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Hal Shashthi 2026: हरछठ की पूजा में क्यों नहीं चढ़ाया जाता हल से जुड़ा अनाज? जानें जरूरी नियम

Tue, 01 Sep 2026 11:55 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 01 Sep 2026 11:55 AM IST
सार

Hal Shashthi 2026: हरछठ व्रत में हल से जोती गई भूमि की उपज का सेवन और पूजन नहीं किया जाता। भगवान बलराम को समर्पित इस पर्व पर प्राकृतिक रूप से उगी चीजों का विशेष महत्व है। जानें इस परंपरा के पीछे की मान्यता और जरूरी नियम।

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Hal Shashthi 2026 Know Why Plough-Grown Crops Are Avoided During Harchhat Vrat Know the niyam
हरछठ 2026 - फोटो : amar ujala

Harchat Vrat 2026: हरछठ या हलषष्ठी का पर्व संतान की सुख-समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना से किया जाता है। इस दिन महिलाएं विधि-विधान से पूजा करने के साथ कई कठिन नियमों का पालन भी करती हैं। खास बात यह है कि हरछठ की पूजा और व्रत में उन खाद्य पदार्थों का इस्तेमाल नहीं किया जाता, जिनका संबंध हल से जोती गई भूमि से हो। यही वजह है कि इस पर्व पर सामान्य अनाज के बजाय बिना जुताई वाली भूमि या प्राकृतिक रूप से उगने वाली चीजों को विशेष महत्व दिया जाता है।


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हल से जुड़े अनाज का सेवन क्यों वर्जित

हल से जुड़े अनाज का सेवन क्यों वर्जित?
धार्मिक मान्यता के अनुसार हरछठ भगवान बलराम को समर्पित पर्व है। भगवान बलराम का प्रमुख अस्त्र हल माना जाता है। इसलिए इस दिन हल से जुड़ी खेती की उपज को ग्रहण करना वर्जित माना गया है।मान्यता है कि हरछठ के दिन महिलाएं हल से जोती गई जमीन में उगे अनाज, फल और सब्जियों का सेवन नहीं करतीं। इसके पीछे भगवान बलराम के प्रति श्रद्धा और उनके अस्त्र हल के सम्मान की भावना जुड़ी हुई है। इसी कारण पूजा में भी ऐसे अनाज को प्राथमिकता दी जाती है, जो प्राकृतिक रूप से बिना जुताई वाली भूमि पर उगे हों। यह परंपरा हरछठ व्रत की सबसे विशिष्ट विशेषताओं में से एक है।

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पूजा में सात प्रकार के अन्न का महत्व - फोटो : freepik.com

पूजा में सात प्रकार के अन्न का क्या महत्व?
हरछठ की पूजा में सात प्रकार के अन्न रखना विशेष माना जाता है। क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार इसमें धान, गेहूं, मक्का, चना, मूंग, सेमी और अरहर जैसे अनाज शामिल किए जाते हैं। इन अन्नों को पूजा में रखने का उद्देश्य केवल खाद्य सामग्री का प्रदर्शन नहीं, बल्कि कृषि, प्रकृति और अन्न के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करना भी माना जाता है। कई स्थानों पर महिलाएं सामूहिक रूप से सात अन्न की पूजा करती हैं। हालांकि, व्रत के दौरान इनका सेवन नहीं किया जाता। हरछठ की परंपरा में पूजा और प्रसाद के लिए प्राकृतिक रूप से प्राप्त वस्तुओं को विशेष महत्व दिया जाता है।

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हरछठ पर किन चीजों का किया जाता है इस्तेमाल? - फोटो : amar ujala

हरछठ पर किन चीजों का किया जाता है इस्तेमाल?
हरछठ की पूजा में ऐसी कई वस्तुएं शामिल होती हैं, जो सामान्य पूजा सामग्री से अलग होती हैं। इनमें महुआ, पसही या जंगली चावल, कांस के फूल, बेर, महुआ के पत्ते और प्राकृतिक रूप से उगने वाली अन्य वस्तुएं प्रमुख हैं। कुछ क्षेत्रों में प्रसाद के लिए जंगली पड़ोरा की सब्जी का भी इस्तेमाल किया जाता है। पड़ोरा को कई स्थानों पर अलग-अलग नामों से जाना जाता है और यह बरसात के मौसम में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली सब्जियों में शामिल है। पूजा सामग्री की सूची स्थानीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

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भैंस के दूध और दही का होता है इस्तेमाल - फोटो : Adobe stock

भैंस के दूध और दही का क्यों होता है इस्तेमाल?
हरछठ व्रत में भैंस के दूध, दही और घी का विशेष महत्व बताया गया है। पारंपरिक रूप से व्रती महिलाएं इन्हीं चीजों का इस्तेमाल करती हैं। कई क्षेत्रों में यह भी मान्यता है कि पूजा और व्रत के लिए ऐसी भैंस का दूध लिया जाए, जिसका बच्चा जीवित हो। यह स्थानीय धार्मिक परंपरा का हिस्सा है और अलग-अलग क्षेत्रों में इसके नियमों में अंतर देखने को मिल सकता है।

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