Coronavirus: लॉकडाउन के दौरान अगर स्मार्टफोन न होता तो क्या होता?

अजय वर्मा
टेक डेस्क, अमर उजालाअजय वर्मा
Thu, 09 Apr 2020 02:57 PM IST
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Coronavirus What would happen if there was no smartphone during lockdown know here In hindi
smartphone - फोटो : amar ujala

    स्मार्टफोन पर इंटरनेट, सोशल मीडिया और एप्स में भले ही कई बुराई हो और भले ही हम अपने बच्चों को इनसे दूर रखने की कोशिशें कर चुके हो, मगर इस वक्त इनसे न सिर्फ लोगों को बचाने में मदद मिल रही है और अर्थव्यवस्था को भी इनसे ही सहारा मिल रहा है। स्मार्टफोन और सोशल मीडिया को लेकर हमें अक्सर चेतावनी भरी सलाह मिलती रहती है। लेकिन, आज के इस दौर में जब हम एक महामारी का सामना कर रहे हैं तब तकनीक जीवन बचाने के लिहाज से बेहद अहम साबित हो रही है।

    सांकेतिक तस्वीर
    सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स

    जरा सोचिए, अगर ये 2005 का दौर होता तो कैसे हालात होते। तरब न तेज़ ब्रॉडबैंड था, न स्मार्टफोन और न ही आज के वक्त के टूल्स और एप्स ही थे। उस वक्त अगर हमारा सामना इस महामारी से होता तो शायद हमारी मुश्किलें आसमान छू रही होती। मुझे अभी भी वो वक्त याद है जब अमरीकी राष्ट्रपति केनेडी को गोली मारे जाने की खबर फ्लैश हुई थी। मुझे बर्लिन की दीवार के गिरने और 9/11 की घटनाएं भी याद हैं। लेकिन, हमारी रोजाना की ज़िंदगी पर जितना बड़ा असर इस कोरोना नाम की महामारी ने डाला है उतना इनमें से किसी घटना नहीं डाला था। आज मैं वीडियो-कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अपने सहयोगियों से बात कर सकता हूं, फेसटाइम के जरिए लंदन में एक फ्लैट में फंसे अपने रिश्तेदारों का हालचाल जान सकता हूं और अपने सोशल मीडिया पर भी लिख सकता हूं। लेकिन अगर ये वायरस 2005 में स्मार्टफोन के दौर के शुरू होने से ठीक पहले आया होता तो शायद चीजें अगल होती।

    Facebook
    Facebook - फोटो : amar ujala

    आज हम अलग-अलग कामों के लिए जितने डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करते हैं तब इनमें से शायद ही कोई उपलब्ध रहा हो। फेसबुक उस वक्त केवल एक साल पुराना था, लेकिन वह अमरीका के एक कॉलेज से शुरू हुआ था और उस साल केवल यूके की यूनिवर्सिटी में पहुंचा था। इंस्टाग्राम और व्हाट्सएप के बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था। सोशल मीडिया के बारे में चर्चा तो दूर की बात थी।

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