जब घर पर ही बन सकता है थिएटर तो क्यों लगा रहें हैं सिनेमा हॉल के चक्कर

टेक डेस्क, अमर उजाला
Wed, 03 Oct 2018 09:51 AM IST
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pocket projector

    घर में प्रोजेक्टर लगाने की सोच रहे हैं, तो सही माउंटिंग, स्टेबिलिटी और सही प्लेसमेंट के बारे में जानना जरूरी है। सिनेमाहॉल में जाकर फिल्म देखना अधिकतर लोगों को पसंद नहीं होता, क्योंकि वहां घर जैसी सुविधा और आजादी नहीं होती। इस वजह से उन्हें घर पर फिल्में टीवी की छोटी स्क्रीन पर देखनी पड़ती हैं, लेकिन इसका एक उपाय है, घर में प्रोजेक्टर लगाना।

    यदि आप घर में होम प्रोजेक्टर लगाने वाले हैं, तो उसके मुताबिक आप एक निश्चित दूरी से मिलने वाली इमेज के साइज का आकलन कर सकते हैं। यहां दूरी से मतलब आपके प्रोजेक्टर और दीवार या स्क्रीन के बीच की दूरी से है। प्रोजेक्टर के थ्रो रेशियो में दूरी से भाग देकर आप इमेज साइज निकाल सकते हैं।

    यदि प्रोजेक्टर स्क्रीन से 10 फीट की दूरी पर रखा गया है और इसका थ्रो रेश्यो 1.8 से 2.22 है, तो आपको इमेज साइज 54 से लेकर 66 इंच तक की मिलेगी। इमेज पिक्सलेशन से बचने के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि आपके और स्क्रीन के बीच की दूरी, इमेज की चौड़ाई से कम से कम दोगुनी होनी चाहिए।

    बेनक्यू, एप्सन, सोनी, पैनासोनिक और व्यूसोनिक जैसे कई प्रोजेक्टर निर्माता अपनी वेबसाइट पर दूरी कैलकुलेटर मुहैया कराते हैं, ताकि आसानी से उपभोक्ता इनके लिए प्लेसमेंट स्पॉट्स तय कर सकें।

    dlp projector
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    प्रोजेक्टर को उसके काम करने की तकनीक के आधार पर तीन भागों में बांटा गया है, डीएलपी, एलसीडी और एलईडी प्रोजेक्टर। आजकल बाजार में पॉकेट प्रोजेक्टर भी आ गए हैं।

    डीएलपी :

    डीएलपी (डिजिटल लाइट प्रोसेसिंग) में छोटी सी माइक्रोस्कोपिक मिरर की बनी चिप का इस्तेमाल होता है। साथ ही, इसमें एक स्पिनिंग कलर व्हील भी होता है। डीएलपी शार्प इमेजेज देता है, इसका रेस्पॉन्स टाइम भी बेहतर होता है और साथ ही इसमें 3डी आउटपुट की भी क्षमता होती है। यह एक्टिव और पैसिव, दोनों तरह के प्रोजेक्शन को सपोर्ट करता है।

    lcd projector
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    एलसीडी प्रोजेक्टर :

    एलसीडी प्रोजेक्टर्स में लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले का इस्तेमाल होता है। इनमें कोई मूविंग पार्ट्स नहीं होते हैं और इस वजह से ये आमतौर पर कम महंगे होते हैं। एलसीडी में बेहतर सेचुरेशन, कम नॉइज मिलता है और ये बड़े वेन्यूज में ज्यादा बेहतर काम करते हैं। हालांकि, इनके फिल्टर की मेंटिनेंस की जरूरत होती है और इनमें कम कंट्रास्ट होता है।

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