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Darsh Amavasya 2026: दर्श अमावस्या पर क्यों की जाती है चंद्रमा की पूजा, कैसे शुरू हुई परंपरा?

Tue, 01 Sep 2026 12:29 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
धर्म डेस्क, अमर उजाला Published by: श्वेता सिंह Updated Tue, 01 Sep 2026 12:29 PM IST
सार

Darsh Amavasya 2026: दर्श अमावस्या 10 सितंबर को मनाई जाएगी। इस दिन पितरों के तर्पण के साथ चंद्रमा की पूजा करने की भी परंपरा है। जानें अमावस्या पर चंद्र पूजा क्यों की जाती है और इसके पीछे की धार्मिक मान्यता क्या है।

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Darsh Amavasya 2026 Moon Worship on Amavasya Has a Special Significance Know the reason
दर्श अमावस्या - फोटो : amar ujala

Darsh Amavasya 2026: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष महत्व बताया गया है। सालभर में आने वाली प्रत्येक अमावस्या का अपना धार्मिक महत्व होता है। पितरों के तर्पण, दान-पुण्य और धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अमावस्या की तिथि महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसी क्रम में दर्श अमावस्या पर चंद्रमा की पूजा करने की भी परंपरा है। लेकिन सवाल है कि जब अमावस्या के दिन चंद्रमा दिखाई ही नहीं देता, तो फिर इस दिन चंद्र पूजा क्यों की जाती है? आइए जानते हैं इसके पीछे की धार्मिक मान्यता और परंपरा।

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अमावस्या - फोटो : adobe stock

सितंबर में कब है दर्श अमावस्या?
हिंदू पंचांग के अनुसार, भाद्रपद अमावस्या के बाद आने वाली दर्श अमावस्या 10 सितंबर 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी। अमावस्या तिथि 10 सितंबर को सुबह 10 बजकर 33 मिनट से शुरू होकर 11 सितंबर 2026 को सुबह 8 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि और स्थानीय पंचांग के अनुसार व्रत एवं धार्मिक कार्यों की तिथि में क्षेत्रीय अंतर हो सकता है। इसलिए पूजा के लिए अपने शहर के पंचांग का समय देखना उचित रहेगा।

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दर्श अमावस्या पर क्यों की जाती है चंद्रमा की पूजा - फोटो : adobe stock

दर्श अमावस्या पर क्यों की जाती है चंद्रमा की पूजा?
दर्श अमावस्या का संबंध चंद्र उपासना से भी जोड़ा जाता है। वैदिक परंपरा और ज्योतिष में चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक स्थिति का कारक माना गया है। यही वजह है कि चंद्र देव की पूजा को मन की शांति और भावनात्मक संतुलन से जोड़कर देखा जाता है। मान्यता है कि इस दिन चंद्रमा का ध्यान और पूजन करने से मन को स्थिरता मिलती है और व्यक्ति को सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त होती है। जिन लोगों की कुंडली में चंद्रमा कमजोर माना जाता है, वे भी इस दिन विशेष रूप से चंद्र देव की उपासना करते हैं।

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अमावस्या पर चंद्रमा की पूजा की परंपरा कैसे शुरू हुई - फोटो : उज्जवल गुप्ता

अमावस्या पर चंद्रमा की पूजा की परंपरा कैसे शुरू हुई?
दर्श अमावस्या पर चंद्र पूजा की परंपरा के पीछे धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताएं जुड़ी हुई हैं। वैदिक ज्योतिष में चंद्रमा को मन का प्रतिनिधि ग्रह माना जाता है। इसलिए चंद्र देव की आराधना को मानसिक शांति, संयम और सुख से संबंधित माना गया। अमावस्या वह तिथि है जब चंद्रमा का प्रकाश दिखाई नहीं देता। ऐसे में इस दिन चंद्र तत्व की पूजा करने की परंपरा को चंद्र देव के प्रति श्रद्धा और उनके प्रभाव को संतुलित करने की धार्मिक भावना से जोड़ा जाता है।

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पितरों के लिए भी खास मानी जाती है दर्श अमावस्या - फोटो : adobe stock

पितरों के लिए भी खास मानी जाती है दर्श अमावस्या
अमावस्या की तिथि पितरों के निमित्त किए जाने वाले कार्यों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। दर्श अमावस्या पर भी लोग अपने पूर्वजों का स्मरण करते हैं और उनकी आत्मिक शांति के लिए तर्पण, दान आदि करते हैं। धार्मिक मान्यता है कि श्रद्धा के साथ पितरों का तर्पण करने से उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है। कई लोग इस दिन जरूरतमंदों को भोजन और वस्त्र का दान भी करते हैं।

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