मार्गशीर्ष की अष्टमी तिथि के दिन बाबा नीब करौरी महाराज के भक्त उनका जन्मोत्सव मनाते हैं। देश विदेश में उनके विभिन्न आश्रमों में आज के दिन उनका जन्मदिवस बड़े ही धूम धाम से मनाया जाता है। महाराज जी के जन्मदिवस के अवसर पर आज हम आपको उनके सबसे बड़े धाम कैंची धाम के बारें में बताते हैं।
बाबा नीब करौरी जन्मोत्सव: चमत्कार और रहस्यों से भरा महाराज जी का कैंची धाम
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देवभूमि उत्तराखंड की वादियों में है एक पवित्र तीर्थ है, जिसे लोग "कैंची धाम" के नाम से जानते हैं। "कैंची धाम" के नीब करौरी बाबा (नीम करौली) की ख्याति विश्वभर में है। बाबा के भक्तों का मानना है कि बाबा हनुमान जी के अवतार थे। नैनीताल से लगभग 65 किलोमीटर दूर कैंची धाम को लेकर मान्यता है कि यहां आने वाला व्यक्ति कभी भी खाली हाथ वापस नहीं लौटता। यहां पर मांगी गयी मनौती पूर्णतया फलदायी होती है। यही कारण है कि देश-विदेश से हज़ारों लोग यहां हनुमान जी का आशीर्वाद लेने आते हैं।
श्री हनुमान जी के अवतार माने जाने वाले बाबा के इस पावन धाम पर पूरे साल श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है, लेकिन हर साल 15 जून को यहां पर एक विशाल मेले व भंडारे का आयोजन होता है। यहां इस दिन इस पावन धाम में स्थापना दिवस मनाया जाता है। बाबा नीब करौरी ने इस आश्रम की स्थापना 1964 में की थी। बाबा 1961 में पहली बार यहां आए और उन्होंने अपने पुराने मित्र पूर्णानंद जी के साथ मिल कर यहां आश्रम बनाने का विचार किया था।
मान्यता है कि बाबा नीब करौरी को हनुमान जी की उपासना से अनेक चामत्कारिक सिद्धियां प्राप्त थीं। लोग उन्हें हनुमान जी का अवतार भी मानते हैं। हालांकि वह आडंबरों से दूर रहते थे। न तो उनके माथे पर तिलक होता था और न ही गले में कंठी माला। एक आम आदमी की तरह जीवन जीने वाले बाबा अपना पैर किसी को नहीं छूने देते थे। यदि कोई छूने की कोशिश करता तो वह उसे श्री हनुमान जी के पैर छूने को कहते थे।