होते थे, जिससे संवाद वाले दृश्य शूट करना मुश्किल होता था। नोलन ने IMAX से वर्षों तक कैमरों को हल्का, शांत और अधिक उपयोगी बनाने की मांग की। आखिरकार तकनीक में सुधार हुआ और द 'ओडिसी' पूरी तरह IMAX फिल्म कैमरों से शूट की जा सकी।एक इंटरव्यू में नोलन ने कहा था कि IMAX फिल्म की तस्वीर की गुणवत्ता ऐसी है, जिसकी बराबरी डिजिटल फॉर्मेट आज भी पूरी तरह नहीं कर पाए हैं।

    असली IMAX को दिखाने की ताकत दुनिया के सिर्फ 41 थिएटर्स में

    हैरानी की बात यह है कि पूरी दुनिया में IMAX के 2,000 से ज्यादा स्क्रीन्स हैं, लेकिन 'द ओडिसी' को उसके असली 15/70 फिल्म फॉर्मेट में केवल 41 सिनेमाघरों में ही दिखाया जा सकता है। समस्या फिल्म में नहीं, बल्कि सिनेमाघरों के बुनियादी ढांचे में है।जब दुनिया डिजिटल सिनेमा की ओर भागी, तो कई असली IMAX फिल्म प्रोजेक्टर हटा दिए गए। IMAX के सीईओ रिचर्ड गेलफोंड ने एक इंटरव्यू में बताया था कि कंपनी ने पिछले 50 साल से नए फिल्म प्रोजेक्टर बनाए ही नहीं हैं। पुराने प्रोजेक्टर्स को ढूंढ़कर, उनकी मरम्मत कर उन्हें दोबारा इस्तेमाल के लायक बनाया जाता है।इसके लिए भारी निवेश, खास उपकरणों और अत्यधिक प्रशिक्षित ऑपरेटरों की जरूरत होती है। यही वजह है कि ऐसे गिने-चुने थिएटर्स आज सिर्फ अमेरिका, कनाडा, यूके, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप के कुछ हिस्सों तक ही सीमित रह गए हैं।

    भारत में क्यों नहीं मिल पाएगा असली IMAX का अनुभव?

    भारत में 30 से ज्यादा व्यावसायिक IMAX स्क्रीन मौजूद हैं, लेकिन सभी डिजिटल प्रोजेक्शन तकनीक पर आधारित हैं। देश में ऐसा कोई भी सिनेमाघर नहीं है, जहां IMAX 15/70 फिल्म प्रोजेक्टर लगा हो। डिजिटल IMAX में फिल्म शानदार गुणवत्ता के साथ दिखाई जाएगी, लेकिन दर्शकों को वह पूरा 1.43:1 फ्रेम नहीं मिलेगा, जिसे नोलन ने शूट किया है।

    असल में, फिल्म प्रोजेक्शन की जगह धीरे-धीरे डिजिटल तकनीक ने ले ली है क्योंकि इसे इंस्टॉल करना, चलाना और फिल्म डिस्ट्रिब्यूट करना काफी सस्ता पड़ता है। वहीं IMAX 15/70 सिस्टम के लिए स्पेशल प्रोजेक्टर, फिजिकल फिल्म रील और ट्रेंड स्टाफ की जरूरत होती है, इसलिए यह तकनीक दुनिया के बेहद कम सिनेमाघरों तक सीमित रह गई है।

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