Paush Maas ki Kalashtami: पौष मास आरंभ हो चुका है। इस महीने का विशेष महत्व है। इस महीने में सूर्य पूजा का खास महत्व है। पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी पूजा की जाती है। कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा की जाती है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और व्रत आदि किया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि काल भैरव भगवान शिव का वाममार्गी स्वरूप हैं। इनको तंत्र मंत्र का देवता भी कहा जाता है। इनकी पूजा करने से सभी प्रकार की नकारात्मकता दूर हो जाती है। कुंडली के ग्रह दोष भी दूर होते हैं। आइए जानते हैं पौष माह की कालाष्टमी तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में।
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Masik Kalashtami 2022: कब है पौष माह की मासिक कालाष्टमी? जानें तिथि, पूजा मुहूर्त और महत्व
Mon, 12 Dec 2022 03:37 PM IST
श्वेता सिंह
धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
धर्म डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली
Published by: श्वेता सिंह
Updated Mon, 12 Dec 2022 03:37 PM IST
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पौष माह की मासिक कालाष्टमी
- फोटो : istock
Paush Maas ki Kalashtami: पौष मास आरंभ हो चुका है। इस महीने का विशेष महत्व है। इस महीने में सूर्य पूजा का खास महत्व है। पौष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को कालाष्टमी पूजा की जाती है। कालाष्टमी के दिन काल भैरव की पूजा की जाती है। हिंदू पंचाग के अनुसार हर माह कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को विधि-विधान के साथ पूजा-अर्चना और व्रत आदि किया जाता है। धार्मिक ग्रंथों में उल्लेख है कि काल भैरव भगवान शिव का वाममार्गी स्वरूप हैं। इनको तंत्र मंत्र का देवता भी कहा जाता है। इनकी पूजा करने से सभी प्रकार की नकारात्मकता दूर हो जाती है। कुंडली के ग्रह दोष भी दूर होते हैं। आइए जानते हैं पौष माह की कालाष्टमी तिथि, मुहूर्त और पूजन विधि के बारे में।
पौष माह की मासिक कालाष्टमी
- फोटो : अमर उजाला
पौष मासिक कालाष्टमी तिथि
पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि का आरंभ: 16 दिसंबर, शुक्रवार, 01: 39 एएम
पौष माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि समाप्त: 17 दिसंबर, शनिवार प्रातः 03:02 मिनट
ऐसे में उदयातिथि की मान्यता के आधार पर मासिक कालाष्टमी व्रत 16 दिसंबर को है।
पौष माह की मासिक कालाष्टमी
- फोटो : अमर उजाला
पूजा मुहूर्त
16 दिसंबर को कालाष्टमी व्रत की पूजा का शुभ मुहूर्त: रात्रि 11:50 मिनट से देर रात 12 बजकर 44 मिनट तक
काल भैरव की पूजा निशिता मुहूर्त में करते हैं।
अभिजित मुहूर्त: प्रातः 11: 56 मिनट से दोपहर 12: 37 मिनट तक
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पौष माह की मासिक कालाष्टमी
- फोटो : अमर उजाला
कालाष्टमी व्रत का महत्व
हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, काल भैरव भगवान शिव के रुद्र अवतार हैं। भक्त अपने क्रोध, लोभ और अन्य व्यसनों से छुटकारा पाने के लिए कालाष्टमी का व्रत रखते हैं। माना जाता है कि काल भैरव अपने भक्तों को अच्छे स्वास्थ्य, धन, समृद्धि और आध्यात्मिकता का आशीर्वाद देते हैं। काल भैरव को सभी मंदिरों के रक्षक क्षेत्रपाल के नाम से भी जाना जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो लोग पूरी भक्ति के साथ भगवान काल भैरव की पूजा करते हैं, भगवान उन्हें बुराई और अंधेरे से बचाते हैं।
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पौष माह की मासिक कालाष्टमी
कालाष्टमी की पूजन विधि
- कालाष्टमी के दिन सुबह स्नानादि से निवृत होने के बाद व्रत का संकल्प लें।
- कालाष्टमी के दिन पूजा स्थल को साफ करें और काल भैरव की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
- इसके बाद घर में गंगाजल छिड़कें और उन्हें फूल अर्पित करें।
- अब काल भैरव को धूप, दीप से पूजन कर नारियल, इमरती, पान, मदिरा का भोग लगाएं।
- इसके बाद कालभैरव के समक्ष चौमुखी दीपक जलाएं।
- पूजा के दौरान भैरव चालीसा और मंत्रों का पाठ करें।
- पूजा के अंत में आरती करें और काल भैरव का आशीर्वाद प्राप्त करें।