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Narak Chaturdashi 2020: छोटी दिवाली की रात घर के मुख्य द्वार पर इसलिए जलाया जाता है दीया

Fri, 13 Nov 2020 08:51 AM IST
रुस्तम राणा धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Fri, 13 Nov 2020 08:51 AM IST
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Diwali 2020 know the reason behind the light a lamp in front main door in Diwali
दिवाली 2020: दीपावली के एक दिन पहले मनायी जाती है छोटी दिवाली - फोटो : Pixabay

Choti Diwali 2020: दिवाली से एक दिन पहले छोटी दिवाली मनाने का रिवाज है। इस साल छोटी दिवाली 13 नवंबर को मनायी जाएगी। छोटी दिवाली नरक चतुर्दशी के दिन मनायी जाती है। मान्यता के अनुसार, छोटी दिवाली की रात में घरों में बुजुर्ग व्यक्ति द्वारा एक दीपक जलाकर पूरे घर में घुमाया जाता है और उस दीपक को घर से बाहर कहीं दूर रख दिया जाता है। इस दिन मुख्य द्वार पर दीपक जलाने का विधान है लेकिन क्या आप जानते है कि छोटी दिवाली क्यों दीपक क्यों जलाया जाता है, आइए पौराणिक कथाओं से जानते है कि इसके पीछे की वजह- 

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दरअसल छोटी दिवाली अमावस्या की रात से एक दिन पहले पड़ती है - फोटो : Pixabay

चांद न निकलने की वजह से जलाया जाता गया दीया
दरअसल छोटी दिवाली अमावस्या की रात से एक दिन पहले पड़ती है और अमावस्या तिथि के स्वामी यमराज होते हैं। अमावस्या की रात चांद नहीं दिखाई पड़ता है और चांद ना निकलने की वजह से कही भटक ना जाएं इसके लिए एक बड़ा दीपक घर के मुख्य द्वार पर जलाया जाता है।

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दिवाली 2020 - फोटो : Pixabay
नरक चतुर्दशी की पौराणिक कथा

एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार रति देव नाम के एक धर्मात्मा थे। उन्होंने अपने जीवन में कभी कोई पाप नहीं किया लेकिन फिर भी मृत्यु के दौरान उन्हें नरक लोक मिला यह देखकर राजा बोले कि मैंने कभी कोई पाप नहीं किया तो फिर आप क्यों मुझे लेने आए हो आपके आने का मतलब मुझे नरक में स्थान मिला है। 

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दिवाली 2020 - फोटो : Pixabay
जब राजा ने मांगा एक वर्ष का समय

यह बात सुनकर यमदूत ने कहा कि हे वत्स एक बार आपके द्वार से एक ब्राह्मण भूखा पेट लौट गया था, यह आपके उसी कर्म का फल है। इस बात को सुन राजा ने यमराज से एक वर्ष का समय मांगा और ऋषियों के पास अपनी इस समस्या को लेकर पहुंचे तब ऋषियों ने उन्हें कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का व्रत रखने और ब्राह्मणों को भोजन कराकर उनसे माफी मांगने को कहा। 

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diwali 2020 - फोटो : अमर उजाला
ऐसे शुरू हुई दीप जलाने की परंपरा

एक साल बाद यमदूत राजा को फिर लेने आए, इस बार उन्हें नरक के बजाय स्वर्ग लोक ले गए तब ही से कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष को दीप जलाने की परंपरा शुरू हुई। ताकि भूल से हुए पाप को भी क्षमादान मिल सके।

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