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Falgun Amavasya 2023: फाल्गुन अमावस्या आज, जान लें स्नान-दान मुहूर्त, महत्व और योग

Mon, 20 Feb 2023 07:43 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Mon, 20 Feb 2023 07:43 AM IST
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Falgun Amavasya 2023 Date Yog Snan Daan Muhurata signoficance and Pitradosh upay on Fagun Amavasya
कब है फाल्गुन अमावस्या - फोटो : अमर उजाला

Falgun Amavasya 2023: फाल्गुन अमावस्या फाल्गुन मास की  अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस दिन गंगा नदी और अन्य पवित्र नदियों में स्नान करने का बहुत महत्व होता है। भक्त इस दिन पूजा करते हैं। इस दिन पितरों का तर्पण और दान भी किया जाता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास अंतिम मास होता है, इसलिए इस मास में मंत्र जप और तप का विशेष महत्व होता है। इस साल फाल्गुन अमावस्या 20 फरवरी 2023 को मनाई जाएगी। जो लोग इस दिन व्रत रखना चाहते हैं वे व्रत भी रख सकते हैं। इससे व्यक्ति के अच्छे कर्म में वृद्धि होगी जिससे जीवन में शुभता में वृद्धि होगी। फाल्गुन अमावस्या के दिन भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। अकाल मृत्यु, भय, पीड़ा और बीमारी से बचाव के लिए भगवान शिव की पूजा करना कारगर माना जाता है। यह जीवन की कठिनाइयों और जटिलताओं से छुटकारा पाने में मदद करता है। हिन्दू शास्त्रों में इस व्रत को अश्वत्थ प्रदक्षिणा व्रत कहा गया है। इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करनी चाहिए। शनिदेव की भी पूजा करनी चाहिए। आइए जानते हैं फाल्गुन अमावस्या की तिथि, योग,महत्व, स्नान दान का मुहूर्त आदि के बारे में। 

Falgun Amavasya 2023 Date Yog Snan Daan Muhurata signoficance and Pitradosh upay on Fagun Amavasya
कब है फाल्गुन अमावस्या - फोटो : अमर उजाला।

फाल्गुन अमावस्या 2023 तिथि और योग 
कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि आरंभ: 19 फरवरी, रविवार, सायं  04:18 मिनट से  
कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि समाप्त: 20 फरवरी, दोपहर, 12: 35 मिनट तक  
उदयातिथि के आधार पर फाल्गुन अमावस्या 20 फरवरी को है। सोमवार होने के कारण सोमवती अमावस्या भी है। 
परिघ योग में फाल्गुन अमावस्या
फाल्गुन अमावस्या के दिन यानी 20 फरवरी को प्रात:काल से ही परिघ योग बन रहा है। यह योग प्रातः 11: 03 मिनट तक रहेगा। उसके बाद से शिव योग प्रारंभ होगा।  परिघ योग में शनि का प्रभाव अधिक होता है क्योंकि यह शनि से शासित योग है। इस योग में आप शत्रुओं के खिलाफ कोई कार्य करते हैं तो आपको सफलता प्राप्त होगी। शत्रुओं को परास्त करने के लिए आप कोई कदम उठाएंगे तो इस योग में आपके कामयाब होने की संभावना अधिक रहेगी। परिघ योग में कोई शुभ कार्य नहीं करना चाहिए। 

Falgun Amavasya 2023 Date Yog Snan Daan Muhurata signoficance and Pitradosh upay on Fagun Amavasya
कब है फाल्गुन अमावस्या - फोटो : अमर उजाला।
फाल्गुन अमावस्या का महत्व 
अमावस्या तिथि के दिन भगवान विष्णु की पूजा और भगवद कथा का पाठ करना लाभकारी माना जाता है। इस दिन किए गए दान और पुण्य कर्मों का कभी न खत्म होने वाला फल मिलता है। इस दिन पूजा और व्रत करना परिवार और संतान के सुख के लिए लाभकारी माना गया है। यदि परिवार का कोई सदस्य या कोई व्यक्ति पितृ दोष से पीड़ित है या किसी की कुंडली में इस दोष की संभावना है तो इस दिन विशेष पूजा और व्रत करने से इस दोष से मुक्ति मिलती है।

 
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कब है फाल्गुन अमावस्या - फोटो : अमर उजाला

फाल्गुन अमावस्या पर पीपल पूजा
फाल्गुन अमावस्या पर पीपल के वृक्ष की पूजा करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। मान्यता है कि पीपल के पेड़ में त्रिदेवों का वास होता है। जड़ में जल और दूध चढ़ाना चाहिए और फिर फूल, अक्षत, चंदन आदि से पूजा करनी चाहिए। पीपल के पेड़ की 108 परिक्रमा धागे से करनी चाहिए। पीपल के पेड़ के नीचे दीपक जलाना चाहिए।
इसके बाद सामर्थ्य के अनुसार दान करना भी शुभ माना जाता है। इन नियमों का पालन करने से पितृ दोष, गृह दोष और शनि दोष के अशुभ प्रभावों का ध्यान रखा जाता है और परिवार में शांति बनी रहती है।

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कब है फाल्गुन अमावस्या - फोटो : prayagraj
फाल्गुन अमावस्या पर स्नान दान का महत्व
फाल्गुन अमावस्या पर स्नान और दान-पुण्य का विशेष महत्व है। इस दिन मौन धारण करना भी बहुत लाभकारी माना जाता है। देव ऋषि व्यास के अनुसार मौन धारण करना, ध्यान करना और स्नान करना, जब यह सब एक साथ किया जाता है तो इसे सहस्त्र गौ दान के बराबर माना जाता है। पवित्र जल में गोता लगाना, विशेष रूप से कुरुक्षेत्र के ब्रह्म सरोवर में, बहुत शुभ माना जाता है। यह भी माना जाता है कि इस स्थान पर दान करने से विशेष रूप से असीम लाभ मिलता है।
फाल्गुन अमावस्या के दिन पूरे देश से लोग पवित्र नदियों के पास स्नान करने के लिए एकत्रित होते हैं। भक्त माथे पर तिलक भी लगाते हैं। ऐसा करने से भक्त की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जो महिलाएं सोमवती अमावस्या का व्रत करती हैं उन्हें भी इसकी कथा सुननी चाहिए। शास्त्रों के अनुसार भीष्म ने इस दिन का महत्व युधिष्ठिर को समझाया था। भीष्म ने कहा 'जो व्यक्ति इस दिन पवित्र नदी में स्नान करता है उसे सभी दुखों से मुक्ति मिल जाती है।' यह भी माना जाता है कि इस दिन स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और जातक को उनका आशीर्वाद मिलता है।
 
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