फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Spirituality ›   Festivals ›   Ganesh Chaturthi 2025 Start Date Murti Sthapana Rules Puja Vidhi And Importance In Hindi

Ganesh Chaturthi 2025: गणेशजी की पूजा में वास्तु से जुड़े हुए इन नियमों का रखें ध्यान, बप्पा होंगे प्रसन्न

Thu, 21 Aug 2025 12:57 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: विनोद शुक्ला Updated Thu, 21 Aug 2025 12:57 PM IST
सार

Ganesh Chaturthi 2025: वास्तु शास्त्र के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा या चित्र को घर या पूजा स्थान के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में स्थापित करना अत्यंत शुभ होता है। यह दिशा ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा की प्रतीक मानी जाती है।

विज्ञापन
Ganesh Chaturthi 2025 Start Date Murti Sthapana Rules Puja Vidhi And Importance In Hindi
Ganesh Chaturthi 2025 - फोटो : freepik

विस्तार

Ganesh Chaturthi 2025: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाने वाला गणेश चतुर्थी पर्व इस वर्ष 27 अगस्त 2025, बुधवार को आ रहा है। विघ्नहर्ता और मंगलकर्ता गणेशजी की पूजा का यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से पूजन करने पर घर-परिवार में सुख-समृद्धि और सौभाग्य का वास होता है। धार्मिक मान्यताओं के साथ-साथ वास्तु शास्त्र में भी गणपति पूजन के कुछ नियम बताए गए हैं, जिनका पालन करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।
विज्ञापन


1. गणेश प्रतिमा की दिशा
वास्तु शास्त्र के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा या चित्र को घर या पूजा स्थान के उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) में स्थापित करना अत्यंत शुभ होता है। यह दिशा ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा की प्रतीक मानी जाती है। इस स्थान पर गणेश प्रतिमा रखने से घर में सुख-शांति और धन-धान्य की वृद्धि होती है।
विज्ञापन


2. प्रतिमा का स्वरूप और मुद्रा
धार्मिक मान्यता है कि गणपति की बैठी हुई मुद्रा (आसनस्थ) प्रतिमा घर में रखने के लिए श्रेष्ठ है, क्योंकि यह स्थिरता, शांति और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक है। वहीं, व्यापार स्थल पर खड़ी हुई मुद्रा वाली प्रतिमा लाभ और निरंतर प्रगति का संकेत देती है। प्रतिमा चुनते समय यह भी ध्यान रखना चाहिए कि घर में बाईं ओर मुड़ी हुई सूंड वाली प्रतिमा ही स्थापित करें। इसे सुख-समृद्धि प्रदान करने वाली माना गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन

Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी पर स्थापना करते वक्त भूलकर भी न करें ये 7 गलतियां, वरना नहीं मिलेगा फल

3. पूजा स्थान और दिशा
गणेश चतुर्थी पर पूजा करते समय श्रद्धालु को पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठना चाहिए। यह दिशा ज्ञान और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करती है। ऐसा करने से पूजा का फल कई गुना बढ़ जाता है।

4. पूजा में उपयोगी सामग्री
गणपति पूजन में लाल फूल, दूर्वा (दूब), मोदक और सिंदूर का विशेष महत्व है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दूर्वा और मोदक गणपति के प्रिय हैं, इसलिए इनके बिना पूजा अधूरी मानी जाती है। वास्तु शास्त्र कहता है कि पूजा की थाली तांबे या पीतल के पात्र में सजाई जाए तो यह और अधिक शुभ फल देती है।

Ganesh Chaturthi 2025: गणेश चतुर्थी से पहले घर से बाहर कर दें ये चीजें, गणपति बप्पा खुद पधारेंगे घर

5. प्रतिमा के पीछे स्थान
वास्तु की दृष्टि से गणेश प्रतिमा को इस प्रकार रखना चाहिए कि उनके पीछे कुछ खाली स्थान अवश्य रहे। इसे “प्राण क्षेत्र” कहा जाता है। इस स्थान के खाली रहने से घर और पूजा स्थल में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है। यदि प्रतिमा को दीवार से सटाकर रखा जाए तो ऊर्जा का संचार बाधित हो सकता है।

6. दीपक और जल का स्थानिा
गणपति पूजन के समय दीपक को सदैव दक्षिण-पूर्व (अग्नि कोण) दिशा में रखना शुभ माना जाता है। इसी प्रकार पूजा स्थल पर रखा जल का कलश ईशान कोण में होना चाहिए। यह व्यवस्था धार्मिक और वास्तु दोनों दृष्टियों से लाभकारी मानी गई है और पूजा के प्रभाव को कई गुना बढ़ा देती है।


 
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed