Lord Ganesha Idol: हिंदू धर्म में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य माना गया है। किसी भी शुभ कार्य से पहले विघ्नहर्ता गणपति की आराधना करना अनिवार्य माना जाता है। गणेश चतुर्थी का अवसर गणपति बप्पा की आराधना के लिए सबसे शुभ माना जाता है। इस दौरान लोग अपने घरों में भगवान गणेश की स्थापना करते हैं। लेकिन केवल शुभ मुहूर्त देखकर मूर्ति की स्थापना नहीं की जाती है। इसके अलावा भी कई नियमों का पालन करना जरूरी होता है। गणपति की प्रतिमा घर लाने से पहले यह देखना भी जरूरी है कि मूर्ति कैसी हो और किस दिशा में स्थापित की जाए। आइए जानते हैं गणेश प्रतिमा के चुनाव और स्थापना के खास नियम...
Lord Ganesha Idol: गलती से भी घर में न रखें गणेश जी की ऐसी प्रतिमा, जानें सही नियम
गणपति की प्रतिमा घर लाने से पहले यह देखना भी जरूरी है कि मूर्ति कैसी हो और किस दिशा में स्थापित की जाए। आइए जानते हैं गणेश प्रतिमा के चुनाव और स्थापना के खास नियम...
- घर लाने के लिए गणेश प्रतिमा खरीदते समय केवल सजावट पर ही ध्यान देना काफी नहीं है। वास्तु शास्त्र के अनुसार प्रतिमा का चुनाव नियमों का ध्यान में रखते हुए करना चाहिए।
- सबसे शुभ प्रतिमा वही मानी जाती है जिसमें गणेश जी बैठी हुई मुद्रा में होते हैं और उनकी सूंड बाईं ओर मुड़ी होती है। ऐसी मूर्ति घर में सुख-समृद्धि, शांति और स्थिरता लाने का काम करती है।
- इसके अलावा गणेश जी की मूर्ति को घर की ईशान कोण (उत्तर-पूर्व दिशा) में स्थापित करना शुभ माना जाता है। यदि उत्तर दिशा संभव न हो तो पूर्व दिशा में भी इनकी स्थापना कर सकते हैं।
- इसके साथ ही प्रतिमा के रंग का भी महत्व होता है। लाल या सिंदूरी रंग की प्रतिमा ऊर्जा और उत्साह का प्रतीक मानी जाती है, जबकि सफेद रंग की मूर्ति घर में शांति और खुशहाली बनाए रखती है।
गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त
इस वर्ष गणेश चतुर्थी का पर्व 27 अगस्त, बुधवार को मनाया जाएगा। इस साल चतुर्थी तिथि का प्रारम्भ 26 अगस्त को दोपहर 01:54 बजे होगा और इसका समापन 27 अगस्त को शाम 03:44 बजे होगा। इस दिन गणेश पूजा मुहूर्त सुबह 11:05 बजे से दोपहर 01:40 बजे तक रहेगा। यह अवधि 2 घंटे 34 मिनट के लिए रहने वाली है।
Ganesh Chaturthi 2025: गणेशजी की पूजा में वास्तु से जुड़े हुए इन नियमों का रखें ध्यान, बप्पा होंगे प्रसन्न
गणेश जी का भोग
गणपति बप्पा को मोदक सबसे प्रिय है। माना जाता है कि मोदक का भोग लगाने से भगवान गणेश प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करते हैं।