Shani Jayanti 2023: सभी नौ ग्रहों में शनि का विशेष महत्व होता है। शनिदेव सूर्यदेव और माता छाया की संतान हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार हर वर्ष शनि जयंती ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को मनाई जाती है। इस कारण से इस तिथि का विशेष महत्व होता है और इस दिन भगवान शनिदेव की विशेष रूप से पूजा-आराधना की जाती है। इस साल शनि जयंती 19 मई 2023 को मनाई जाएगी। ज्योतिष शास्त्र में शनिदेव को कर्मफलदाता और न्यायाधिपति का दर्जा हासिल है। शनि साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव रहने पर जातकों के जीवन में काफी बदलाव देखने को मिलता है। जिन जातकों के जीवन में शनि साढ़ेसाती और शनि दोष संबंधी कोई दोष होता है तो इसे कम करने के लिए शनि जयंती पर इनकी पूजा अर्चना करना काफी लाभदायी माना जाता है। शनि से जुड़े कुछ उपाय करने पर शनिदेव की विशेष कृपा मिलती है।
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Shani Jayanti 2023: कब है शनि जयंती, जानिए पूजा विधि, महत्व और उपाय
Thu, 13 Apr 2023 07:00 AM IST
विनोद शुक्ला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला
Published by: विनोद शुक्ला
Updated Thu, 13 Apr 2023 07:00 AM IST
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शनिदेव
- फोटो : अमर उजाला
Shani Amavasya
- फोटो : Instagram
शनि जयंती तिथि और पूजा मुहूर्त 2023
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि- 18 मई को शाम 9 बजकर 43 मिनट से शुरू
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि समापन- 19 मई को रात 09 बजकर 21 मिनट तक
उदय तिथि के आधार पर 19 मई को शनि जयंती का उत्सव मनाया जाएगा। इस दिन शनिदेव की पूजा और दान करना बहुत शुभ रहेगा।
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि- 18 मई को शाम 9 बजकर 43 मिनट से शुरू
ज्येष्ठ अमावस्या तिथि समापन- 19 मई को रात 09 बजकर 21 मिनट तक
उदय तिथि के आधार पर 19 मई को शनि जयंती का उत्सव मनाया जाएगा। इस दिन शनिदेव की पूजा और दान करना बहुत शुभ रहेगा।
Shani Dev
- फोटो : istock
शनिदेव पूजा विधि
शास्त्रों में शनि जयंती पर भगवान शनि का पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व होता है। शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर सबसे पहले सूर्यदेव को जल दें। फिर इसके बाद अपने घर के पास स्थित मंदिर में जाकर शनिदेव को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। फिर इसके बाद शनिदेव को जल में काले तिल और नीले रंग के फूल को मिलाकर उन्हें अर्पित करें। इसके बाद शनिदेव से जुड़े मंत्रों का जाप करें और अंत में शनि आरती और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
शास्त्रों में शनि जयंती पर भगवान शनि का पूजा-पाठ करने का विशेष महत्व होता है। शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर साफ-सुथरे कपड़े पहनकर सबसे पहले सूर्यदेव को जल दें। फिर इसके बाद अपने घर के पास स्थित मंदिर में जाकर शनिदेव को सरसों के तेल का दीपक जलाएं। फिर इसके बाद शनिदेव को जल में काले तिल और नीले रंग के फूल को मिलाकर उन्हें अर्पित करें। इसके बाद शनिदेव से जुड़े मंत्रों का जाप करें और अंत में शनि आरती और हनुमान चालीसा का पाठ करें।
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shani jayanti 2023
- फोटो : अमर उजाला
शनिदेव से जुड़े मंत्र
- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
- ॐ शं शनैश्चराय नमः।
- ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥
- ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।
- ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।
- ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
- ॐ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
- ॐ शं शनैश्चराय नमः।
- ॐ निलान्जन समाभासं रविपुत्रं यमाग्रजम। छायामार्तंड संभूतं तं नमामि शनैश्चरम॥
- ऊँ शन्नोदेवीर-भिष्टयऽआपो भवन्तु पीतये शंय्योरभिस्त्रवन्तुनः।
- ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।
- ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।
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Happy Shani Jayanti 2021
- फोटो : अमर उजाला
शनि जयंती पर उपाय
- करियर- कारोबार में सफलता और तरक्की पाने के लिए शनि जयंती के दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का नौ दीपक जलाएं।
- संतान सुख प्राप्ति के लिए शनि जयंती की शाम को शनिमंदिर जाकर शनिदेव को जल चढ़ाएं और पीपल के पेड़ की जड़ में काला तिल माला जल अर्पित करें। साथ ही शनि के मंत्रों का लगातार जाप करें। इस उपाय से जीवन में संतान सुख और समृद्धि की प्राप्ति होगी।
- कुंडली से शनि दोष को खत्म करने के लिए गंगा स्नान और दान करना चाहिए।
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