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Somvati Amavasya 2023: सोमवती अमावस्या आज, जानिए इस दिन क्या करें और क्या न करें
Mon, 20 Feb 2023 08:22 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Mon, 20 Feb 2023 08:22 AM IST
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फाल्गुन अमावस्या 2023: अमावस्या तिथि पर मां गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत पुण्यकारी माना गया है।
- फोटो : अमर उजाला
20 फरवरी का सोमवती अमावस्या है। हिंदू धर्म में सोमवती अमावस्या का विशेष महत्व होता है। सोमवार के दिन इस बार फाल्गुन माह की अमावस्या पड़ रही है जिस कारण से इसका नाम सोमवती अमावस्या कहा जाता है। जब हिंदू पंचांग के अनुसार इस दिन से फाल्गुन माह का कृष्ण पक्ष खत्म हो जाता है। अमावस्या तिथि पर पवित्र नदियों में स्नान, ध्यान, दान और पितरों का तर्पण करने की परंपरा होती है। ऐसी मान्यता है कि सोमवती अमावस्या के दिन यदि कोई व्यक्ति कुछ धर्म-कर्म, दान और पितरों का तर्पण करता है तो उसके जीवन के कष्ट दूर होते हैं। आइए जानते हैं कि जीवन में सुख-शांति के लिए इस दिन क्या करें और क्या नहीं करें।
सोमवती अमावस्या
- फोटो : अमर उजाला
पवित्र नदियों में गंगा स्नान का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि पर मां गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत पुण्यकारी माना गया है। अमावस्या तिथि पर स्नान का उत्तम समय सूर्योदय से पूर्व माना जाता है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर विधिवत स्न्नान करने से भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहती है। इस दिन विधिवत स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या तिथि पर मां गंगा समेत अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना बहुत पुण्यकारी माना गया है। अमावस्या तिथि पर स्नान का उत्तम समय सूर्योदय से पूर्व माना जाता है। मान्यता है कि सोमवती अमावस्या पर विधिवत स्न्नान करने से भगवान विष्णु की कृपा हमेशा बनी रहती है। इस दिन विधिवत स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
surya worship
स्नान के बाद सूर्यदेव को अर्घ्य दें
भगवान सूर्य इस पृथ्वी पर एकमात्र प्रत्यक्ष देवता हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रतिदिन और विशेषकर व्रत-त्योहार के मौके पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देना बहुत ही पवित्र माना जाता है। ऐसे में अमावस्या तिथि पर गंगा स्नान के बाद सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य को अर्घ्य अवश्य प्रदान करना चाहिए।
भगवान सूर्य इस पृथ्वी पर एकमात्र प्रत्यक्ष देवता हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रतिदिन और विशेषकर व्रत-त्योहार के मौके पर भगवान सूर्य को अर्घ्य देना बहुत ही पवित्र माना जाता है। ऐसे में अमावस्या तिथि पर गंगा स्नान के बाद सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य को अर्घ्य अवश्य प्रदान करना चाहिए।
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पीपल
पीपल के वृक्ष की पूजा का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल के पेड़ में पितरों और सभी देवी-देवताओं का वास होता है। अमावस्या तिथि पर पीपल के पेड़ की पूजा करने, जल देने और दीपक जलाने पर सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। पीपल के पेड़ की पूजा करने के बाद उसकी परिक्रमा करना जरूरी होता है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पीपल के पेड़ में पितरों और सभी देवी-देवताओं का वास होता है। अमावस्या तिथि पर पीपल के पेड़ की पूजा करने, जल देने और दीपक जलाने पर सभी तरह की मनोकामनाओं की पूर्ति होती है। पीपल के पेड़ की पूजा करने के बाद उसकी परिक्रमा करना जरूरी होता है।
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Magh Mela 2023 : मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए जुटी भीड़।
- फोटो : अमर उजाला।
दान करने से मिलेगा पुण्य
अमावस्या तिथि पर अन्न, दूध, फल, चावल, तिल और आवंले का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। स्नान- दान आदि के अलावा इस दिन पितरों का तर्पण करने से परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है।
अमावस्या तिथि पर अन्न, दूध, फल, चावल, तिल और आवंले का दान करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। स्नान- दान आदि के अलावा इस दिन पितरों का तर्पण करने से परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है।