मेष संक्रांति 14 अप्रैल के दिन है। इस दिन सूर्य प्रातःकाल 8 बजकर 10 मिनट पर अश्वनी नक्षत्र में प्रवेश करेंगे। मेष संक्रांति के दिन से सूर्य अपनी उच्चस्थ राशि मेष में चले जाते हैं। हिंदू संस्कृति में मेष संक्रांति का काफी महत्व है।
मेष संक्रान्ति 2018: सूर्य उपासना और गंगा स्नान से समाप्त हो जाते हैं कई तरह के कष्ट
यदि चर्म रोग हो या त्वचा काली पड़ रही हो, तो आज के दिन गंगा में स्नान करें तथा तांबे के बर्तन में शहद रखकर दान करने से रोग समाप्त हो जाएगा।
यदि आंखों में कोई परेशानी हो, सिर में दर्द हो, आधे सिर में दर्द रहता हो, तो सूर्य के बारह नामों वाले मंत्रों का जाप करें तथा बारह ब्राह्मणों को लाल अंगोछा दक्षिणा सहित दान करें, लाभ होगा।
यदि शरीर में पित्त बन रहा हो, तो आज के दिन शक्कर, लाल वस्त्र, लाल रोली, चावल का दान करें। ध्यान रहे यह कार्य, सिद्ध संक्रमण काल के दौरान ही होना चाहिए। यह काल दिनांक 14 अप्रैल 2018 को प्रातः 8 बजकर 10 मिनट से दोपहर 02 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।
यदि जन्म कुंडली में सूर्य द्वादश हो, आठवें भाव, सप्तम भाव में हो, तो अनुकूल प्रभाव नहीं देते, जिसके कारण व्यर्थ का व्यय, तलाक, रोग इत्यादि होते हैं। इन सभी के लिए द्वादश मंत्रों को रोली से लिखकर पूजा स्थान में रखें, दोष दूर हो जाएंगे।
संक्रांति काल में गंगा स्नान का विशेष महत्व है। इस समय किया गया स्नान समस्त रोगों को शांत कर देता है तथा उन्नति प्रदान करता है। इस बार की संक्रांति शनिवार के दिन, शनि के ही नक्षत्र, उत्तरा भाद्रपद में आ रही है। शनि सूर्य के पुत्र हैं।
जिन पिता-पुत्र के संबंध खराब हो, वो आज के दिन एक साथ गंगा स्नान करें, तथा तांबे से बनी सूर्य की आकृति को शिव मंदिर या हनुमान मंदिर में दान करें। ऐसा करने से संबंधों में मिठास आ जाएगी। मान्यता है कि मेष संक्रांति के दिन मंदिर में घंटा दान करने से जातक की चर्चा दूर-दूर तक होती है और उसका यश बढ़ता है।