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Chaturmas 2025: चातुर्मास में आ रहा है जुलाई का पहला प्रदोष व्रत, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा विधि

Wed, 02 Jul 2025 05:28 PM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: श्वेता सिंह Updated Wed, 02 Jul 2025 05:28 PM IST
सार

July Pradosh Vrat: जुलाई 2025 का पहला प्रदोष व्रत चातुर्मास की शुरुआत में पड़ रहा है, जिससे इसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ गया है। इस विशेष संयोग में भगवान शिव की उपासना करने से अत्यंत पुण्य और मनोकामना पूर्ति का योग बनता है।
 

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July First Pradosh Vrat to Fall During Chaturmas,Know Auspicious Timings & Puja Vidhi
जुलाई प्रदोष व्रत - फोटो : adobe stock

Pradosh Vrat Muhurat: सावन के पवित्र महीने की शुरुआत के साथ ही शिव भक्तों के लिए विशेष महत्व रखने वाला प्रदोष व्रत भी आ रहा है। खास बात यह है कि जुलाई 2025 का पहला प्रदोष व्रत चातुर्मास के दौरान पड़ रहा है, जिससे इसका महत्व और बढ़ गया है। चातुर्मास को देवी-देवताओं के विश्राम का समय माना जाता है, जब भगवान विष्णु योगनिद्रा में और भगवान शिव कैलाश पर्वत पर तपस्या में लीन रहते हैं। ऐसे में इस समय में किए गए व्रत, पूजा-पाठ और उपासना का फल सामान्य दिनों की तुलना में कई गुना अधिक होता है।


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प्रदोष व्रत का दिन शिव आराधना के लिए बेहद शुभ माना गया है। इस दिन व्रत रखने वाले भक्त दिनभर निर्जल या फलाहार व्रत रखते हैं और शाम को प्रदोष काल में भगवान शिव की विशेष पूजा करते हैं। शिवलिंग पर जल, दूध और बेलपत्र चढ़ाने के साथ-साथ शिव चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। यह व्रत व्यक्ति को नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति, मानसिक शांति और पारिवारिक सुख प्रदान करता है। चातुर्मास और सावन के संयोग में आने वाला यह प्रदोष व्रत आत्मिक उन्नति और शिव कृपा के द्वार खोलने का उत्तम अवसर है। आइए जानते हैं जुलाई के पहले प्रदोष व्रत का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि। 
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July First Pradosh Vrat to Fall During Chaturmas,Know Auspicious Timings & Puja Vidhi
जुलाई प्रदोष व्रत - फोटो : freepik

तिथि और शुभ मुहूर्त 
जुलाई महीने का पहला प्रदोष व्रत इस बार 8 जुलाई 2025 को रखा जाएगा। यह व्रत मंगलवार के दिन पड़ रहा है, इसलिए इसे भौम प्रदोष व्रत कहा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भौम प्रदोष व्रत का विशेष महत्व होता है, क्योंकि यह व्रत शिव भक्तों को मानसिक शांति, पारिवारिक सुख और रोगों से मुक्ति दिलाने वाला माना गया है।
इस दिन शिव आराधना के लिए प्रदोष काल में पूजा करना अत्यंत फलदायी होता है। 8 जुलाई को प्रदोष काल का शुभ मुहूर्त शाम 7 बजकर 23 मिनट से रात 9 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। इस समय में भगवान शिव को जल, दूध, बेलपत्र और धूप-दीप अर्पित कर, शिव चालीसा या महामृत्युंजय मंत्र का जाप करने से भक्तों को विशेष पुण्य और शिव कृपा प्राप्त होती है।

July First Pradosh Vrat to Fall During Chaturmas,Know Auspicious Timings & Puja Vidhi
जुलाई प्रदोष व्रत - फोटो : freepik

प्रदोष व्रत का महत्व 
चातुर्मास के पावन काल में आने वाला प्रदोष व्रत बेहद विशेष और शुभ फलदायक माना जाता है। चातुर्मास वह आध्यात्मिक अवधि है जब भगवान विष्णु क्षीर सागर में योगनिद्रा में लीन हो जाते हैं। इस दौरान चारों ओर की धार्मिक, मानसिक और आध्यात्मिक ऊर्जा विशेष रूप से सक्रिय मानी जाती है, और सृष्टि की जिम्मेदारी भगवान शिव के हाथों में आ जाती है। ऐसे में शिव पूजा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।
प्रदोष व्रत, विशेष रूप से सोम प्रदोष (जब यह व्रत सोमवार को पड़ता है), भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना का उत्तम अवसर माना जाता है। इस दिन भक्तजन शिवलिंग पर जल, दूध और पंचामृत से अभिषेक करते हैं, और विशेष मंत्रों एवं आरतियों के माध्यम से शिवशंकर को प्रसन्न करते हैं।
चातुर्मास में किया गया प्रदोष व्रत न केवल पापों का शमन करता है, बल्कि मानसिक शांति, धन-धान्य, और आरोग्यता का भी वरदान देता है। जिन दंपतियों को संतान प्राप्ति में कठिनाई हो रही हो, उनके लिए यह व्रत विशेष रूप से फलदायी माना गया है। शिव-पार्वती की संयुक्त आराधना से वैवाहिक जीवन में मधुरता आती है और पारिवारिक सुख-संवृद्धि बढ़ती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और सच्चे मन से व्रत व पूजन करने से भगवान शिव अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं और उनके जीवन से नकारात्मकता दूर होती है। चातुर्मास में शिव आराधना करने वाले भक्तों को देवी-देवताओं की कृपा भी सहज रूप से प्राप्त होती है। इस दृष्टि से देखें तो यह प्रदोष व्रत केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि आत्मिक उन्नति और जीवन में संतुलन लाने का सशक्त माध्यम है।

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जुलाई प्रदोष व्रत - फोटो : freepik

पूजा विधि 

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-सुथरे वस्त्र पहनें। 
  • व्रत का संकल्प लें और मन ही मन भगवान शिव का ध्यान करें। 
  • घर के पूजा स्थान को स्वच्छ करके शिव-पार्वती की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। 
  • पूजा सामग्री में बेलपत्र, धतूरा, भांग, शमी पत्र, सफेद चंदन, अक्षत, पुष्प, धूप, दीप, गंगाजल, पंचामृत, फल और मिठाई रखें। 
  • प्रदोष काल में पूजा आरंभ करें। 
  • शिवलिंग पर गंगाजल और पंचामृत से अभिषेक करें। 
  • भगवान शिव को बेलपत्र, फूल, भांग, धतूरा, शमी पत्र अर्पित करें। 
  • ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। 
  • प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें या सुनें। 
  • भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें। 
  • भोग अर्पित करें और पूजा के बाद प्रसाद सभी में बांटें। 
  • अगले दिन सूर्योदय के बाद व्रत का पारण करें। 


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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