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भगवान शिव को धतूरा, भांग और जल क्यों सबसे अधिक प्रिय है

Fri, 24 Feb 2017 09:56 AM IST
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल
राकेश्ा झा / टीम डिजिटल Updated Fri, 24 Feb 2017 09:56 AM IST
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why god shiva like dhatura bhang and water
महाशिवरात्रि

भगवान श‌िव की पूजा सबसे आसान मानी जाती है क्योंक‌ि भोलेबाबा को खुश करने के ल‌िए खोआ, म‌िठाई की जरूरत नहीं होती इन्हें मुफ्त में म‌िलने वाले बेलपत्र, धतूरा और एक लोट जल से भी खुश क‌िया जा सकता है। यही कारण है क‌ि श‌िवभक्त महाश‌िवरात्र‌ि का अवसर हो या सामान्य द‌िन श‌िव को खुश करने के ल‌िए इन तीन चीजों से श‌िवल‌िंग की पूजा जरूर करते हैं।

भगवान शिव को धतूरा, भांग और जल क्यों सबसे अध‌िक प्र‌िय है

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श‌िवल‌िंग

श‌िव महापुराण में भगवान श‌िव को नीलकंठ कहा गया है क्योंक‌ि सागर मंथन के समय भगवान भोलेनाथ ने सागर मंथन से उत्पन्न हालाहल व‌िष को पीकर सृष्ट‌ि को तबाह होने से बचाया था। लेक‌िन व‌िष पीने के बाद इसके प्रभाव से भगवान श‌िव का गला नीला पड़ गया क्योंक‌ि इन्होंने व‌िष को अपने गले से नीचे नहीं उतरने द‌िया।

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shivling - फोटो : getty images

इसका पर‌िणाम यह हुआ क‌ि व‌िष भगवान श‌िव के मस्त‌िष्क पर चढ गया और भोलेनाथ अचेत हो गए। ऐसी स्‍थ‌ित‌ि में देवताओं के सामने भगवान श‌िव को होश में लाना एक बड़ी चुनौती बन गई। देवी भाग्वत् पुराण में बताया गया है क‌ि इस स्‍थ‌ित‌ि में आद‌ि शक्त‌ि प्रकट हुई और भगवान श‌िव का उपचार करने के ल‌िए जड़ी बूट‌ियों और जल से श‌िव जी का उपचार करने के ल‌िए कहा।

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भगवान शिव को धतूरा, भांग और जल क्यों सबसे अध‌िक प्र‌िय है

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पूरे दिन चला दुग्धाभिषेक व रुद्राभिषेक का सिलसिला - फोटो : rajesh kumar

भगवान श‌िव के स‌िर से हालाहल की गर्मी को दूर करने के ल‌िए देवताओं ने भगवान श‌िव के स‌िर पर धतूरा, भांग रखा और न‌िरंतर जलाभ‌िषेक क‌िया। इससे श‌िव जी के स‌िर से व‌िष का दूर हो गया। इस समय से ही भगवान श‌िव को धतूरा, भांग और जल चढ़ाया जाने लगा।

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मुक्तसर के मुक्‍तसर के श्री राम भवन में पूजा-अर्चना करते श्रद्धालु। - फोटो : अमर उजाला

आयुर्वेद में भांग और धतूरा का इस्तेमाल औषध‌ि के रूप में होता है। शास्‍त्रों में तो बेल के तीन पत्तों को ‌रज, सत्व और तमोगुण का प्रतीक माना गया है साथ ही यह ब्रह्मा, व‌िष्‍णु और महेश का प्रतीक माना गया है इसल‌िए भगवान श‌िव की पूजा में बेलपत्र का प्रयोग क‌िया जाता है।

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