Navratri 2022: 26 सितंबर से शुक्ल व ब्रह्म योग के अद्भुत संयोग में शुरू होंगे नवरात्रि
घटस्थापना मुहूर्त
शारदीय नवरात्रि घटस्थापना का मुहूर्त 26 सितंबर को सुबह 05बजकर 59 मिनट से शुरू होकर 07बजकर 37 मिनट तक है। दूसरा मुहुर्त अभिजित काल में 11:36 से 12:24 तक रहेगा।
नवरात्रि पर ऐसे करें कलश स्थापना
नवरात्रि के पहले दिन घर के मुख्य द्वार के दोनों तरफ स्वास्तिक बनाएं और दरवाजे पर आम के पत्ते का तोरण लगाएं। क्योंकि माता इस दिन भक्तों के घर में आती हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से मां लक्ष्मी भी प्रसन्न होती हैं और आपके घर में निवास करती हैं। नवरात्रि में माता की मूर्ति को लकड़ी की चौकी या आसन पर स्थापित करना चाहिए। जहां मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें वहां पहले स्वास्तिक का चिह्न बनाएं। उसके बाद रोली और अक्षत का तिलक करें और फिर वहां माता की मूर्ति को स्थापित करें। उसके बाद विधि विधान से माता की पूजा करें।
इस दिशा में करें कलश स्थापना
- वास्तुशास्त्र के अनुसार, उत्तर और उत्तर-पूर्व दिशा यानी ईशान कोण को पूजा के लिए सर्वोत्तम स्थान माना गया है। आप भी अगर हर साल कलश स्थापना करते हैं तो आपकी इसी दिशा में कलश रखना चाहिए और माता की चौकी सजानी चाहिए।
- नवरात्र के दिनों में कण-कण में मां दुर्गा का वास माना जाता है और पूरा वातावरण भक्तिमय रहता है। वास्तु में बताया गया है कि एक चावल से भरा पीतल का कलश अपने मंदिर के उत्तर-पूर्व में रखना समृद्धिदायक होता है। ऐसा करने से मां आपके धन-धान्य में वृद्धि करती हैं और आपके घर में समृद्धि आती है।
- ध्यान रहे कि पूजन कक्ष साफ़-सुथरा हो और उसकी दीवारें हल्के पीले, गुलाबी जैसे आध्यात्मिक रंग की हो तो अच्छा है, क्योंकि ये रंग आध्यात्मिक ऊर्जा के स्तर को बढ़ाते हैं। इसके साथ ही काले, नीले और भूरे जैसे तामसिक रंगों का प्रयोग पूजा कक्ष की दीवारों पर नहीं होना चाहिए।
- धर्म शास्त्रों के अनुसार कलश को सुख-समृद्धि, वैभव और मंगल कामनाओं का प्रतीक माना गया है। वास्तु के अनुसार ईशान कोण यानि उत्तर-पूर्व जल एवं ईश्वर का स्थान माना गया है और यहां सर्वाधिक सकारात्मक ऊर्जा रहती है। इसलिए पूजा करते समय माता की प्रतिमा या कलश की स्थापना इसी दिशा में करनी चाहिए। देवी पूजा-अनुष्ठान के दौरान मुख्य द्वार पर आम या अशोक के पत्तों की बंदनवार लगाने से घर में नकारात्मक शक्तियां प्रवेश नहीं करती।
नवरात्रि के नियम
नवरात्रि का व्रत रखने और पूजन करने का कुछ नियम भी होता है। धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक़ जो भक्त इन नियमों के साथ माता रानी की पूजा उपासना करता है उस पर माता रानी की अति कृपा होती है मातारानी उसकी सभी मनोकामनाएं पूरा करती हैं।
धार्मिक कार्यों में मन लगाएं- नवरात्रि के 9 दिनों में व्रतधारी को अपना मन भौतिकता की चीजों से दूर रखना चाहिए। उन्हें अपना मन हमेशा माता रानी के चरणों में लगाकर रखना चाहिए। धार्मिक कार्यों में समय बिताना चाहिए। इस दौरान दुर्गा चालीसा और दुर्गा सप्तशती का पाठ करते रहना चाहिए।
कन्याओं / महिलाओं का सम्मान करना चाहिए- भारतीय परंपरा में कन्याओं को मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। इसी कारण से लोग नवरात्रि में कन्याओं का पूजन कर पुण्य प्राप्त करते हैं। नवरात्रि के दिन में सभी महिलाओं में किसी न किसी देवी का स्वरूप होता है। इसीलिए किसी भी कन्या/ महिला के प्रति असम्मान का भाव नहीं रखना चाहिए बल्कि उनमें मां दुर्गा के किसी न किसी स्वरूप को मानकर मन ही मन प्रणाम करना चाहिए।
घर को न छोड़े अकेला - यदि घर में कलश {घट} की स्थापना हुई हो या माता की चौकी या ज्योति लगी हो तो किसी न किसी को हमेशा उसके पास रहना चाहिए। इस दौरान घर में किसी एक व्यक्ति का होना जरूरी होता है। व्रतधारी को दिन में नहीं सोना चाहिए।
तामसिक भोजन से करें परहेज- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार नवरात्रि के दौरान व्यक्ति को सात्विकता का विशेष ध्यान रखना चाहिए।उन्हें तामसिक प्रवृति के भोजन से परहेज रखना चाहिए. नवरात्रि के 9 दिनों में आहार, व्यवहार और विचार में सात्विकता होनी चाहिए।
कामवासना पर रखें नियंत्रण- नवरात्रि के दिनों में कामवासना से मनसा वाचा कर्मणा विरक्त रहना चाहिए। महिला और पुरुष दोनों को ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए।
क्रोध से रहें दूर-नवरात्रि के दौरान व्यक्ति को क्रोध नहीं करना चाहिए। उन्हें अधिक से अधिक समय तक मौन रहने का प्रयास करना चाहिए।