घर में हम रोज सुबह-शाम पूजा करते हैं। इस संबंध में ऐसी मान्यता है कि पूजा-पाठ करने से दुख दूर होने के साथ-साथ शांति भी मिलती है। पूजा से घर का वातावरण सकारात्मक और पवित्र बनता है। शास्त्रों में पूजा-पाठ को लेकर कई सारे नियम बताए गए हैं। बताए गए नियमों का पालन करने से पूजा करने पर बेहतर फल मिलता है। इसलिए हम आपको बताने जा रहे हैं पूजा के दौरान किन-किन नियमों का पालन करना चाहिए।
घर में या मंदिर में जब भी कोई खास पूजा करें तो अपने इष्टदेव के साथ ही स्वास्तिक, कलश, नवग्रह देवता, पंच लोकपाल, षोडश मातृका व सप्त मातृका की पूजा जरूर करें। इसके अलावा इस बात का भी ध्यान रखें कि पूजन स्थल के ऊपर कोई कबाड़ या भारी चीज ना रखें। गंगाजल, तुलसी के पत्ते, बिल्वपत्र और कमल, ये चारों चीजें किसी भी अवस्था में बासी नहीं होते। इसलिए इनका उपयोग पूजा के दौरान किसी भी समय किया जा सकता है। इन चारों चीजों के अलावा भगवान को कभी भी बासी जल, फूल और पत्ते नहीं चढ़ाने चाहिए।
देवी-देवताओं के सामने ही धूप व दीप जलाना चाहिए और भोग लगाना चाहिए। पूजा में जलाए गए दीपक को कभी भी खुद ना बुझाएं। भगवान सूर्य की 7 परिक्रमा, श्रीगणेश की तीन परिक्रमा, विष्णुजी की चार परिक्रमा और भोलेनाथ की आधी परिक्रमा करनी चाहिए।
अगर आपके घर में कोई वास्तु दोष है तो सुबह-शाम घी का दीपक जलाएं। इससे वास्तु दोष को दूर होते ही हैं साथ ही पवित्रता भी बढ़ती है। इसके अलावा भगवान श्री गणेश, मां दुर्गा, शिवजी, विष्णुजी और सूर्यदेव को पंचदेव माना जाता है। इसलिए जिन लोगों को सुख की इच्छा है उनको हर रोज पंचदेव की पूजा करनी चाहिए।
पूजा के दौरान हम भगवान को हर तरह का फूल चढ़ाते हैं। लेकिन हमें इस बात का भी ध्यान रखना चाहिए कि कौन से भगवान को किस तरह के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए। जैसे कि भोलेनाथ को केतकी के फूल नहीं चढ़ाने चाहिए और तुलसी का उपयोग नहीं करना चाहिए। सूर्य भगवान को अगस्त्य के फूल नहीं चढ़ाना चाहिए। भगवान गणेश की पूजा में तुलसी के पत्ते कभी नहीं रखने चाहिए।